छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों के सामने आने वाली समस्याओं में से पर्याप्त विपणन और निर्यात सुविधाओं की अनुपस्थिति उनकी प्रमुख चिंताओं में से एक है। लगभग सभी प्रकार के व्यापार उद्यमियों के सामने विपणन की समस्या आती है, परन्तु छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों को अपने उत्पादों के विपणन और वितरण में बहुत अधिक कठिनाई का सामने करना पड़ता है। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
- छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमी बड़े स्तर की फर्मों के उद्यमियों की बिक्री तथा विपणन कार्यनीतियों एवं उत्पादों के साथ कड़ी प्रतिस्पर्द्धा का सामना करते हैं। वे कभी कभार लागत, गुणवत्ता, मानक, लोकप्रियता, हमेशा बदलती मांगों / उपभोक्ताओं की रुचियों को पूरा करने आदि में अत्यंत कठिनाई का सामना करते हैं।
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इसमें से अधिकांश के पास अपना विपणन नेटवर्क नहीं होता है। अत: वे अंत में अपने उत्पादों के वितरण के लिए बाहरी स्रोतों पर निभर्र करते हैं। इससे उनके उत्पादों और सेवाओं की लागत भी बढ़ती है।
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इनमें से अधिकांश के पास विभिन्न विपणन कार्य नीतियों और संकल्पनाओं का अच्छा ज्ञान और / या अनुभव नहीं होता है। इसेक परिणाम स्वरूप वे बाजार के प्रचलित और लगातार बदलते रूझानों को शीघ्रता पूर्वक और बारीकी से समझने में अक्षम होते हैं। पुन: उनके उत्पादों की विशाल विपणन संभाव्यता होने के बावजूद वे दक्ष विपणन तकनीकों को अपनाने के अनिच्छुक होते हैं।
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वे हमेशा प्रभावी बिक्री प्रोत्साहन के लिए संसाधनों और धनराशि की कमी से परेशान रहते हैं। अनेक उद्यमी विज्ञापन, बिक्री प्रवर्तन, बाजार अनुसंधान आदि पर बहुत अधिक खर्च नहीं उठा सकते हैं।
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उन्हें उत्पादन की ऊंची लागत तथा उत्पादों की निम्नस्तरीय गुणवत्ता के कारण आकर्षक मूल्यों पर अपने उत्पादों की बिक्री में कठिनाई आती है।
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उन्हें मोल तोल की क्षमता न होने के कारण (विशेष रूप से बड़े क्रेताओं के साथ बात चीत में) और धनराशि की तत्काल आवश्यकता होने से बेहद कम मूल्यों पर अपने उत्पाद बेचने भी पड़ जाते हैं।
इस प्रकार यह कहना सही है कि अधिकांश छोटे और मध्यम उद्यमों को सहित तरीके से पता नहीं है कि बाजार में किस प्रकार के उत्पादों की आवश्यकता है, बाजार कितना बड़ा / छोटा है, कब उत्पादों की जरूरत है और इन उत्पादों को कैसे उपलब्ध कराना है। ये सभी समस्याएं इन्हें बाजार के रूझानों और परिस्थितियों से अलग रखती हैं और वे अपने प्रचालनों को प्रतिबंधित रखते हैं।
इसके अलावा छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमी भारत के निर्यात के क्षेत्र में सबसे अधिक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं। आभूषण, तैयार परिधान, चमड़े के सामान, हाथ के औजार, अभियांत्रिकी के सामान, सॉफ्टवेयर आदि सहित पारम्परिक और अपारम्परिक वस्तुओं के इस क्षेत्र से निर्यात में प्रभावशाली वृद्धि हुई है। साथ ही अच्छे निर्यात निष्पादन वाले उद्यमियों के पास अर्थव्यवस्था में अधिक स्थायित्व होता है। परन्तु अन्य क्षेत्रों / देशों / हिस्सों में छोटे और मध्यम उद्यमियों द्वारा उत्पादों के निर्यात में अब भी बहुत सारी समस्याएं हैं। उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल सभी चरणों से परिचित रहने की आवश्यकता है, जैसे कि निर्यातकों का पंजीकरण, निर्यात बाजार और क्रेताओं का चयन, पूछताछ, आशय पत्र, ऋण पत्र, उधार देने का पत्र आदि; बीमा कवरेज, नौवहन क्रयादेश प्राप्त करना, उद्भव का प्रमाणपत्र, आयातकों को दस्तावेज भेजना आदि।
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