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- वर्तमान विवाद के पक्षकार 'माध्यस्थम करार' नाम एक करार निष्पादित कर सकते हैं कि न्यायालय में जाने के बजाए वे विवाद माध्यस्थम को संदर्भित करेंगे। करार के पक्षकार कोई विवाद माध्यस्थम को संदर्भित कर सकते हैं जो :-
- उनके बीच उत्पन्न हुआ है या हो सकता है,
- सुस्पष्ट विधिक संबंध के संबंध में कोई विवाद, चाहे वह विवादात्मक हो या न हो।
इस प्रकार, सिविल स्वरूप के सभी मामले, चाहे वे विद्यमान विवादों से संबंधित हो या भावी विवादों से, संदर्भ के विषय हो सकते हैं, बौद्धिक सम्पत्ति अधिकारों के उल्लंघन जैसे विवाद भी इसमें शामिल होंगे।
- यद्यपि, कोई औपचारिक दस्तावेज निर्धारित नहीं किया गया है, एक माध्यस्थम करार/खंड लिखित में होना चाहिए। यदि माध्यस्थम करार/खंड किसी दस्तावेज में सन्निहित है तो संबंधित पक्षकारों द्वारा उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए। इसके अतिरिक्त, करार निम्न द्वारा किया जा सकता है :- (i) पत्रों, टैलेक्स, तार अथवा दूरसंचार के अन्य माध्यमों के आदान प्रदान से; अथवा (ii) दावों और प्रतिरक्षा के विवरणों के आदान-प्रदान द्वारा जिसमें एक पक्षकार द्वारा करार की बात कही जाए तथा दूसरा पक्ष उसका खंडन न करे।
- माध्यस्थम को संदर्भित न किए जा सकने वाले विवाद निम्नलिखित हैं :-
- दीवालियापन संबंधी कार्यवाही।
- पागलपन संबंधी कार्यवाही।
- किसी नाबालिग के अभिभावक की नियुक्ति हेतु कार्यवाही।
- वसीयत की यथार्थता या अन्यथा का प्रश्न अथवा सम्प्रमाणन के मुद्दे से जुड़ा।
- आपराधिक स्वरूप का मामला।
- सार्वजनिक धर्मार्थ न्यासों से जुड़े मामले।
- गैर कानूनी संविदा से प्रत्युत्पत्र या उन पर आधारित विवाद।
- करार में अनिवार्य रूप से मध्यस्थ की नियुक्ति की अपेक्षा की गई है। मध्यस्थ वह व्यक्ति है जिसकी नियुक्ति उसे संदर्भित किसी मदभेद या विवाद की जांच तथा निपटान के प्रयोजनार्थ विवादकारी पक्षों की पारस्परिक सहमति से या सहमति के बिना की जाती है। मध्यस्थ न्यायाधिकरण का गठन एक या अधिक मध्यस्थों द्वारा किया जाएगा। पक्षकार परस्पर सहमति (करार) द्वारा मध्यस्थ की संख्या नियत करने के लिए स्वतंत्र है। तदनुसार, संदर्भ किसी एक एकल मध्यस्थ को अथवा विषम संख्या (अर्थात 3, 5, 7 इत्यादि) में मध्यस्थों के पैनल को भेजा जा सकता है। यदि कोई सहमति (करार) न हो तो संदर्भ किसी एकमात्र मध्यस्थ को भेजा जा सकता है।
- जब तक पक्षकारों द्वारा अन्यथा सहमति न हो, मध्यस्थ की राष्ट्रीयता कोई भी हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम के मामले में, जहां पक्षकारों की राष्ट्रीयताएं भिन्न होती है, भारत का मुख्य न्यायाधीक्ष पक्षकारों के राष्ट्रीयता से भिन्न राष्ट्रीयता के किसी मध्यस्थ की नियुक्ति करेगा।
- पक्षकार मध्यस्थ या मध्यस्थों की नियुक्ति करने की प्रक्रिया नियत करने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि ऐसी कोई सहमति (करार) की जाती है तो नियुक्ति उसी के अनुसार की जाएगी। सहमति (करार) में मध्यस्थों की संख्या, मध्यस्थ की अर्हकता, नियुक्ति की प्रक्रिया, नियुक्ति को चुनौती देने की प्रक्रिया, नियुक्ति की समाप्ति, मध्यस्थों द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया, माध्यस्थम के स्थान, भाषा इत्यादि से संबंधित प्रावधान किए जाएंगे।
- माध्यस्थम न्यायाधिकरण के कर्त्तव्य, इस प्रकार है :- (i) स्वतंत्र तथा निष्पक्ष ढंग से कार्य करना तथा पक्षकारों के साथ समान व्यवहार करना; (ii) प्रत्येक पक्षकार को अपना मामला प्रस्तुत करने (अपनी बात कहने) का पूर्ण अवसर प्रदान करना।
- पक्षकार माध्यस्थम न्यायाधिकरण, द्वारा अपनी कार्यवाही के दौरान अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया पर सहमत होंगे। ऐसे किसी करार (सहमति) के न होने पर, माध्यस्थम न्यायाधिकरण ऐसे तरीके से कार्यवाही करेगा जो वह समुचित समझे तथा उसे किसी भी साक्ष्य की अनुश्रेयता, संगतता, महत्व तथा भारांश का निर्धारित करने की शक्ति प्राप्त होगी। न्यायाधिकरण यह निर्णय करेगा कि साक्ष्य प्रस्तुत करने तथा मौखिक तर्क के लिए मौखिक सुनवाई की जाए अथवा कार्यवाही का संचालन दस्तावेजों तथा अन्य सामग्री के आधार पर किया जाए।
- माध्यस्थम पंचाट लिखित में किया जाएगा और उस पर माध्यस्थम न्यायाधिकरण के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे। पंचाट में माध्यस्थम की तिथि तथा स्थान तथा उल्लेख होगा। माध्यस्थम पंचाट में उन कारणों का कथन होगा जिस पर वह आधारित है, जब तक कि पक्षकारों में इस बात पर सहमति न हुई हों कि कोई कारण न बताए जाएं अथवा पक्षकारों के बीच समझौते के संबंध में पंचाट के मामले के कोई कारण न बताए जाएं। प्रत्येक पक्षकार को पंचाट की एक हस्ताक्षरित प्रति दी जाएगी।
- पंचाट का निर्णय न्यायालय के निर्णय के समान ही पक्षकारों द्वारा उसकी प्राप्ति की तिथि से सामान्यतया तीन माह के पश्चात प्रवर्तनीय होता है बशर्तें कि पंचाट को आस्थगित करने के लिए कोई आवेदन न किया गया हो अथवा यदि ऐसा आवेदन न किया गया हो अथवा यदि ऐसा आवेदन किया गया है तो उसे अस्वीकृत कर दिया गया हो। माध्यस्थम पंचाट उसके अंतर्गत दावा करने वाले पक्षकारों तथा व्यक्तियों के लिए अंतिम तथा बाध्यकारी होगा।
- माध्यस्थम कार्रवाई समाप्त कर दी जाएगी जब :
- अंतिम माध्यस्थम पंचाट कर दिया गया हो,
- दावेदार ने अपना दावा वापस ले लिया हो तथा प्रतिवादी ने इस पर आपत्ति न की हो,
- पक्षकार कार्रवाई समाप्त करने के लिए सहमत हो,
- कार्रवाई जारी रखना किसी अन्य कारण से अनावश्यक या असंभव हो गया हो।
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