Spacer
 
Spacer
  Business.gov.in Indian Business Portal
An Initiative of India.gov.in
 
 
तीव्र मीनू
 
विदेशों में व्‍यापार करना
spacer
विदेशों में व्‍यापार करना विदेशी निवेश नीति
विदेशों में व्‍यापार करना विदेशी निवेश बीमा
विदेशों में व्‍यापार करना परिपत्र तथा दिशानिर्देश
विदेशों में व्‍यापार करना निवेश मार्ग तथा प्रक्रियाएं
विदेशों में व्‍यापार करना विदेशी निवेश प्रवृत्तियां
विदेशों में व्‍यापार करना कानूनी पहलू
विदेशों में व्‍यापार करना विदेशी निवेश निधियन
विदेशों में व्‍यापार करना विदेशी व्‍यापार अवसर
विदेशों में व्‍यापार करना कराधान
   
 
Doing Business Abroad
Doing Business Abroad

कराधान

विदेश में अपने व्‍यापार को विस्‍तारित करने के इच्‍छुक किसी उद्यमी को गृह देश के साथ साथ उस विशिष्‍ट विदेश के कर कानूनों का अनुपालन करना तथा तदनुसार अपेक्षित करों का भुगतान करना होगा। कर (या शुल्‍क) किसी व्‍यक्ति या किसी संगठन या सम्‍पत्ति पर उसे सरकारी सेवाओं के एवज में लगाए गए वित्तीय प्रभार हैं जो वे सरकार से प्राप्‍त करते हैं। इन करों को मोटे तौर पर प्रत्‍यक्ष तथा अप्रत्‍यक्ष करों के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। प्रत्‍यक्ष कर वे कर हैं जहां कर दाता कर अधिरोधी प्राधिकरण को करों का भुगतान सीधे करता है यथा आयकर तथा कार्पोरेट कर। जबकि अप्रत्‍यक्ष कर ऐसे कर है जो अधिरोपी प्राधिकरण को सीधे अदा नहीं किए जाते बल्कि किसी अन्‍य को अदा किए जाते हैं जो कर दाता तथा कर उदग्रहण प्राधिकरण के बीच मध्‍यवर्ती सम्‍पर्क के रूप में कर एवं शुल्‍क उदग्रहण की शक्ति संविधान के प्रावधानों के अनुसार सरकार के तीन अंगों में वितरित है।

किसी उद्यमी द्वारा अदा किया जाने वाला सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण कर 'सीमाशुल्‍क' है जो भारत में आयातित तथा भारत से बाहर निर्यात की जाने वाली वस्‍तुओं पर लगाया गया एक प्रकार का अप्रत्‍यक्ष कर है। भारत में, सीमाशुल्‍क के उदग्रहण तथा संग्रहण के लिए बुनियादी कानून सीमाशुल्‍क अधिनियम, 1962 है। इसमें आयात तथा निर्यात पर शुल्‍क के उदग्रहण तथा संग्रहण, वस्‍तुओं के आयात तथा निर्यात पर प्रतिबंधों, शक्तियों, अपराधों इत्‍यादि के लिए व्‍यवस्‍था की गई है। केन्‍द्रीय उत्‍पाद एंव सीमाशुल्‍क बोर्ड (सीबीईसी) सीमाशुल्‍क मामलों के लिए शीर्षस्‍थ निकाय है। यह वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन राजस्‍व विभाग का एक अंग है।

किन्‍तु विभिन्‍न देशो में प्रवृत भिन्‍न कर कानूनों तथा नियमों के कारण, एक व्‍यापारी को 'दोहरा कराधान' की समस्‍य का सामना करना पड़ता है। दोहरा कराधान का संदर्भ ऐसी स्थिति से है जहां एक आय एक ही कंपनी या व्‍यक्ति (करदाता के हाथ में एक से अधिक देशों में कर योग्‍य हो जाती है। इसमें करदाता पर अनावश्‍यक तथा निषेधात्‍मक भार पड़ता है। भारत में, आयकर अधिनियम के अंतर्गत देयता विगत वर्ष के दौरान निर्धारिती के रिहायशी दर्जे के आधार पर उत्‍पन्‍न होती है। अत:,यदि निर्धारिती भारत का निवासी है, तो उसे न केवल उस कर पर आय का भुगतान करना होगा जो उसे भारत में प्राप्‍त हुई है बल्कि उस आय पर भी कर का भुगतान करना होगा जो भारत से बाहर उपार्जित, प्रत्‍युत्‍पन्‍न होती है या भारत से बाहर प्राप्‍त होती है। इस प्रकार वह दोहरे कर अदा करने का दायी हो जाती है। भारत मे ऐसे दोहरे कराधान के प्रति राहत की व्‍यवस्‍था द्विपक्षीय राहत तथा एकपक्षीय राहत के माध्‍यम से की गई है।

  Business दोहरा कराधान राहत
  Business सीमाशुल्‍क
     
^ ऊपर
वित्त मंत्रालय
केन्‍द्रीय उत्‍पाद एंव सीमाशुल्‍क बोर्ड (सीबीईसी)
केन्द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी)
आयकर अधिनियम
 
 
 
Government of India
spacer
 
 
Business Business Business
 
  खोजें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
मैं कैसे करूँ
Business कम्‍पनी पंजीकरण करूं
Business नियोक्‍ता के रूप में पंजीकरण करें
Business केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में शिकायत भरें
Business टैन कार्ड के लिए आवेदन करें
Business आयकर विवरणी भरें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
  हमें सुधार करने में सहायता दें
Business.gov.in
हमें बताएं कि आप और क्‍या देखना चाहते हैं।
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
निविदाएं
नवीनतम शासकीय निविदाओं को देखें और पहुंचें...
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
 
पेटेंट के बारे में जानकारी
Business
कॉपीराइट
Business
पेटेंट प्रपत्र
Business
अभिकल्पन हेतु प्रपत्र
 
 
Business Business Business
 
 
 
Spacer
Spacer
Business.gov.in  
 
Spacer
Spacer