अधिकांश छोटे स्तर की इकाइयों में उत्पादन की पुरानी तकनीकें तथा पुरानी हो चुकी मशीनरी और उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। प्रौद्योगिकी का उन्नयन तथा अर्थव्यवस्था का स्तर प्राप्त करना क्षेत्र के सामने आने वाली प्रमुख समस्याओं में से एक है। वे नई मशीनें और उपकरण वहन नहीं कर सकते और इसलिए वे उत्पादन की आधुनिकतम तकनीकों का इस्तेमाल करने की स्थिति में नहीं होते। वे निरंतर आधार पर अनुसंधान और विकास आयोजित करना संभव नहीं पाते। अत: आम तौर पर छोटे स्तर की इकाइयों में उत्पादकता और गुणवत्ता कम रहती है जबकि उत्पादन की इकाई लागत अधिक होती है।
अर्थव्यवस्था के उदारीकरण से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के सामने आयात के कारण तगड़ी प्रतिस्पर्द्धा है और सस्ती दरों पर बेहतर गुणवत्तापूर्व उत्पादों का उत्पादन करने के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन की आवश्यकता है।
जहां तक प्रौद्योगिकी के सोर्सिंग का प्रश्न है, छोटे व्यापारों के सामने निम्नलिखित तीन अनिवार्य समस्याएं आती हैं :-
- प्रौद्योगिकी के बारे में सूचना प्राप्त करना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। इनमें से अधिकांश के पास केवल किसी से कही गई बात या किसी उन्नत इकाई में जाने पर उपलब्ध होती है। कुछ लोगों की पहुंच तकनीकी साहित्य, व्यावसायिक पत्रिका या नए उत्पाद के आरंभ के बारे में हो पाती है। परन्तु इंटरनेट के अविष्कार से इलेक्ट्रॉनिक पत्रिकाओं, केटलॉग डाउनलोड और उन्नत खोज सुविधाओं के माध्यम से नए आयाम खुल रहे हैं।
- प्रौद्योगिकी का वास्तविक प्रापण अगला महत्वपूर्ण मुद्दा है, क्योंकि यदि सूचना प्राप्त हो भी जाती है तो प्रौद्योगिकी के आयात में और प्रौद्योगिकी अंतरण, विक्रेता की क्षमता, बिक्री पश्चात सहायता, आयात प्रक्रिया विधियां आदि से संबंधित अन्य समस्याएं बाधक होती है, जो प्रापण में रूकावट लाती हैं।
- प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए धनराशि प्राप्त करना भी एक समस्या है। छोटे उद्यमों को आम तौर पर प्रौद्योगिकी उन्नयन के निधिकरण हेतु बाहरी स्रोतों की ओर देखना होता है, क्योंकि व्यापार से धन निकालना अपने आप में लागत उत्पन्न करता है।
देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र की वृद्धि को पोषण देने के विचार से सरकार ने अनेक पहले की हैं :
आईएसओ 9000/14001 प्रमाणन शुल्क प्रतिपूर्ति योजना को प्रौद्योगिकी उन्नयन, गुणवत्ता में सुधार और बेहतर पर्यावरण प्रबंधन को प्रोत्साहन देने के लिए लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र द्वारा आरंभ किया गया था। इस योजना में उन छोटे स्तर के / सहायक उपक्रमों को प्रोत्साहन दिया जाता है जिन्होंने आईएसओ 9000/ आईएसओ 14001/ एसएसीसीपी प्रमाणन प्राप्त किया है।
धनराशि की लागत को कम करने के लिए छोटे स्तर के उद्योगों में प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए ऋण से संबंधित पूंजी सब्सिडी योजना (सीएलसीएसएस) कार्यरत है। यह अत्यंत छोटी, खादी, ग्राम और जूट औद्योगिक इकाइयों सहित छोटे स्तर के उद्योगों को संस्थागत वित्त (ऋण) की अप फ्रंट पूंजी सब्सिडी प्रदान करते हुए प्रौद्योगिकी उन्नयन की सुविधा पर लक्षित है, जो उनके द्वारा अपने उत्पादन उपकरणों (संयंत्र और मशीनरी) तथा तकनीकों के आधुनिकीकरण में उपयोग की जा सकती है।
राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्द्धी कार्यक्रम (एनएमसीपी) को सरकार द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र की प्रतिस्पर्द्धा में सहायता देने के लिए आरंभ किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत योजनाएं सार्वजनिक - निजी भागीदारी के रूप में मुख्य रूप से क्षेत्र की प्रौद्योगिकी / गुणवत्ता उन्नयन आवश्यताओं को संबोधित करने पर लक्षित हैं।
भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने यूनाइटेट नेशन्स - एशियन पेसीफिक सेंटर फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (यूएन-एपीसीटीटी) के सहयोग से लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए प्रौद्योगिकी और निधिकरण के बीच सहक्रिया लाने के उद्देश्य से लघु उद्योग प्रौद्योगिकी ब्यूरो (टीबीएसई) की स्थापना की। कंपनी के उद्देश्य इस प्रकार हैं :
- लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र की बाजार प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ाने और स्थायी विकास को प्रोत्साहन देने के लिए प्रौद्योगिकी अंतरण हेतु व्यावसायिक सेवाएं प्रदान करना।
- विभिन्न देशों से उपलब्ध प्रौद्योगिकी विकल्पों पर डेटाबेस का अनुरक्षण और प्रदान करना।
- प्रौद्योगिकी के स्रोतों और उन तक पहुंच के माध्यमों पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र सूचना प्रदान करना।
- प्रौद्योगिकी आपूर्तिकारों और सहयोगियों को प्रौद्योगिकी पर पृष्ठभूमि जानकारी प्रदान करना जो उद्यम के इच्छुक हैं।
- वित्तीय सहायता और अन्य आवश्यकताओं जैसे कि करारनामे का प्रारूप तैयार करना, प्रौद्योगिकी अंतरण के लिए आवश्यक विभिन्न अनुमोदन और व्यावसाय की योजना तैयार करने के लिए गठनबंधन हेतु सहयोग और समर्थन पाने के इच्छुक व्यापार भागीदारो का चयन करना।
- बैंक और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से वित्तीय सिंडीकेशन प्रदान करना।
इसके अलावा राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लि. (एनएसआईसी) ने छोटे स्तर के उद्योगों के लिए प्रौद्योगिकी के विकल्प बढ़ाने की पहल की है। एक आईएसओ 9001 प्रमाणित कंपनी के रूप में, यह देश में लघु स्तर के उद्योगों की वृद्धि और उद्योग संबंधी छोटे स्तर की सेवाओं / व्यापार उद्यमों को देश में प्रोत्साहन, सहायता और पोषण देने के अभियान को पूरा करने के लिए कार्यरत है। संक्रमण, वृद्धि और विकास के पिछले 5 दशकों की अवधि में एनएसआईसी ने देश के अंदर और विदेशों में आधुनिकीकरण के प्रोत्साहन, प्रौद्योगिकी के उन्नयन, गुणवत्ता के प्रति सचेत पहना, बड़े, मध्यम उद्यमों के साथ सहसंबंधों को सुदृढ़ बनाने और निर्यात परियोजनाओं में वृद्धि तथा छोटे उद्योगों से उत्पादों को प्रोत्साहन देकर अपनी शक्ति सिद्ध की है।
साथ ही लघु उद्योग विकास संगठन (सिडो) ने देश में अच्छी गुणवत्ता के साधन प्रदान करते हुए तकनीकी उन्नयन में छोटे स्तर की इकाइयों को सहायता देने के लिए 10 टूल कक्ष और प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना की है।
पुन: प्रौद्योगिकी उन्नयन में निवेश की सुविधा देने और सूक्ष्म और उद्यमों में उच्चतर उत्पादकता के लिए विशिष्ट विनिर्माताओं हेतु आरक्षित मदों की सूची से उत्पादों को चरणगत रूप से हटाने का कार्य उक्त उद्यमों द्वारा किया जा रहा है।
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