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उद्यमी
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उद्यमी उद्यमशीलता
उद्यमी उद्यमशीलता को प्रोत्‍साहन
उद्यमी सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम (एमएसएमई) की स्‍थापना
   
 
उद्यमी
उद्यमी
सरकारी उपाय
देश की औद्योगिक उत्‍पादकता, निर्यात, रोजगार और उद्यमशीलता आधार के सृजन में योगदान के संदर्भ में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की वृद्धि में छोटे और मध्‍यम उद्यमों का महत्‍व पहचानते हुए केन्‍द्र और राज्‍य सरकारें अनेक नीतिगत उपाय करती हैं और प्रोत्‍साहन देने के साथ इन उद्यमों के प्रोत्‍साहन और विकास के लिए योजनाओं तथा कार्यक्रमों का कार्यान्‍वयन करती हैं। इसके लिए उद्यमशीलता विकास और प्रशिक्षण एक प्रमुख कदम है, विशेष रूप से पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए। उद्यमशीलता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) विभिन्‍न अवधियों के लिए अनेक संगठनों द्वारा नियमित आधार पर आयोजित किए जा रहे हैं, जैसे कि राष्‍ट्रीय और राज्‍य स्‍तर पर उद्यमशीलता विकास संस्‍थान (ईडीआई); सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम विकास संस्‍थान (एमएसएमईबीआई) - जिसे पहले लघु उद्योग सेवा संस्‍थान (एसआईएसआई); राष्‍ट्रीय और राज्‍य स्‍तर औद्योगिक विकास निगम, बैंक और अन्‍य प्रशिक्षण संस्‍थान, एजेंसियां, जो नि‍जी क्षेत्र में कार्यरत हैं आदि। ये ईडीपी नए उद्यमियों के सृजन हेतु उनमें उद्यमशीलता की छुपी हुई विशेषताओं के संवर्धन और उन्‍हें सूक्ष्‍म तथा लघु उद्यम स्‍थापित करने के लिए अनिवार्य विभिन्‍न पक्षों पर जानकारी देने पर लक्षित हैं। इसके अलावा विभिन्‍न निजी और सार्वजनिक प्रशिक्षण संस्‍थानों द्वारा कौशल विकास कार्यक्रम (एसडीपी) और उद्यमशीलता एवं कौशल विकास कार्यक्रम (ईएसडीपी) का आयोजन भी किया जा रहा है।

जबकि ईडीपी / एसडीपी / ईएसडीपी प्रशिक्षित उद्यमियों द्वारा उद्यमों की वास्‍तविक स्‍थापना और उन्‍हें सफलतापूर्वक चलाने के संदर्भ में सफलता की दर की व्‍यापक विविधताएं हैं। फिर भी नए उद्यमी आम तौर पर सरकार / वित्तीय संस्‍थानों की उपलब्‍ध योजनाओं के तहत उपलब्‍ध पूरे लाभ पाने में कठिनाई का अनुभव करते हैं, वे विभिन्‍न कानूनों / विनियमों के तहत विभिन्‍न औपचारिकताएं और कानूनी आवश्‍यकताएं पूरी करने और उनका पालन करने, उपयुक्‍त प्रौद्योगिकी के चयन आदि में भी कठिनाई महसूस करते हैं। संभावित उद्यमियों और वास्‍तविकताओं के बीच आने वाले अंतराल को खत्‍म करने के लिए पहली पीढ़ी के संभावित उद्यमियों को सहायता और पोषण देने की आवश्‍यकता है और इसके लिए उन्‍हें अपने उद्यम की स्‍थापना और उसके प्रबंधन के आरंभिक चरणों के दौरान पूरा समर्थन दिया जाना चाहिए। तदनुसार 'राजीव गांधी उद्योग मित्र योजना (आरजीयूएमवाई)' का लोकार्पण प्रथम पीढ़ी के संभावित उद्यमियों को पूरी सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिए किया गया, जिन्‍होंने चुनी हुई प्रमुख एजेंसियों जैसे उद्यमी मित्र के माध्‍यम से, आईटीआई का व्‍यावसायिक प्रशिक्षण या ईडीपी / एसडीपी / ईएसडीबी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह योग्‍यता उद्यमियों को नए उद्यमों की स्‍थापना और उसके प्रबंधन में, विभिन्‍न प्रकियागत और कानूनी बाधाओं से निपटने एवं उद्यम की स्‍थापना और उसे चलाने के लिए आवश्‍यक विभिन्‍न औपचारिकताओं को पूरा करने में सहायता देती है। उद्यमी मित्र के कार्यों की रूपरेखा में विभिन्‍न सरकारी विभागों / एजेंसियों / संगठनों तथा विनियामक एजेंसियों के साथ नेटवर्किंग, समन्‍वय और अनुवर्तन शामिल है जो प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों की विभिन्‍न योजनाओं के तहत लाभों को दिशा प्रदान करने हेतु और उनके उद्यम की स्‍थापना में सहायक हैं।

छोटे और मध्‍यम उद्य‍मों के लिए कुछ अन्‍य सरकार उपाय इस प्रकार हैं :-

  • सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्रालय द्वारा एक सम्मिश्रित समूह या इसके विशिष्‍ट खण्‍डों के रूप में विनिर्माण और सेवाओं (चाहे अत्‍यंत सूक्ष्‍म / लघु स्‍तर के उद्योग, खादी, ग्राम उद्योग या जूट में संलग्‍न हों) सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम क्षेत्र के विभिन्‍न पक्षों और विशेषताओं पर प्राथमिक, द्वितीयक और अन्‍य स्रोतों से नियमित / आवधिक रूप से विश्‍वसनीय और संगत आंकड़े जमा करने के विचार से 'सर्वेक्षण, अध्‍ययन और नीति अनुसंधान की योजना' का कार्यान्‍वयन किया जाता है। इसका लक्ष्‍य अर्थव्‍यवस्‍था के उदारीकरण तथा वैश्‍वीकरण के संदर्भ में तार्किक आंकड़ों के आधार पर या अन्‍यथा सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम क्षेत्र के सामने आने वाली बाधाओं और चुनैतियों एवं उनके लिए उपलब्‍ध अवसरों का अध्‍ययन तथा विश्‍लेषण करना है। यह नीतिगत अनुसंधान और सरकार द्वारा हस्‍तक्षेप के उपायों एवं उपयुक्‍त कार्यनीतियों की संकल्‍पना के सर्वेक्षण और वैश्‍लेषिक अध्‍ययनों के परिणामों का उपयोग स्‍वयं या सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी के रूप में उनके द्वारा स्‍थायी रोजगार उत्‍पादन के विस्‍तार तथा उनकी दक्षता और प्रतिस्‍पर्द्धा में वृद्धि के विचार से चुनौतियों का सामना करने एवं अवसरों का लाभ उठाने की सक्षमता प्रदान करने पर लक्षित है।

  • सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम विकास, अधिनियम 2006 को सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम क्षेत्र की तथा इनके साथ संबंधी या अनुषंगी मामलों प्रतिस्‍पर्द्धा और प्रोत्‍साहन एवं विकास की सुविधा प्रदान करने हेतु लागू किया गया है। इसके लिए इसमें विशिष्टि कोशों की स्‍थापना, विशेष योजनाओं / कार्यक्रमों की अधिसूचना, प्रगतिशील ऋण नीतियां और प्रथाएं, इन उद्यमों के उत्‍पादों और सेवाओं के प्रापण में सरकार की प्राथमिकता, इनकी समस्‍याओं के शमन के लिए और अधिक प्रभावी प्रक्रियाविधियां अपनाना आदि शामिल है। यह उद्यम की संकल्‍पना को मान्‍यता देने के लिए अब तक का पहला कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जिसमें विनिर्माण (किसी उद्योग से संबंधित वस्‍तुओं का निर्माण / उत्‍पादन दोनों शामिल हैं) और सेवा (जो सेवाएं प्रदान करने / देने में संलग्‍न हैं) इकाइयां शामिल हैं। इस अधिनियम के तहत उद्यम के तीन स्‍तर सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम को पहली बार परिभाषित किया गया है। इस अधिनियम में राष्‍ट्रीय स्‍तर पर सभी पणधारियों के वर्गों के संतुलित प्रतिनिधित्‍व सहित राष्‍ट्रीय स्‍तर पर वैधानिक परामर्शी प्रक्रिया प्रदान की गई है जो विशेष रूप से सलाहकारी कार्यों की व्‍यापक परास के साथ इन उद्यमों के लिए उपयोगी है।

  • तकनीकी उन्‍नयन के लिए अवसर प्रदान करने पर लक्षित सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम क्षेत्र में उत्‍पादों का लगातार अनारक्षण निर्यातों और अर्थव्‍यवस्‍थाओं के स्‍तर को क्षेत्र में आधुनिकीकरण के प्रोत्‍साहन एवं प्रतिस्‍पर्द्धा बढ़ाने के विचार से अवसर प्रदान करने पर लक्षित हैं। 13 मार्च 2007 को 125 मदों को अनारक्षित किया गया। 8 फरवरी 2008 को 79 मदों का अनारक्षण किया गया। वर्तमान में सूक्ष्‍म और लघु उद्योग क्षेत्र में विशिष्टि विनिर्माण के लिए आरक्षित मदों की कुल संख्‍या 35 है।

  • विनिर्माण क्षेत्र को सहायता देने के लिए, विशेष रूप से छोटे और मध्‍यम उद्यम क्षेत्र को समर्थन देने के लिए राष्‍ट्रीय वि‍निर्माण प्रतिस्‍पर्द्धा कार्यक्रम की शुरूआत की गई, ताकि उन्‍हें प्रतिस्‍पर्द्धी बनाया जा सके। इसमें 10 घटक और कार्यक्रम हैं जो सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम क्षेत्र के विकास और प्रोत्‍साहन हेतु पहल हैं।

  • उधार लघु और उद्यमों के प्रोत्‍साहन में महत्‍वपूर्ण निवेश है। यह बैंक की प्राथमिक क्षेत्र उधार देने की नीति का एक हिस्‍सा हैं। तदनुसार इन उद्यमों को पर्याप्‍त ऋण देने के लिए अनेक कार्यक्रम और नीतियां बनाए गए हैं। ऐसी ही एक योजना है उधार से संबंधित पूंजी सब्सिडी योजना (सीएलसीएसएस) है, जिसे अत्‍यंत छोटे, आदि, ग्राम और जूट औद्योगिक इकाइयों सहित छोटे, सूक्ष्‍म और मध्‍यम उद्यमों को अप फ्रंट पूंजी सब्सिडी द्वारा प्रौद्योगिकी उन्‍नयन की सुविधा प्रदान की जानी थी और योजना के तहत निर्दिष्‍ट उप क्षेत्रों/ अनुमोदित उत्‍पादों में उत्‍पादन उपकरण (संयंत्र और मशीनरी) और तकनीकों के आधुनिकीकरण के लिए संस्‍थागत ऋण (वित्त) प्रदान करने की सुविधा दी जानी थी।

इसके अलावा राज्‍य और संघ राज्‍य क्षेत्र सरकारें अनेक प्रोत्‍साहनकारी और विकास संबंधी परियोजनाओं / योजनाओं का निष्‍पादन करती हैं तथा अपने अपने राज्‍यों /संघ राज्‍य क्षेत्रों के सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम क्षेत्र विकास और प्रोत्‍साहन हेतु अनेक समर्थनकारी प्रोत्‍साहन प्रदान करती हैं। इन योजनाओं / परियोजनाओं का निष्‍पादन राज्‍य उद्योग निदेशालय, के माध्‍यम से किया जाता है जिनके पास जिला उद्योग केन्‍द्र (डीआईसी) होते हैं और उनके तहत केन्‍द्र / राज्‍य स्‍तर की योजनाओं का कार्यान्‍वयन किया जाता है। पूरे देश में संभावित उद्यमियों को सहायता / परामर्श प्रदान करने विचार से साथ ही मौजूदा इकायों को सहायता देने के लिए राज्‍य की राजधानियों और अन्‍य औद्योगिक शहरों में लगभग 30 एमएसएमई -डीआई और 28 शाखा एमएसएमई - डीआई स्‍थापित किए गए हैं; ये ईडीपी, प्रबंधन विकास कार्यक्रमों, कौशल विकास कार्यक्रमों आदि का आयोजन करते हैं। साथ ही सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम क्षेत्र की आवश्‍यकताओं की देखभाल के लिए राज्‍य औद्योगिक विकास एवं वित्तीय संस्‍थान तथा राज्‍य वित्तीय निगम भी होते हैं।

उद्यमी हेल्पलाइन: 1800 180 6763

^ ऊपर

विकास आयुक्‍त कार्यालय (एमएसएमई), नेटवर्क
एक सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम स्‍तर की इकाई कैसे स्‍थापित करें
उद्यमी पंजीकरण हेतु आवेदन
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उद्यमी मित्र के रूप में नामिकाबद्ध होने के लिए आवेदन पत्र
एसएमएसई निर्यातकों के लिए बाजार विकास सहायता हेतु योजना
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