व्यापार का विकास इसकी व्यावहार्यता, क्रियाशीलता और मूल्य वर्धन क्षमता के लिए अनिवार्य है। यह कम्पनी की अधिक लाभ अर्जन और प्रतिस्पर्द्धी के साथ प्रभावी प्रतिस्पर्द्धा करने की क्षमता को दर्शाता है। कॉरर्पोरेट विकास के तीन व्यापक रूप से प्रमुक्त उपाय निम्नलिखित हैं :-
- बिक्री में वृद्धि
- लाभ में वृद्धि
- परिसम्पत्तियों में वृद्धि
कम्पनी अपने उत्पाद के लिए मौजूदा बाजार का विस्तार करके और नए बाजारों में प्रवेश करके विकास लक्ष्य को प्राप्त कर सकती है। यह कम्पनी द्वारा विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है :-
- यह देश तथा अन्य देशों के विभिन्न भागों में शाखा कार्यालय खोल सकती है। शाखा कार्यालय ग्राहकों को आकर्षित करके और इसके व्यापार और विनिर्माण कार्यकलापों की संभावना विस्तारित करके कम्पनी के उत्पाद के बाजार के आकार के विस्तार में सहायता करते हैं।
- यह अन्य कम्पनियों के साथ संयुक्त उद्यम कर सकती है। संयुक्त उद्यम कम्पनी को इसके पुनर्गठन की प्रक्रिया में उपयोगी भूमिका निभाता है। यह नई प्रौद्योगिकी से प्रेरित कार्यकलाप में सहभागी होने के लिए उन्हें समर्थ बनाता है और नए क्षेत्रों में बाजार में प्रवेश करता है।
- फर्म चालू व्यापार भी खरीद सकता है और एकाएक कॉरर्पोरेट सम्मिश्रण से जैसे सम्मेलन अधिप्राप्ति, विलय और अधिग्रहण द्वारा विकास कर सकता है
ऐसे संगठन विश्व में असंख्य अग्रणी कम्पनियों के बाहय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते आए हैं यह कारोबारी बाधाओं को तोड़ने और कारोबार के वैश्विकरण के कारण संभव हो पाया है।
व्यापार के लिए अपने विस्तार हेतु आवश्यक वित्तीय सहायता स्टॉक बाजारों के विभिन्न लिखतों जैसाकि शेयर, बांड, म्यूचुअल फंडों और आरंभिक सार्वजनिक पेशकशों के जरिए निधियां जुटा कर पूरी की जा सकती हैं। यह सार्वजनिक जमा द्वारा अपने लाभों को पुन: निवेश करके भी पूंजी एकत्र कर सकता है। व्यापार के सभी विस्तार योजनाओं की कुंजी है इसमें कम्पनी की खूबियों और खामियों का विभिन्न कारोबारी जोखिम के आलोक में मूल्यांकन शामिल हैं जिसे इसका सामना करना है। ये जोखिम व्यापार में अपरिहार्य हैं और इन्हें पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता है परन्तु उद्यमी उचित रोकथाम और सुधारात्मक जोखिम प्रबंधन के माध्यम से उन्हें नियंत्रित कर सकता है। इसके अतिरिक्त उद्यमी को स्थायी आधार पर अपने व्यापार को विस्तारित करने और बढ़ाने के लिए देश की मूल अपेक्षाओं को ध्यान मे रखना होगा।
यह उसे अपने अधिकार, उत्तरदायित्व और चुनौतियों को जानने में सहायता करता है, जिनका उसे व्यापार करने में सामना करना पड़ता है। इसलिए उद्यमी को अपने व्यापार का विस्तार करने के लिए सभी उपलब्ध संभावित विकल्पों का सुविधारित विश्लेषण करना है, इसमें सन्निहित जोखिमों, वित्तीय आवश्यकताओं और परिवेशी विनियामक ढांचे को ध्यान में रखना होगा।
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