जो प्रस्ताव स्वचालित मार्ग के अंतर्गत शामिल नहीं है, उनके लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) का पूर्व समाशोधन अपेक्षित है जिसके लिए एक विशिष्ट आवेदन पत्र उसमें निर्धारित दस्तावेजों सहित भारतीय रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग में विदेश निवेश प्रभाग को किया जाना अपेक्षित है। आवेदन पत्र निम्न में किया जाएगा :-
- प्रपत्र ओडीबी यदि निवेश किसी महत्वपूर्ण गतिविधि में रत विदेशी कम्पनी के शेयर पश्चोक्त को जारी अमेरिकी निक्षेपागार प्राप्तियों (एडीआर)/वैश्विक निक्षेपागार प्राप्तियां (एडीआर) के बदले अधिगृहित करने के लिए अथवा भारत से बाहर किसी कम्पनी के शेयर विदेशी कम्पनी को प्रदत्त व्यावसायिक सेवाओं के लिए उसे देय शुल्क के एवज में अधिग्रहीत करने के लिए है।
- सभी अन्य मामलों में प्रपत्र ओडीआई ।
सामान्य मार्ग के तहत अनुरोधों पर विचार अन्य बातों के अलावा निम्न कारकों को ध्यान में रखकर किया जाता है:-
- भारत से बाहर जेवी/डब्ल्यूओएम की प्रथदृष्टया जीवक्षमता।
- भारतीय पक्ष तथा विदेशी निकाय की वित्तीय स्थिति तथा व्यापार ट्रैक रिकॉर्ड।
- भारत से बाहर जेवी/डब्ल्यूओएस के उसी या संबंधित कार्य में भारतीय पक्ष की विशेषज्ञता तथा अनुभव
- विदेशी व्यापार में योगदान तथा अन्य लाभ जो भारत को ऐसे निवेश के जरिए उपार्जित होंगे।
अब भारत में मालिकाना कंपनियों को भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन से भारत के बाहर निवेश करने की अनुमति हैं किंतु केवल विदेशी कंपनी को प्रदत्त व्यावसायिक सेवाओं के लिए शुल्क के एवज में विदेशी कंपनी के शेयरों के अधिग्रहण के रूप में। यह निम्न शर्तों के अध्यधीन हैं :-
- भारत से बाहर प्रत्येक कंपनी से स्वीकृत शेयरों का मूल्य भारतीय पक्ष द्वारा उस कंपनी से प्राप्य शुल्क के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, अधिक,
- भारत से बाहर किसी एक कंपनी में भारतीय पक्ष की शेयरधारिता भारत से बाहर कंपनी की प्रदत्त पूंजी के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। मालिकाना कंपनियां ऐसे निवेश करने के लिए 1 वर्ष की सामान्य अनुमति मांगते हुए प्रपत्र ओडीबी में रिज़र्व बैंक को आवेदन कर सकती हैं।
निवासी व्यक्ति विदेशी कंपनी को प्रदत्त व्यावसायिक सेवओं के लिए प्रतिफल के रूप में पेशकश किए गए विदेशी कंपनी में शेयरों के अधिग्रहण हेतु अनुमति के
लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) को आवेदन कर सकता है। रिजर्व बैंक यथावश्यक समझे जाने वाले निबंधनों तथा शर्तों के अध्यधीन अनुमति प्रदान करेगा :-
विदेश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने वालो भारतीय पक्ष पर निम्न देयताएं हैं :-
- (क) प्रेषण प्रभावी करने की तिथि से; अथवा (ख) पूंजीकृत की जाने वाली राशि भारतीय पक्ष को देय होन की तिथि से; अथवा (ग) देय राशि को पूंजीकृत करने की अनुमति दी जाने की तिथि से 6 महीने या ऐसी आगामी अवधि के भीतर, जो आरबीआई अनुमत करे, रिजर्व बैंक की संतुष्टि अनुसार विदेशी कंपनी में निवेश के साक्ष्य के रूप में शेयर प्रमाणपत्र या कोई अन्य दस्तावेज प्राप्त करना तथा उन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत करना।
- विदेशी कंपनी से प्राप्य सभी देय राशियों, जिनमें लाभांश, रायल्टी, तकनीकी शुल्क इत्यादि शामिल हैं, को उनके देय होने की तिथि से 60 दिन के भीतर तथा ऐसी आगामी अवधि के भीतर, जो भारतीय रिज़र्व बैंक अनुमत करे, को भारत को प्रत्यावर्तित करना, तथा
- भारतीय पक्ष द्वारा स्थापित या अधिग्रहीत प्रत्येक जेवी/डब्ल्यूओएम से संबंध में प्रपत्र एपीआर में वार्षिक निष्पादन रिपोर्टें या दस्तावेज भारतीय रिजर्व बैंक को प्रस्तुत करना, ऐसा प्रत्येक वर्ष भारत से बाहर जेवी/डब्ल्यूओएम के लेखापरीक्षित लेखों को अंतिम रूप देने के लिए मेजबान देश के संबंधित कानूनों द्वारा यथा निर्धारित सांविधिक अवधि की समाप्ति की तिथि से 60 दिन के भीतर अथवा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा यथा अनुमत आगामी अवधि के भीतर किया जाना है।
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