पूंजी खाता लेन देन को ऐसे लेन देन के रूप में परिभाषित किया गया है जो -
- भारत में निवासी व्यक्तियों की आकस्मिक देयताओं सहित देयताओं या परिसम्पत्तियों को रूपांतरित करता है। अन्य शब्दों में इसमें वह लेन देन शामिल है जो भारत के निवासी व्यक्ति द्वारा किए जाते हैं ताकि भारत से बाहर उसकी परिसम्पत्तियां अथवा देयताएं रूपांतरित हो जाएं (परिवर्धित या अपचित)। उदाहरणार्थ :- (i) भारत का निवासी भारत के बाहर अचल सम्पत्ति अर्जित करता है अथवा किसी विदेशी कम्पनी के शेयर प्राप्त करता है। इस प्रकार, उसकी विदेशी परिसम्पत्तियां बढ़ जाती है; (ii) भारत का निवासी व्यक्ति विदेश विदेशी वाणिज्यिक उधारों (ईसीबी) के माध्यम से किसी अनिवासी व्यक्ति से उधार लेता है। इस प्रकार वह भारत से बाहर देयता का सृजन करता है।
- भारत के बाहर निवासी व्यक्तियों की भारत में परिसम्पत्तियों या देयताएं रूपांतरित करता है। अन्य शब्दों में, इनमें वे लेनदेन शामिल हैं जो अनिवासी व्यक्ति द्वारा इस प्रकार किए जाते हैं कि भारत में उसकी परिसम्पत्तियां या देयताएं रूपांतरित हो जाती हैं (परिवर्धित या अपचित)। उदाहरणार्थ, (i) एक अनिवासी व्यक्ति भारत में अचल सम्पत्ति अधिगृहीत करता है अथवा किसी भारतीय कम्पनी के शेयर अर्जित करता है या भारत के किसी निवासी के संयुक्त उद्यम का पूर्णतया स्वामित्वाधीन सहायक कम्पनी में निवेश करता है। इस प्रकार, भारत में उसकी परिसम्पत्तियां बढ़ जाती हैं; अथवा (ii) एक अनिवासी व्यक्ति भारत में घर को प्राप्त करने के लिए भारतीय आवास वित्त संस्थान से उधार लेता है। इस प्रकार वह भारत में देयता का सृजन करता है।
- अधिनियम में कुछ सर्वाधिक आम पूंजी खाता लेन देनों की सूची भी शामिल हैं :-
- भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा विदेशी प्रतिभूति का अंतरण या निर्गम;
- भारत से बाहर निवासी किसी व्यक्ति द्वारा किसी प्रतिभूति का अंतरण या निर्गम;
- भारत से बाहर निवासी किसी व्यक्ति की किसी प्रतिभूति या विदेशी प्रतिभूति का भारत में किसी शाखा, कार्यालय या अभिकरण द्वारा अंतरण या निर्गम;
- किसी भी रूप में या किसी भी नाम से रुपयों को उधार लेना या देना;
- भारत के निवासी किसी व्यक्ति तथा भारत से बाहर निवासी किसी व्यक्ति के बीच किसी भी रूप में या किसी भी नाम से रुपयों को उधार लेना या देना;
- भारत में निवासी व्यक्तियों तथा भारत की बाहर निवासी व्यक्तियों के बीच जमा राशियां;
- मुद्रा या मुद्रा नोटों का निर्यात, आयात या धारण;
- भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा पांच वर्ष से अवधिक की लीज़ को छोड़कर भारत से बाहर अचल सम्पत्ति का अंतरण;
- भारत से बाहर निवासी किसी व्यक्ति द्वारा पांच वर्ष से अनधिक की लीज़ को छोड़ कर भारत में अचल सम्पत्ति का अधिग्रहाण या अंतरण;
- निम्न प्रकार उपगत किसी ऋण, दायित्व या अन्य देयता के संबंध में गारंटी या जमानत देना -
(i) भारत के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा तथा भारत से बाहर किसी व्यक्ति को देय; अथवा
(ii) भारत से बाहर निवासी किसी व्यक्ति द्वारा।
अधिनियम ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को शक्ति प्रदान की है कि कि वह केन्द्र सरकार के परामर्श से अनुज्ञेय पूंजी खाता लेन देन तथा वे सीमाएं विनिर्दिष्ट को जहां तक ऐसे लेन देनों के लिए विदेशी मुद्रा आहरित की जा सकती है। किंतु यह ऋण शोधन के कारण देय भुगतानों के लिए अथवा व्यापार के सामान्य क्रम में प्रत्यक्ष निवेशों के मूल्यह्रास के लिए विदेशी मुद्रा के आहरण पर कोई प्रतिबंध अधिरोपित नहीं करेगा।
तदनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने पूंजी खाता लेन देन को नियंत्रित करने वाली अधिसूचनाएं जारी की है, फेमा अधिसूचना सं. 1/2000 दिनांक 3-5-2000 में अनुमत पूंजी खाता लेन देनों के साथ-साथ प्रतिषिद्ध पूंजी खाता लेन देनों की सूची सन्निहित है।
अनुमत पूंजीखाता लेन देनों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है :-
- भारज में निवासी व्यक्तियों द्वारा पूंजी खाता लेन देनों में निम्न शामिल हैं,
- विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश;
- भारत तथा विदेश में जुटाए गए विदेशी मुद्रा ऋण;
- भारत से बाहर अचल सम्पत्ति का अधिग्रहण तथा अंतरण;
- भारत से बाहर निवासी किसी व्यक्ति के पक्ष में जारी गारंटियां;
- मुद्रा या मुद्रा नोटों का निर्यात, आयात तथा धारण;
- भारत से बाहर निवासी किसी व्यक्ति से ऋण तथा ओवरड्राफ्ट (उधार);
- भारत में तथा भारत से बाहर विदेशी मुद्रा खातों का अनुरक्षण;
- भारत से बाहर किसी बीमा कम्पनी से बीमा पॉलिसी लेना;
- भारत में निवासी किसी व्यक्ति की पूंजीगत आस्तियों का भारत से बाहर प्रेषण;
- भारत तथा विदेश में विदेशी वस्तु व्युत्पादों का तथा विदेशों में वस्तु व्युत्पादों का विक्रय तथा क्रय।
- अनिवासी व्यक्तियों द्वारा पूंजी खाता लेन देनों में निम्न प्रकार हैं,
- भारत में निवेश जैसे (i) भारत में किसी निगमित निकाय या कम्पनी द्वारा प्रतिभूति का निर्गम तथा अनिवासी व्यक्ति द्वारा उसमें निवेश तथा (ii) भारत में किसी फर्म या मालिकाना कम्पनी या व्यक्ति संघ की पूंजी में योगदान द्वारा निवेश;
- भारत में अचल सम्पत्ति का अधिग्रहण तथा अंतरण;
- भारत में निवासी व्यक्ति के पक्ष में या उसकी ओर से गारंटी;
- भारत में/से मुद्रा/मुद्रा नोटों का आयात तथा निर्यात;
- भारत के निवासी व्यक्ति तथा भारत के बाहर निवासी व्यक्ति के बीच जमा राशियां ;
- अनिवासी व्यक्ति के भारत में विदेशी मुद्रा खाते;
- अनिवासी व्यक्ति द्वारा भारत में धारित परिसम्पत्तियों का प्रेषण।
पूंजी खाता लेन देनों पर सामान्यतया दो प्रकार के प्रतिबंध लगाए जाते हैं :-
- सामान्य प्रतिषेध:- कोई भी व्यक्ति किसी पूंजी खाता लेन देन के लिए किसी प्राधिकृत व्यक्ति को या उसमें विदेशी मुद्रा नहीं लेगा या बेचेगा अथवा आहरित नहीं करेगा। यह प्रतिबंध रिजर्व बैंक द्वारा अपने परिपत्रों तथा अधिसूचनाओं में विनिर्दिष्ट शर्तों के अध्यधीन है। उदाहरणार्थ, भारतीय रिजर्व बैंक ने एपी (डीआईआर) परिपत्र जारी किया है जिसमें एक निवासी व्यक्ति अधिसूचना की अनुसूची I में विनिर्दिष्ट किसी पूंजी खाता लेन देन के लिए प्रति कैलेंडर वर्ष 25,000 अमेरिकी डॉलर तक की विदेशी मुद्रा किसी प्राधिकृत वयक्ति से आहरित कर सकता है।
- विशेष प्रतिषेध:- अनिवासी व्यक्ति भारत में किसी भी रूप में किसी भी कम्पनी या भागीदारी फर्म अथवा मालिकाना कम्पनी या निकाय में निवेश नहीं करेगा चाहे वह निगमित हो या न हो, जो निम्न में रत है या रत होने के प्रस्ताव रखती है :- (i) चिट फंड व्यवसाय में, अथवा (ii) निधि कम्पनी के रूप में, अथवा (iii) कृषि या बागान कार्यकलापों में अथवा (iv) स्थावर सम्पदा व्यवसाय में, या फार्म हाउसों की संरचना में अथवा (v) अंतरणीय विकास अधिकारों (टीडीआर) में व्यापार में।
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