गुणवत्ता पूर्ण कच्ची सामग्री की अनुपलब्धता सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के उद्यमों के सामने आने वाली प्रमुख समस्याओं में से एक है जो उन्हें सही समय पर पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलती है। छोटे स्तर की इकाइयों में आवश्यक मूलभूत कच्ची साम्रगी की भी गंभीर कमी होती है। ये इकाइयां उचित मूल्य पर अपेक्षित गुणवत्ता की कच्ची सामग्री प्राप्त करने में असहाय होती हैं। उन्हें थोक खरीद का लाभ नहीं मिलता है। उदाहरण के लिए हथकरघा उद्योग के सामने यार्न की कमी होती है। छोटे स्तर के उद्योगों के सामने बिजली की कमी भी होती है, जिस वजह से वे संयंत्र की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर सकते। इनमें से अधिकांश बाधारहित प्रचालन सुनिश्चित करने के लिए अपने स्वयं के विद्युत उत्पादन संयंत्र स्थापित करने का भार नहीं उठा सकते हैं।
राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) और राज्य लघु स्तर उद्योग विकास निगम सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र को कुछ कच्ची सामग्री प्रदान करने के प्रयासों में संलग्न है।
एनएसआईसी का लक्ष्य कच्ची सामग्री (स्वदेशी और आयातित दोनों) की खरीद के निधिकरण द्वारा सहायता प्रदान करना है और इस प्रकार यह उन्हें गुणवत्ता पूर्ण उत्पादों के विनिर्माण पर केंद्रित करता है। यह घरेलू बाजार या आयात द्वारा कम उपलब्ध कच्ची सामग्री की सुविधा उपलब्ध कराता है।
राज्य उद्योग निदेशालय छोटी इकाइयों को कम उपलब्ध होने वाली कच्ची सामग्री का वितरण करता है। उन्हें छोटे स्तर के उद्योगों को कच्ची सामग्री के वितरण हेतु डिपो की स्थापना करनी होती है। केन्द्र सरकार में इस क्षेत्र में कम उपलब्ध होने वाली कच्ची सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक बफर भण्डार योजना आरंभ की है।
एनएसआईसी की
कच्ची सामग्री सहायता योजना का लक्ष्य कच्ची सामग्री (स्वदेशी और आयतित दोनों) की खरीद के निधिकरण द्वारा छोटे स्तर के उद्योगों की सहायता करना है। इससे छोटे स्तर के उद्योगों को गुणवत्तापूर्व उत्पादों के निर्माण पर बेहतर फोकस करने का अवसर मिलता है। योजना के लाभ :
- कच्ची सामग्री के प्रापण हेतु 90 दिनों तक वित्तीय सहायता।
- छोटे स्तर के उद्योगों को क्रय की किफायत का लाभ देने में सहायता जैसे थोक खरीद, नकद रियायत आदि।
- एनएसआईसी द्वारा आयात के मामले में प्रक्रियाविधि, प्रलेखन, ऋण पत्र जारी करने की देखभाल की जाती है।
उद्यमियों को केवल निर्धारित आवेदनपत्र पर कच्ची सामग्री की सहायता के लिए आवेदन करना होता है। आवेदन संबंधित क्षेत्रीय और शाखा कार्यालयों में भरे और जमा किए जा सकते हैं।
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