अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र के समग्र विकास के लिए पर्याप्त मूल संरचनात्मक सुविधाएं अनिवार्य हैं। उदारीकरण और वैश्वीकरण को देखते हुए लघु और मध्यम उद्यमों की उचित वृद्धि हेतु इसकी उपस्थिति और महत्व को कम नहीं किया जा सकता। केन्द्र और राज्य सरकारें देश के विभिन्न राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों / जिलो में इनकी मूल संरचनात्मक सुविधाओं के उन्नयन के निरंतर प्रयास करती हैं। इन सब के बावजूद लघु और मध्यम उद्यमों के उद्यमी मूल संरचनात्मक कठिनाइयों की समस्या का सामना निरंतर करते हैं, जो उनके दैनिक व्यापार प्रचालनों और भावी वृद्धि की संभावनाओं को प्रतिबंधित करते हैं।
रेलवे, जल मार्ग और सड़क मार्ग तथा वायु मार्ग जैसी परिवहन सुविधाओं के सभी प्रकारों को शामिल करने के लिए उद्यमियों द्वारा आवश्यक मूल संरचना में (इन उद्यमियों द्वारा चलाई जा रही छोटी तथा मध्यम दर्जे की फर्मों के प्रकार पर निर्भर करते हुए) व्यापार की उपयुक्तता के अनुसार और साथ ही दूर संचार के उचित रूप से स्थापित चैनल एवं बिजली की पर्याप्त आपूर्ति शामिल है। इनमें से किसी भी सुविधा की कमी फर्म की मूल्य श्रृंखला प्रक्रिया में गंभीर क्षति पहुंचा सकती है, अर्थात उत्पादन, खपत और वितरण जो इन छोटे तथा मध्यम उद्यमियों के उत्पाद हैं और इनके सामने पहले ही धनराशि की कमी, अपर्याप्त विपणन सुविधाओं, तकनीकी पुरानेपन आदि की समस्याएं हैं।
मूल संरचना के संदर्भ में छोटे स्तर के उद्यमियों के सामने आने वाली कुछ समस्याएं इस प्रकार हैं :-
- अपर्याप्त मूल संरचनात्मक सुविधाओं से मूल भूत कच्ची सामग्रियों की गंभीर कमी की समस्या विशेष रूप से जहां कमी है और इसे है दूर दराज के स्थानों से आयात किया जाना है, होती है, जो छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों के लिए जरूरी है।
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लघु और मध्यम उद्यमियों के लिए अपने उत्पादों को उन बाजारों में विरित करना कठिन होता है जो दूर के स्थानों पर हैं, क्योंकि उनके पास अपर्याप्त निर्माण है या मूल भूत सड़कों / राजमार्गों की मौजूदगी नहीं है।
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उचित वायु मार्गों और जल मार्गों की सुविधाओं की कमी से भी इन मध्यम / छोटे स्तर की फर्मों की वृद्धि संभावनाएं समिति होती है, जिनके लक्ष्य बाजार विदेश में स्थित हैं।
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लघु और मध्यम उद्यमों के सामने बिजली की कमी का संकट होता है, जिसके कारण वे अपने संयंत्र की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर सकते हैं। उनमें से अधिकांश के लिए अपने विद्युत उत्पादन संयंत्र संस्थापित करना कठिन होता है ताकि वे अबाधित प्रचालन सुनिश्चित कर सके, और इसका कारण होता है अपेक्षित धनराशि की कमी।
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इनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों या देश के दूरदराज के इलाकों में होते हैं, जिसके कारण वे क्षेत्र से बाहर के लोगों के साथ संपर्क करने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसका कारण है उचित दूर संचार नेटवर्क का अनुपस्थित होना।
अत: छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों को अपर्याप्त परिवहन सुविधाओं, मजबूत विद्युत आपूर्ति की कमी / पहुंच न होने, उचित संचार चैनलों की कमी, अपर्याप्त विपणन सुविधाओं, धनराशि की कमी आदि के कारण मूल संरचनात्मक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन सभी बातों से इन उद्यमियों की लाभ कमाने की क्षमता पर दीर्घ अवधि में प्रभाव पड़ता है और साथ ही इनके द्वारा चलाए जाने वाले उद्यमों की उत्तर जीविता के अवसर भी कम होते हैं।
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