सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमियों के सामने उनके प्रचालन के हर चरण पर समस्याएं आती हैं, चाहे यह कच्ची सामग्री की खरीद हो, उत्पादों का विनिर्माण, वस्तुओं का विपणन या निधिकरण की उगाही। अत: ये उद्योग पैमाने की बाहरी और अंदरुनी अर्थव्यवस्था को पाने की स्थिति में नहीं होते हैं।
इस क्षेत्र के सामने आने वाली प्रमुख समस्याएं इस प्रकार हैं :
- प्रौद्योगिकी का पुराना हो जाना
- प्रबंधकीय अपर्याप्तताएं
- विलंबित भुगतान
- खराब गुणवत्ता
- बीमारी की घटना
- उपयुक्त मूल संरचना की कमी
- विपणन नेटवर्क की कमी
प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मचारियों की कमी है, क्योंकि छोटी फर्मे अधिक वेतन नहीं दे सकती हैं और वे अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर बहुत अधिक व्यय नहीं कर सकती है। छोटे स्तर की फर्मों के लिए कुशल प्रबंधकीय और तकनीकी कार्मिकों की भर्ती और प्रेरण मुश्किल होता है क्योंकि वे बड़े स्तर के उद्योगों में बेहतर अवसर तलाशते हैं। अत: उन्हें दूसरे दर्ज की प्रतिभा मिलती है या उन्हें परिवार के सदस्यों पर निर्भर करना पड़ता है, जिनके पास विविध कौशल नहीं होते हैं।
छोटे स्तर की इकाइयों में उनके उत्पादों के विपणन और वितरण में अनेक कठिनाइयां आती हैं। इनमें से अधिकांश के पास अपना विपणन नेटवर्क नहीं होता है। उनके लिए अपने उत्पाद एक अच्छी कीमत पर बेचना कठिन होता है क्योंकि उत्पादन की लागत अधिक होती है और उत्पादों की गुणवत्ता गैर मानकीकृत होती है। वे विज्ञापन, बिक्री, प्रवर्तन, विपणन अनुसंधन आदि पर बहुत अधिक व्यय नहीं कर सकते हैं। उन्हें अपने उत्पाद कमजोर मोल तोल की शक्ति और धन राशि की तत्काल आवश्यकता के कारण कम कीमतों पर बेचने पड़ते है। बड़ी फर्मों के साथ भी उनकी कड़ी प्रतिस्पर्द्धा होती है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र की क्रमिक वृद्धि में बाधा डालने वाले समान प्रकार के अन्य मुद्दे इस प्रकार हैं :
उद्यमी हेल्पलाइन: 1800 180 6763
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