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सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमियों के सामने आने वाली समस्याओं को सुलझाने के अनेक उपाय किए हैं और उन्हें देश की अर्थव्यवस्था में एक प्रभावी भूमिका निभाने में सक्षम बनाया है। इन उपायों को मोटे तौर पर इन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
- सुरक्षात्मक उपाय, जिन्हें लघु स्तर के उद्योगों को बड़ी फर्मों के साथ प्रतिस्पर्द्धा से सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है।
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प्रवर्तन संबंधी उपाय, जिन्हें देश में छोटे स्तर के क्षेत्र की वृद्धि को प्रोत्साहन देने के लिए किया गया है।
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संस्थागत उपाय, जिन्हें अनेक संस्थानों की स्थापना के रूप में सरकार द्वारा किया गया है या एजेंसियों द्वारा लघु स्तर के उद्योगों को उदारतापूर्ण और कई गुना अधिक सहायता प्रदान करने के लिए किया जाता है।
हाल ही में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र को नया जीवन देने के लिए सरकार ने कुछ प्रमुख पहलें की है। इनमें शामिल है :
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम 2006 का कार्यान्वयन।
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फरवरी 2007 में ''सूक्ष्म और मध्यम उद्यमों के लिए प्रवर्तन हेतु एक पैकेज'' की घोषणा की गई। इसमें ऋण, राजकोषीय सहायता, समूह आधारित विकास, मूल संरचना, प्रौद्योगिकी और विपणन के मुद्दों को संबोधित करने वाले उपाय शामिल हैं।
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ऋण गारंटी योजना को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए निम्नलिखित संशोधन किए गए हैं : (क) पात्रता ऋण सीमा को 25 लाख रु. से 50 लाख रु. तक बढ़ाना ; (ख) गारंटी की सीमा को 75 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक बढ़ाकर (1) सूक्ष्म उद्यमों को 5 लाख रु. तक का ऋण, (2) महिलाओं द्वारा प्रचालित या स्वामित्व वाले मध्यम और लघु उद्यमों को और (3) पूर्वोत्तर क्षेत्र में सभी ऋण; और (ग) पूर्वात्तर क्षेत्र में सभी ऋणों के लिए एक बार प्रदान किए जाने वाले गारंटी शुल्क को 1.5 प्रतिशत से घटा कर 0.75 प्रतिशत करना।
- सूक्ष्म और लघु उद्यमों द्वारा विशिष्ट रूप से निर्माण हेतु आरक्षित मदों की सूची से उत्पादों को चरणबद्ध रूप से हटाना जारी रखा जा रहा है। 13 मार्च, 2007 को 125 मद अनारक्षित किए गए, जिससे सूक्ष्म और लघु उद्यम में विशिष्ट रूप से विनिर्माण के लिए आरक्षित मदों की सूची घट कर 114 हो गई। पुन: 79 मदों को 5 फरवरी, 2008 को, 14 को अक्टूबर 2008 और जुलाई 2010 में अनारक्षित किया गया था। आरक्षित वस्तुओं की वर्तमान सूची देखने के लिए यहां क्लिक करें।
सामान्य रूप से प्रस्तुत कुछ अन्य सुझाव इस प्रकार हैं:
- सरकार द्वारा लघु स्तर के क्षेत्र हेतु प्रशिक्षित और व्यावसायिक प्रबंधकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाए।
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उत्पादन में विस्तार द्वारा अर्थव्यवस्था का स्तर प्राप्त करने हेतु सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सुग्राही बनाने हेतु नीतिगत पहलों पर विचार करना अनिवार्य होगा।
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संसाधनों की उगाही के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सुविधा प्रदान करना, यह अनिवार्य है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए विशिष्ट रूप से एक पृथक कारोबार कार्यालय स्थापित किया जाए।
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उद्यम पूंजी और निजी इक्विटी कोष के बड़े प्रवाह को क्षेत्र में प्रोत्साहन देने के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रदान करना।
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जब सूक्ष्म और छोटे पैमाने की इकाइयां बड़ी इकाइयों में परिवर्तित हों तब राजकोषीय लाभों की क्षति की समस्या से निपटने के लिए उपायों की संकल्पना करने की तत्काल आवश्यकता है।
उद्यमी हेल्पलाइन: 1800 180 6763
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