छोटे स्तर की फर्मों का प्रबंधन आम तौर पर स्वामियों द्वारा किया जाता है, जो अधिकाशंत: उद्यम के दक्ष प्रबंधन हेतु आवश्यक कौशल नहीं रखते। कार्य का उचित विभाजन नहीं होता और विशेषज्ञता के लाभ्ज्ञ उपलब्ध नहीं होते हैं। कुछ स्वामी - प्रबंधक संगठन और प्रबंधन की आधुनिक विधियां अपनाने के इच्छुक नहीं होते हैं। स्वामी प्रबंधक की बीमारी या मृत्यु के कारण व्यापार में आने वाला अस्थायित्व छोटी फर्मों की उत्तरजीविता और वृद्धि पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है।
सरकार द्वारा की गई पहलों में शामिल हैं :
प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उनकी प्रबंधकीय निर्णय क्षमताओं के उन्नयन द्वारा मौजूदा उद्यमियों की उत्पादकता / लाभ प्रदता में सुधार लाना और उन्हें औद्योगिक प्रबंधन, विपणन प्रबंधन, वितत्तीय प्रबंधन, माल सूची नियंत्रण, मानव संसाधन विकास, सूचना प्रौद्योगिकी और ई - वाणिज्य आदि के क्षेत्र में नवीनतम विकास की एक अंतर्दृष्टि प्रदान करना है। साथ ही इसका लक्ष्य उन्हें औद्योगिक प्रबंधन के क्षेत्र में उभरती हुई प्रथाओं के बारे में जागरूक बनाना है।
राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (एनआई - एमएसएमई) में छोटे और मध्यम उद्यम क्षेत्र के प्रवर्तन, विकास और औद्योगिकी करण के लिए एक अग्रणी संस्थान बनने का विशाल कार्य लिया है। यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, (एमएसएमई) की एक स्वायत्त भुजा है और यह संस्थान प्रशिक्षण, परामर्श, अनुसंधान और शिक्षा से लेकर विस्तार तथा सूचना सेवाओं तक प्रचालनों के भण्डार के माध्यम से उपरोक्त उद्देश्य प्राप्त करने का प्रयास करता है।
राष्ट्रीय उद्यमशीलता और लघु व्यापार विकास संस्थान (एनआईईएसबीयूडी) नोएडा
उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्थापित उद्यमशीलता विकास में संलग्न विभिन्न संस्थानों / अभिकरणों की गतिविधियों के समन्वय, प्रशिक्षण और पर्यवेक्षण के लिए स्थापित एक शीर्ष निकाय है, विशेष रूप से यह लघु उद्योग और लघु व्यापार के क्षेत्र में कार्य करता है। भारतीय उद्यमशीलता संस्थान (आईआईई), गुवाहाटी का लक्ष्य व्यावसायिक गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रमों, अनुसंधान और सूचना सेवाओं को उद्यमशीलता के क्षेत्र में प्रेरित करना, उद्यमशीलता विकास और उद्यम प्रबंधन का प्रमुख प्रदाता बनना है। इस संस्थान की गतिविधियों में प्रशिक्षण आवश्यकताओं, संकल्पना और कार्यक्रमों का आयोजन पदाधिकारियों तथा उद्यमियों, दोनों के लिए करना; विभिन्न लक्ष्य समूहों और अवस्थलों के लिए प्रभावी प्रशिक्षण कार्यनीतियां एवं विधियां विकसित करना; विभिन्न अभिकरणों और उद्यमियों द्वारा मेलजोल और विचारों के आदान प्रदान का मंच उपलब्ध कराने के लिए गोष्ठियों, कार्यशालाओं और सम्मेलनों की व्यवस्था करना; उद्यमशीलता विकास पर अनुसंधान करने के लिए, नीति निर्धारण और स्व रोजगार तथा उद्यमशीलता के कार्यान्वयन हेतु आवश्यक सूचना के प्रलेखन और प्रसार करना शामिल है।
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