भारतीय निर्यात-आयात बैंक (एक्जिम बैंक) अपने आरंभ से ही भारतीय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सहायता में एक अद्वितीय भूमिका निभा रहा है। यह भारतीय फर्मों द्वारा विदेशी निवेशों के वित्तपोषण के लिए एक नोडल अभिकरण के रूप में कार्य करता है। यह भारतीय कार्पोरेटों के लिए नए बाजारों तथा प्रौद्योगिकियों में प्रवेश के लिए नए बाजारों तथा प्रौद्योगिकियों में प्रवेश को सुगम बनाता रहा है तथा इस प्रकार उनकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धात्मकता को वित्तीय सहायता की पेशकश करता है ताकि वे विदेशी बाजारों में अपने उत्पाद प्रविष्ट तथा स्थापित करने में समर्थ हो सकें।
एक्जिम बैंक की स्थापना भारतीय निर्यात आयात बैंक अधिनियम, 1981 के तहत एक पूर्णतया सरकारी स्वामित्वाधीन वित्तीय संस्था के रूप में भारतीय औद्योगिक विकास बैंक आईडीबीआई, के अंतरराष्ट्रीय वित्त प्रभाग को पुन:अवस्थित कर के की गई थी जिसने पहले भारतीय कंपनियों को विदेशी उद्यमों में उनके इक्विटी अंशदान के लिए रुपया सावधि ऋण का एक कार्यक्रम आरंभ किया था। तब से, एक्जिम बैंक विदेशों में भारतीय प्रत्यक्ष निवेश को सहायता देने में निहित है तथा इसने अपने वित्तपोषण कार्यक्रम का और विकास कर लिया है तथा समय समय पर अपने कार्यक्षेत्र को भी विस्तारित किया हैं :-
- यह भारतीय कंपनियों की निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाने के लिए अनेक प्रकार की निधि तथा निधि भिन्न सहायता की पेशकश करता है।
- इसके प्रमुख प्रचालनों में वित्तपोषण परियोजनाएं, उत्पाद तथा सेवा निर्यात, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता निर्माण, संवर्धनात्मक कार्यक्रम तथा निर्यातक कंपनियों की अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों का वित्तपोषण शामिल है।
- यह निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय जोखिमों को मूल्यांकन करने, निर्यात, अवसरों का लाभ उठाने तथा अपनी प्रतिस्पर्द्धात्मकता में सुधार करने में समर्थ बनाने के लिए सूचना, सलाहकार एवं सहायता सेवाएं उपलब्ध कराता है।
- यह भारतीय कंपनियां की प्रौद्योगिकी आपूर्तिकर्ताओं, भागीदार की पहचान करने तथा घरेलू एवं विदेशी संयुक्त उद्यमों को साकार करने में सहायता करता है।
- यह छोटे तथा मध्यम आकार के भारतीय निर्यातों के लिए बाजार चालित निर्यात वित्त पोषण समाधान भी उपलब्ध कराता है।
बैंक ने एक 'विदेशी निवेश वित्तसाधन (ओआईएफ)' कार्यक्रम भी शुरू किया है जिसका उद्देश्य निम्नलिखित वित्तपोषण लिखतों की सहायता से भारतीय संयुक्त उद्यमों (जेवी) तथा पूर्णतया स्वामित्वाधीन सहायक कंपनियों (डब्ल्यूओएस) की वित्तपोषण आवश्यकताओं सहित भारतीय विदेशी निवेश के सम्पूर्ण चक्र को शामिल करना हैं:-
- शेयर पूंजी में निवेश के प्रति ऋण।
- भारतीय प्रवर्तक कंपनी के ऋण के प्रतिऋण।
- विदेशी भारतीय उद्यमों को ऋण।
- भारतीय विदेशी उद्यमों के निधि भिन्न आधारित सुविधाएं
- प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश के लिए वित्तपोषण।
- प्रत्यक्ष वित्तपोषण अर्थात विदेशी उद्यमों को सावधि तथा कार्यशील पूंजी।
- विदेशी व्यापार (व्यवसायों) या कंपनियों के अधिग्रहण के लिए इक्विटी के लिए या ऋण संघटक के लिए वित्तपोषण जिसमें संरचित वित्तपोषण विकल्पों
सहित बाय आउट शामिल है।
अनेक अन्य बैंक विदेशी निवेश के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराते हैं। उदाहरणार्थ, भारतीय रिजर्व बैंक (एसबीआई) । इसका अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग समूह अपने चार प्रभागों के माध्यम से अंतरसीमा वित्तपोषण सुविधाओं की पूर्ण श्रृंखला का परिदाय करता है :- (i) घरेलू प्रभाग; (ii) विदेश कार्यालय प्रभाग; (iii) विदेश विभाग; तथा (iv) अंतरराष्ट्रीय सेवा प्रभाग बैंक का 29 देशों में 66 कार्यालयों/शाखाओं का नेटवर्क है। इसके विदेशी संयुक्त उद्यम तथा अनुषंगी कंपनियां इसके वैश्विक स्वरूप को संवर्धित करते हैं।
इसकी कारोबार वित्त साधन सुविधाओं में निम्न शामिल हैं :-
- रुपया निर्यात क्रेडिट (पूर्व नौवहन तथा पश्च नौवहन)
- पूर्व नौवहन निर्यात क्रेडिट
- पश्च नौवहन निर्यात क्रेडिट
- विदेशी मुद्रा में पूर्व नौवहन क्रेडिट (पीपीएफसी)
- आरंभ करना - पीसीएफसी खोलना
- निर्यात बिल डिस्काउंटिंग
- ऋण पत्र (साखपत्र)
- विदेशी मुद्रा आयात क्रेडि
भारतीय स्टेट बैंक का मर्चेंट बैंकिंग समूह कॉर्पोरेटों के लिए विदेशी मुद्रा के विभिन्न स्वरूपों की निम्न के माध्यम से व्यवस्था करने में विशेषज्ञता प्राप्त हैं :-
- वाणिज्यिक ऋण
- सिंडिकेटिड ऋण
- विदेशी बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं से लाइन्स ऑफ क्रेडिट
- एफसीएनआर ऋण
- निर्यात क्रेडिट अभिकरणों से ऋण
- आयातों का वित्तपोषण
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