उद्यमी को अपने व्यापार के लिए लगातार निधियों की आवश्यकता होती है ताकि अपने कार्यकलापों का संचालन सुव्यवस्थित रूप से कर सके। निधियों को भौतिक संसाधनों में निवेश किया जाता है अर्थात भूमि, भवन, मशीनों, उपकरण, कच्ची सामग्री आदि जिनका उपयोग उद्यम द्वारा उत्पादन और विपणन प्रक्रिया में किया जाता है। दूसरे शब्दों में ये निधियां फर्म के स्थायी संसाधनों के दोहन के लिए पूर्वापेक्षित हैं। उद्यम को प्रत्येक अवस्था में विकास करने और व्यापार कायम रखने के लिए नियमित और उपयुक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता होती है।
व्यापारिक उद्यम विभिन्न स्रोतों से पूंजी जुटा सकता है जैसे प्रतिभूतियों का निर्गम और विभिन्न एजेंसियों से उधार। निधि देने वालों में व्यष्टि निवेशक, संस्थागत निवेशक, बैंक और विशेष औद्योगिक वित्त संस्थाएं शामिल हैं। उधारकर्ता और उधारदाता वित्त बाजारों के जरिए एक साथ मिलाए जाते है अर्थात धन और पूंजी बाजार। पूंजी बाजार में फर्म शेयर, ब्रांड और डिबेन्चर जारी करके निधियां जुटा सकता है। म्यूचुअल फंड भी कम्पनी की वित्तीय सहायता के लिए महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। कम्पनी प्राथमिक बाजार में पूंजी जुटाने के प्रयोजन से आरंभिक सार्वजनिक पेशकश के जरिए सीधे शेयरों की पेशकश कर सकती है। यह कम्पनी द्वारा जारी समस्त शेयर निर्गम या डिबेन्चर की सार्वजनिक खरीद सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय एजेंसियों के साथ हामीदारी करार कर सकती है। कम्पनी द्वारा स्व वित्त पोषण के लिए या आंतरिक स्रोत के रूप में लाभों को पुनर्निवेश महत्वपूर्ण स्रोत है। इसका अभिप्राय कम्पनी के लाभ के कुछ निवल भाग को व्यापार में ही पुन:निवेश करने के लिए अपने पास रखना होता है।
इस प्रकार से विभिन्न साधनों के माध्यम से कम्पनी अपनी वित्तीय आवश्यकताएं पूरी कर सकती हैं।
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