| भारतीय कंपनियां पूंजी में अंशदान या किसी विदेशी निकाय के संगम ज्ञापन में अभिदान द्वारा विदेशी निकाय में दीर्घावधिक रुचि दर्शाते हुए भारत के बाहर सीधे निवेश कर सकती हैं। इसमें विदेश में एक संयुक्त उद्यम (जेवी) या पूर्णतया स्वामित्वाधीन अनुषंगी कंपनी (डब्ल्यूओएस) की स्थापना करना शामिल है तथा इसमें पोर्टफोलियो निवेश शामिल नहीं है। विदेश में किसी संयुक्त उद्यम का अर्थ है किसी विदेश में उस देश के कानूनों तथा विनियमों के अनुसार निर्मित, पंजीकृत या निगमित, विदेशी कंपनी तथा जिसमें निवेश किसी भारतीय कंपनी द्वारा किया गया है। जबकि विदेश में एक पूर्णतया स्वामित्वाधीन अभारतीयनुषंगी कंपनी का अर्थ है किसी विदेश में उसे देश के कानूनों तथा विनियमों के अनुसार निर्मित पंजीकृत या निगमित विदेशी कंपनी तथा जिसकी संपूर्ण पूंजी किसी कंपनी के स्वामित्वाधीन है।
भारतीय भागीदारी अधिनियम,1932 (भरतीय पक्षकार) के अंतर्गत पंजीकृत भागीदारी फर्में तथा निवासी कॉर्पोरेट निकाय संयुक्त उद्यमों/पूर्णतया स्वामित्वाधीन अनुषंगी कंपनियों में विदेशों में प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए पात्र हैं। साथ ही, भारत में पंजीकृत या निगमित कोई फर्म या कंपनी या निगमित निकाय के साथ साथ मालिकाना कंपनियों को विदेशी शाखा खोलने की अनुमति है। ऐसे प्रत्यक्ष निवेश के अतिरिक्त, सूचीबद्ध भारतीय कंपनियां ऐसी विदेशी कंपनियों में निवल मूल्य के 25 प्रतिशत तक का निवेश कर सकती हैं, जो मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है जिनके निवेश अथवा उन्हीं कंपनियों द्वारा जारी भारित ऋण प्रतिभूतियों के रूप में उसके वर्ष की पहली जनवरी की स्थिति के अनुसार भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज 10 प्रतिशत शेयर हैं। तथापि, यह 10 प्रतिशत धारित प्रत्यक्ष धारिता होनी चाहिए तथा किसी अनुषंगी कंपनी या विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के माध्यम से नहीं होनी चाहिए।
विदेशों में संयुक्त उद्यमों (जेवी) तथा पूर्णतया स्वामित्वाधीन अनुषंगी कंपनियों (डब्ल्यूओएस) में विदेशी निवेश के लिए भारतीय कंपनियों से प्रस्ताव पर समय समय पर सरकार द्वारा इस संबंध में जारी दिशानिर्देशों के अर्थ में विचार किया जाता है। दिशानिर्देशों के तहत, संयुक्त/पूर्णतया स्वामित्वाधीन अनुषंगी कंपनियां स्थापित करने के लिए अनुमोदन प्रदान किए जाने हेतु सभी आवेदन पत्र भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिए तथा क्रियान्वित किए जाने अपेक्षित हैं। विदेशी संयुक्त उद्यम तथा पूर्णतया स्वामित्वाधीन अनुषंगी कंपनियां स्थापित करने के लिए आवेदन पत्रों के दो वर्ग हैं.
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