अधिनियम में पद 'चालू खाता लेन देन' को पूंजीखाता लेन देन में अन्यथा लेन देन के रूप में परिभाषित किया गया है तथा पूर्वोक्त पर सामान्यत: किसी पूर्वाग्रह के बिना ऐसे लेन देन में निम्न शामिल हैं,
- निम्न के संबंध में देय भुगतान
- विदेश व्यापार,
- अन्य चालू व्यापार
- सेवाएं, तथा
- व्यापार के सामान्य क्रम में अल्पावधि बैंकिंग तथा क्रेडिट सुविधाएं;
- निम्न के रूप में देय भुगतान
- ऋणों पर ब्याज तथा
- निवेशों से निवल आय,
- विदेश में रह रहे माता पिता, पत्नी/पति तथा बच्चों के रहन-सहन के व्ययों हेतु प्रेषण, तथा
- निम्न के संबंध में व्यय
- विदेश यात्रा,
- शिक्षा और
- माता पिता, पति/पत्नी तथा बच्चों की चिकित्सा देखभाल।
उक्त परिभाषा में शब्द ''पूर्वोक्त पर सामान्यत: किसी पूर्वाग्रह के बिना ऐसे लेन देन में निम्न शामिल हैं'' का आशय है कि यदि ऊपर सूचीबद्ध लेन देन पूंजी खाता लेनदेनों की परिभाषा में आते भी हैं तब भी ऐसे लेन देनों को चालू खाता लेन देन माना जाएगा। उदाहरणार्थ, भारत का निवासी अल्पावधि क्रेडिट (6 महीने से कम अवधि के लिए) पर भारत के बाहर से वस्तुओं का आयात करता है, तो वह भारत के बाहर देनदारी का सृजन कर रहा है तथा इस प्रकार इसे पूंजी खात लेन देन माना जा सकता है किन्तु उक्त परिभाषा में इसे विशिष्ट रूप से चालू खाता लेन देन के रूप में शामिल किया गया है।
एक सामान्य नियम के रूप में, कोई भी व्यक्ति विदेशी मुद्रा को बेच सकता है या आहरित कर सकता है यदि ऐसी बिक्री अथवा आहरण एक चालू खाता लेन देन है। अधिनियम के अंतर्गत, केन्द्र सरकार जनहित में तथा रिजर्व बैंक के परामर्श से चालू खाता लेनदेनों के लिए ऐसे युक्ति संगत प्रतिबंध लगा सकती है जो निर्धारित किए जाएं। तदनुसार, केन्द्र सरकार ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन (चालू खाता लेन देन) नियमावली, 2000 जारी की है। इसमें चालू खाता लेनदेनों की सूची दी गई है जिनके लिए विदेशी मुद्रा का आहरण :-
- पूर्णतया प्रतिषिद्ध है;
- संबंधित मंत्रालय, केन्द्र सरकार के पूर्वानुमोदन के अध्यधीन अनुमत है;
- भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्वानुमोदन के अध्यधीन अनुमत है;
- ऐसे लेन देन करने के लिए कोई प्रतिबंध या सीमाएं प्रयोज्य नहीं है जो उक्त नियमों के अंतर्गत नहीं आते तथा प्राधिकृत डीलर यह संतुष्टि करने पर विदेशी मुद्रा निर्मुक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं कि लेनेदनों में अधिनियम का याउसके तहत बनाए गए किन्हीं नियमों, विनियमों का उल्लंघन अंतर्ग्रस्त नहीं है तथा उन्हें ऐसे प्रयोजनार्थ अभिकल्पित नहीं किया गया है।
आज के बदलते परिदृश्य में, जहां तक चालू खाता लेनदेनों का संबंध है, भारतीय रुपया पूर्णतया रूपांतरणीय हो गया है। इसका निहितार्थ है कि विदेश यात्रा, विदेशों में शिक्षा तथा विदेशों में चिकित्सा उपचार इत्यादि जैसे विभिन्न प्रयोजनों के लिए चालू खाता लेनदेनों के लिए प्रेषण हेतु निवासियों के लिए विदेशी मुद्रा मुक्त रूप से उपलब्ध है। अनिवासियों को भी भारत में सृजित आय या पूंजी लाभों को भारत से बाहर भेजने की मुक्त अनुमति दी गई है। किन्तु आज भी, पूंजी खाता लेनदेनों के संबंध में भारतीय रुपया पूर्णतया रूपांतरणीय नहीं है। |