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दोहरा कराधान राहत :
द्विपक्षीय राहत
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यह ऐसी योजना है जहाँ दो देशों की सरकारें 'दोहरा कराधान अपवंचन करार' निष्‍पादित करती हैं जिसका परिकलन दोहरे कराधान की समस्‍या से राहत प्रदान करने के उद्देश्‍य से पारस्‍परिक रूप से किया जाता है। द्विपक्षीय राहत के लिए ऐसा करार दो विधियों पर आधारित किया जा सकता है :-:-

  • राहत की छूट विधि :- यह ऐसी विधि है जिसमें दोनों देश सहमत होते हैं कि विभिन्‍न विनिर्दिष्‍ट स्रोतों से आय पर, जिस पर दोनों देशों में कर लगाए जाने की संभावना है, उनमें से केवल एक देश में कर लगाया जाएगा अथवा दोनों में से प्रत्‍येक देश आय के केवल एक विशिष्‍ट विनिर्दिष्‍ट भाग पर ही कर लगाएगा ताकि कर की अतिव्‍याप्ति न हो। ऐसा करार दोनों देशों में एक ही आय पर दोहरे कराधान के पूर्ण अपवंचन में परिणामी होता है।


  • राहत की कर क्रेडिट विधि :- यह ऐसी विधि है जिसमें दोनों देश सहमत होते हैं कि यदि आय की किसी मद पर दोनों देशों का कर लगाया जाता है, तो करदाता दोनों देशों में अपनी आय पर कर लगवाने के लिए दायी होगा किन्‍तु उसे उस पर अदा किए गए करों के एक भाग की अपने गृह देश में उसके द्वारा संदेय कर से छूट दी जाती है जो सामान्‍यत: अदा किए गए दोनों करों में से निम्‍नतर होता है।

भारत में आयकर अधिनियम की धारा 90 द्विपक्षीय राहत से संबंधित है। इसके अंतर्गत, भारत की केन्‍द्रीय सरकार ने दूसरे देशों की सरकारों के साथ करार निष्‍पादित किए हैं। इन करारों में, जिन्‍हें "दोहरा कराधान अपवंचन करार (डीटीएए)" कहा जाता है, निम्‍नलिखित के लिए प्रावधान किया गया है :-

  • निम्‍न के संबंध में राहत :- (i) आय जिस पर भारत तथा उस देश, दोनों में आयकर अदा किया गया है; अथवा


  • (ii) पारस्‍परिक आर्थिक संबंधों, व्‍यापार तथा निवेश को प्रोत्‍साहित करने के लिए भारत में तथा उस देश में प्रवृत्त संगत कानून के अंतर्गत प्रभार्य आयकर, अथवा

  • आय की किस्‍म जिस पर दोनों में से किसी देश में कर लगाया जाएगा ताकि इस अधिनियम के अंतर्गत तथा उस देश में प्रवृत्त संगत कानून के अंतर्गत आय के दोहरे कराधान का अपवंचन हो।


इसके अतिरिक्‍त, केन्‍द्र सरकार निम्‍न का प्रावधान करने के लिए करार निष्‍पा‍दित करेगी :-

  • अधिनियम के अंतर्गत या उस देश में प्रव़त्त सदृश (संगत) कानून के अंतर्गत प्रमार्य आयकर के वंचन को रोकने या अपवंचन के लिए, अथवा ऐसे वंचन या अपवंचन के मामलों की छानबीन के लिए सूचना के आदानप्रदान हेतु, अथवा

  • अधिनियम के अंतर्गत अथवा उस देश में प्रवृत्त कानून के अंतर्गत आयकर की वसूली के लिए।

भारत ने संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका, युनाइटेड किंगडम, जापान, फ्रांस, जर्मनी, इत्‍यादि जैसे देशों सहित 65 देशों के साथ डीटीएए निष्‍पादित किए हैं। उन देशों के मामले में जिनके साथ भारत ने दोहरा कराधान अपवंचन करार किए हैं, कर दरों का निर्धारण ऐसे करारों द्वारा किया जाता है। डीटीएए के अंतर्गत करारों की किस्‍मों को प्रमुख रूप से निम्‍न प्रकार श्रेणीकृत किया जा सकता है -

  • व्‍यापक करार :- ये विस्‍तृत दस्‍तावेज़ हैं जिनमें विस्‍तार से यह वर्णन किया गया है कि विभिन्‍न शीर्षों के अंतर्गत आय पर किस प्रकार संव्‍यवहार किया जाना है।
  • सीमित करार :- ये करार वायुयानों, जहाजों, कार्गो वाहकों तथा माल भाड़ा प्रचालन से प्राप्‍त आय से संबंधित दोहरा कराधान के अपवंचन हेतु निष्‍पादित किए जाते हैं।
  • अन्‍य करार :- जिनमें दोहरा कराधान राहत नियम शामिल हैं।

ऐसे दोहरा कराधान अपवंचन करारों के प्रभाव निम्‍न प्रकार हैं :-

  • यदि आयकर अधिनियम, के अंतर्गत कोई कर देयता अधिरोपित नहीं की जाती, तो करार का सहारा लेने का प्रश्‍न ही नहीं उठेगा। जहां अधिनियम द्वारा कोई देयता अधिरोपित नहीं की जाती वहां करार कोई कर देयता अधिरोपित नहीं कर सकता।
  • यदि अधिनियम के अंतर्गत कोई कर देयता अधिरोपित की गई हो वहां इसे समाप्‍त या कम करने के लिए करार का सहारा लिया जा सकता है।
  • इस धारा के अंतर्गत करार के प्रावधानों या अधिनियम के प्रावधानों के बीच किसी अंतर की स्थिति में, करार के प्रावधान अधिनियम के प्रावधानों पर प्रभावी होंगे तथा उन्‍हें अपीलीय प्राधिकारियों द्वारा तथा न्‍यायालय द्वारा प्रवर्तित किया जा सकता है। .
  • जहां इस करार में कोई विशिष्‍ट प्रावधान न किया गया हो, वहां आधारभूत कानून अर्थात आयकर अधिनियम आय के कराधान को शासित करेगा।
  • जहां राज्‍य की सरकार यह प्रमाणित करे कि कोई व्‍यक्ति उस राज्‍य का निवासी है अथवा उसकी उस राज्‍य में स्‍थायी स्‍थापना है, तो वह प्रमाणपत्र दूसरी सरकार पर बाध्‍यकारी होगा।

ऐसी द्विपक्षीय राहत प्रदान करने में शामिल चरण हैं :- (क) भारत में कर अदा करने के लिए दायी व्‍यक्ति की कुल आय का आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार परिकलन करें। आयकर अधिनियम के अंतर्गत प्रत्‍युत्‍पन्‍न कर देयता भारत तथा विदेश के बीच दोहरा कराधान अपवंचन करारों के प्रावधानों के अध्‍यधीन है। (ख) जहां कराधान पर दोहरा कराधान लागू किया गया है, वहां उस दूसरी संविदाकारी कम्‍पनी के साथ निष्‍पादित कर संधि की शर्तों के अनुसार राहत अनुमत करें। इस धारा के अंतर्गत, निर्धारिती को विशिष्‍ट तरीके से क्रेडिट/प्रतिदाय दिया जाता है। यद्यपि उस पर दोनों देशों में कर लगाया जाता है। राहत किसी दूसरे देश में संदेय कर के लिए क्रेडिट के रूप में हो सकती है अथवा निम्‍नतर दर पर कर प्रभारित करने के रूप में हो सकती है।

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