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एक बेहतर नैगम शासन प्रतिभूति बाजार में विनियामक ढांचे का प्रमुख उद्देश्‍य है। तदनुसार, भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (सेबी) ने देश में विद्यमान नैगम शासन प्रक्रियाओं की पर्याप्‍तता का मूल्‍यांकन करने तथा इन प्र‍क्रियाओं में और सुधार लाने के उद्देश्‍य से अनेक प्रयास किए है। यह अपने निम्‍न कानूनी तथा विनियामक रूपरेखा के प्रयोग के जरिए नैगम शासन के मानकों को क्रियान्वित तथा अनुरक्षित कर रहा है।

1. प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956

इस अधिनियम का अधिनियमन प्रतिभूतियों में लेन देन के व्‍यवसाय को विनियमित करके उनमें अवांछित सौदों को रोकने तथा उनमें सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए किया गया था। कोई भी स्‍टॉक एक्‍सचेंज, जो मान्‍यता प्राप्‍त करने का इच्‍छुक है, निर्धारित तरीके से केन्‍द्र सरकार को आवेदन कर सकता है। प्रत्‍येक आवेदनपत्र में यथा निर्धारित विवरण निहित होंगे तथा उसके साथ संविदाओं के विनियमन तथा नियंत्रण के लिए स्‍टॉक एक्‍सचेंज की उप विधियों की प्रति तथा साथ ही सामान्‍यत: स्‍टॉक एक्‍सचेंजों के संघटन से तथा विशेष रूप से निम्‍न से संबंधित नियमों की प्रति संलग्‍न की जाएगी।:- (i) ऐसे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का शासी निकाय, इसका संघटन तथा प्रबंधन की शक्तियां तथा तरीका जिससे व्‍यवसाय का लेन देन किया जाना है; (ii) स्‍टॉक एक्‍सचेंज के पदधारकों की शक्तियां तथा कर्त्तव्‍य; (iii) विभिन्‍न श्रेणियों के सदस्‍यों की स्‍टॉक एक्‍सचेंज में प्रविष्टि, सदस्‍यता के लिए अर्हकताएं तथा स्‍टॉक एक्‍सचेंज से या उसमें सदस्‍यों का निष्‍कासन, निलम्‍बन, बहिष्‍करण तथा पुन: प्रवेश ; (iv) उन मामलो में स्‍टॉक एक्‍सचेंज के सदस्‍यों के रूप में भागीदारियों के पंजीकरण के लिए प्रक्रिया जहां नियमों से ऐसी सदस्‍यता की व्‍यवस्‍था है, तथा प्राधिकृत प्रतिनिधियों तथा लिपिकों का नामांकन तथा नियुक्ति।

प्रत्‍येक मान्‍यता प्राप्‍त स्‍टॉक एक्‍सचेंज केन्‍द्र सरकार को वार्षिक रिपोर्ट की एक प्रति प्रस्‍तुत करेगा तथा ऐसी वार्षिक रिपोर्ट में यथा निर्धारित विवरण निहित होंगे। यह निम्‍न मामलों में से सब की या किस एक की व्‍यवस्‍था करने के लिए नियम बना सकता है या अपने द्वारा बनाए गए नियमों में संशोधन कर सकता है, नामत; (i) किसी भी बैठक में स्‍टॉक एक्‍सेचेज के समक्ष प्रस्‍तुत किसी भी मामले के संबध में केवल सदस्‍यों के लिए मतदान अधिकार सीमित करना; (ii) किसी भी बैठक में स्‍टॉक एक्‍सचेंज के समक्ष प्रस्‍तुत किसी मामले के संबंध में मतदान अधिकारों का विनियमन ताकि प्रत्‍येक सदस्‍य को स्‍टॉक एक्‍सचेंज की प्रदत्त इक्विटी पूंजी में अपने हिस्‍से के बावजूद केवल एक ही मत का हक प्राप्‍त हो; (iii) स्‍टॉक एक्‍सचेंज की बैठक में भाग लेने तथा मतदान करने के लिए अपने परोक्षी के रूप में किसी अन्‍य व्‍यक्ति को नियुक्‍त करने के सदस्‍य के अधिकार पर प्रतिबंध, इत्‍यादि।

यदि केन्‍द्र सरकार की राय में, कोई आपात स्थिति उत्‍पन्‍न हुई है तथा उस आपात स्थिति उत्‍पन्‍न हुई है तथा उस आपातस्थिति का सामना करने के प्रयोजन से केन्‍द्र सरकार उचित समझती है तो वह सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसा करने के लिए कारण बताते हुए मान्‍यताप्राप्‍त स्‍टॉक एक्‍सचेंज को निदेश दे सकती है कि वह अधिसूचना में यथा विर्दिष्‍ट अवधि के लिए, जो सात दिन से अधिक नहीं होगी, तथा निर्धारित शर्तो के अध्‍यधीन अपने ऐसे व्‍यवसाय को निलम्बित करे तथा यदि केन्‍द्र सकरार की राय में कारोबार के हित में या जनहित में यह आवश्‍यक है कि इस अवधि को बढाया जाए तो वह समान प्रकार की अधिसूचना द्वारा उक्‍त अवधि को समय समय पर बढा सकती है।

प्रतिभूति संविदा (विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2007 का अधिनियमन ''प्रतिभूतियों'' की परिभाषा के अंतर्गत प्रतिभूतिकरण लिखतों को शामिल करने तथा प्रतिभूति लिखतों के निर्गम के लिए प्रकटन आधारित विनियमन तथा उसकी प्रक्रिया की व्‍यवस्‍था करने के उद्देश्‍य में प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 में आगे और संशोधन करने के लिए किया गया है। ऐसा इस बात को ध्‍यान में रख कर किया गया है कि प्रतिभूतिकरण लेनदेनो के अंतर्गत लि‍खतों या प्रमाणपत्रों के लिए प्रतिभूति बाजार में पर्याप्‍त संभाव्‍यता है। इसके अतिरिक्‍त, इन लिखतों के लिए प्रतिभूति बाजार ढांचे का प्रतिबलन स्‍टॉक एक्‍सचेंज में कारोबार को सुकर बनाएगा तथा बदले में गहराई तथा नकदी के अर्थ में बाजार के विकास में सहायक होगा।

2. भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड, 1992

इस अधिनियम का अधिनियमन प्रतिभूतियों में निवेशकों के हितों का संरक्षण करने तथा प्रतिभूति बाजार के विकास का संवर्धन करने तथा उसे विनियमित करने तथा उससे संबधित या आनुषंगिक मामलों के लिए किया गया था। इस प्रयोजनार्थ, सेबी (बोर्ड) विनियमन द्वारा निम्‍न को विनिर्दिष्‍ट करता है:- (i) पूंजी के निर्गम, प्रतिभूतियों के अंतरण संबंधी मामले तथा उससे आनुषंगिक अन्‍य मामले, तथा (b) तरी‍का जिससे ऐसे मामलों का प्रकटन कम्‍पनियों द्वारा किया जाएगा।.

कोई भी स्‍टॉक ब्रोकर, उप ब्रोकर, शेयर अंतरण एजेंट, निर्गम का बैंककार, न्‍यास विलेख का न्‍यासी निर्गम का रजिस्‍ट्रार, मर्चेट बैंककार, हामीदार, पोर्टफोलियो प्रबंधन, निवेश सलाहकार तथा ऐसा अन्‍य मध्‍यवर्ती, जो प्रतिभूति बाजार से संबद्ध हो, प्रतिभूतियों का क्रय, विक्रय या उनमें लेनदेन नही करेगा सिवाएं इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों के अनुसार बोर्ड से प्राप्‍त पंजीकरण प्रमाणपत्र की शर्तो के अंतर्गत तथा उनके अनुसार।

कोई भी डिपाजिटरी, भागीदार, प्रतिभूतियों का संरक्षक, विदेशी संस्‍थागत निवेशक दर निर्धारण अभिकरण, या प्रतिभूति बाजार से संबद्ध कोई अन्‍य मध्‍यवर्ती जिसे बोर्ड अधिसूचना द्वारा इस संबंध में विनिर्दिष्‍ट करे, प्रतिभूतियों का क्रय, विक्रय या उनमें लेनदेन नही करेगा सिवाएं इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों के अनुसार बोर्ड से प्राप्‍त पंजीकरण प्रमाणपत्र की शर्तो के अंतर्गत तथा उनके अनुसार।

इसके अतिरिक्‍त, कोई भी व्‍यक्ति म्‍यूचुअल फंडों सहित किसी उद्यम पूंजीनिधि या सामूहिक निवेश को प्रायोजित नहीं करेगा या कराएगा अथवा उसका संचालन नहीं करेगा या कराएगा जब तक कि उसने विनियमों के अनुसार बोर्ड से पंजीकरण प्रमाणपत्र  प्राप्‍त नहीं कर लिया हो।

पंजीकरण के लिए प्रत्‍येक आवेदनपत्र विनियमों द्वारा यथा निधार्रित तरीके से तथा निर्धारित शुल्‍क के भुगतान पर दिया जाएगा। बोर्ड आदेश द्वारा किसी पंजीकरण प्रमाणपत्र को इस अधिनियम के अंतर्गत यथा निर्धारित तरीके से निलम्बित या निरस्‍त कर सकता है। तथापि, ऐसा कोई आदेश नहीं दिया जाएगा जब तक कि संबंधित व्‍यक्ति को सुनवाई का युक्तिसंगत अवसर न प्रदान किया गया हो।

3. निक्षेपागार अधिनियम, 1996

इस अधिनियम का अधिनियमन प्रतिभूतियों में निक्षेपागारों के विनियमन की व्‍यवस्‍था करने तथा उससे जुडे या उसके आनुषंगिक मामलो के लिए किया गया था। इससे स्क्रिपरहित कारोबार प्रणाली तथा निपटान की शुरूआत की व्‍यवस्‍था की गई है जिसे प्रतिभूति बाजारों के प्रभावी कार्यकरण के लिए आवश्‍यक समझा गया है। अधिनियम के अनुसार, शब्‍दा ''निक्षेपागार'' का अर्थ है ''कम्‍पनी अधिनियम 1956 के अंतर्गत निर्मित तथा पंजीकृत कम्‍पनी तथा जिसे भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड अधिनियम 1992 की धारा 12 की उपधारा (1 क) के तहत पंजीकरण पमाणपत्र प्रदान किया गया है।

कोई भी डिपाजिटरी निक्षेपागार के रूप में कार्य नहीं करेगा जब तक कि उसने बोर्ड (सेबी) से व्‍यवसाय आरम्‍भ करने का प्रमाणपत्र न प्राप्‍त कर लिया हो। बोर्ड ऐसा प्रमाणपत्र तभी देगा यदि वह संतुष्‍ट है कि निक्षेपागार में अभिलेखो तथा लेनदेनों की हेराफेरी को रोकने के लिए पर्याप्‍त प्रणालियां तथा सुरक्षोपाय है। तथापि, प्रमाणपत्र देने से मना नही किया जाएगा जब तक कि संबंधित निक्षेपगार की सुनवाई का युक्तिसंगत अवसर प्रदान न किया गया हो।

निक्षेपागार एक या अधिक भागीदारों के साथ उसके एजेंट के रूप में ऐसे तरीके से कारार करेगा जैसकि उपविधियो द्वारा विनिर्दिष्‍ट किया गया हो। कोई भी व्‍यक्ति किसी भागीदार के माध्‍यम से किसी भी निक्षेपागार के साथ उपनिधियों द्वारा यथा विनिर्दिष्‍ट स्‍वरूप में उसकी सेवाओं का उपभोग करने के लिए करार कर सकता है। ऐसा कोई भी व्‍यक्ति निर्गमकर्ता को विनियमों द्वारा यथा विर्निदिष्‍ट तरीके से प्रतिभूति प्रमाणपत्र अभ्‍यर्पित करेगा जिसके लिए वह निक्षेपागार की सेवाओं का लाभ उठाना चाहता है। प्रतिभूति पमाणपत्र प्राप्‍त होने पर निर्गमकर्ता प्रतिभूति प्रमाणपत्र को निरस्‍त कर देगा तथा इसके अभिलेखों में उस प्रतिभूति के संबंध में पंजीकृत मालिक के रूप में निक्षेपागार का नाम दर्ज कर देगा तथ निक्ष्‍ज्ञेपागार को तदनुसार सूचित करेगा। सूचना प्राप्‍त होने पर निक्षेपागार अपने रिकोर्डो में लाभानुभोगी स्‍वामी के रूप में उल्लिखित व्‍यक्ति का नाम प्रविष्‍ट कर लेगा।

किसी भागीदार के सूचना प्राप्‍त होने पर, प्रत्‍येक निक्षेपागार अंतरिक के नाम में प्रतिभूति का अंतरण पंजीकृत कर लेगा। यदि किसी प्रतिभूति का लाभानुभोगी स्‍वामी या अंतरिती ऐसी प्रतिभूति की अभिरक्षा लेना चाहे तो निक्षेपागार निर्गमकर्ता को तदनुसार सूचित करेगा।

निर्गामकर्ता द्वारा पेशकश की गई प्रतिभूतियों में अभिदान करने वाले प्रत्‍येक व्‍यक्ति को यह विकल्‍प होगा कि वह प्रतिभूति प्रमाणपत्र प्राप्‍त करे अथवा निक्षेपागार में प्रतिभूतियां धारित करे। जहां कोई व्‍यक्ति निक्षेपागार में प्रतिभूति धारित रखने का विकल्‍प चुनता है, वहां निर्गमकर्ता ऐसे निक्षेपागार के प्रतिभूति के आवंटन के ब्‍यौरे सूचित करेगा तथा ऐसी सूचना प्राप्‍त होने पर, निक्षेपागार उस प्रतिभूति के लाभानुभोगी स्‍वामी के रूप में आवंटिती के नाम को अपने रिकोर्डों में प्रविष्‍ट करेगा।

डिपाजिटरी को लाभानुभोगी स्‍वामी की ओर से प्रतिभूति के स्‍वामित्‍व का अंतरण प्रभावी करने के प्रयोजनार्थ पंजीकृत स्‍वामी माना जाएगा तथापि उसे अपने द्वारा धारित प्रतिभूतियों के संबंध में कोई मतदान अधिकारों या अन्‍य कोई अधिकार प्राप्‍त नहीं होंगे।

यदि बोर्ड संतुष्‍ट है कि जनहित में या निवेशकों के हित में ऐसा करना आवश्‍यक है तो वह लिखित में निम्‍न आदेश दे सकता है;  (i) किसी भी निर्गमकर्ता, निक्षेपागार, भागीदार या लाभानुभोगी स्‍वामी को निक्षेपागार में धारित प्रतिभूतियों के संबंध में लिखित में ऐसी सूचना प्रस्‍तुत करने के लिए कहना जो उसे उपेक्षित हो, अथवा  (ii) किसी भी व्‍यक्ति को निर्गमकर्ता, लाभानुभोगी स्‍वामी निक्षेपागार या भागीदार के मामलों के संबंध में जांच निरीक्षण करने के लिए प्राधिकृत करना जो आदेश में यथा विनिर्दिष्‍ट अवधि के भीतर ऐसी जांच या निरीक्षण की रिपोर्ट प्रस्‍तुत करेगा।

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