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व्‍यापार संबंधी जोखिम:
कारोबारी जोखिमों से निपटने की प्रविधि
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किसी भी व्‍यापार में जोखिम अपरिहार्य हैं और पूर्ण रूप से समाप्‍त नहीं किया जा सकता है। परन्‍तु उद्यमी उपयुक्‍त जोखिम प्रबंधन रणनीति अपनाकर उनके नकारात्‍मक परिणामों को नियंत्रित और कम कर सकता है। कारोबारी जोखिमों का सामना करने के लिए प्रयुक्‍त होने वाली विविध प्रविधियां निम्‍नलिखित हैं :-

  • उद्यमी क्रियाकलापों के संभावित परिणामों (घाटा या लाभ) का विश्‍लेषण करके कुछ जोखिमों से बच सकता है जो उन जोखिमों को उत्‍पन्‍न करते हैं। जोखिम उठाना तब फायदेमंद होता है यदि प्रतिफल से अंतत: फर्म को लाभ होता है। अन्‍यथा यथा संभव ऐसे कार्य से बचना चाहिए। जाखिमों से बचा जा सकता है यह जोखिम भरी प्रक्रिया का स्‍थानापन अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्‍प से करके किया जा सकता है।
  • यदि उद्यमी जोखिम से नहीं बच सकता है तो उसे जोखिम से होने वाली हानियों को नियंत्रित और कम करने का प्रयास करना चाहिए। यह सक्षम योजना एवं उचित जोखिम प्रबंधन तकनीकी द्वारा किया जा सकता है। फर्म द्वारा लगाई जाने वाली मुख्‍य तकनीकियां निम्‍नलिखित हैं :-
  • विभिन्‍न आंतरिक कारक जो ऐसे जोखिमों को जन्‍म देते हैं; निम्‍नलिखित हैं :-

    • बहुत से कारोबारी जोखिम योजना बनाने में त्रुटि के कारण उत्‍पन्‍न होते हैं। इस प्रकार से वैज्ञानिक पूर्वानुमान और भावी आर्थिक स्थिति का बाजार अनुसंधान प्रबंधन को पहले ही उद्यम के लिए उपयुक्‍त योजना बनाने में सहायता देते हैं। यह उन्‍हें भविष्‍य में कारोबारी माहौल में सम्‍भावित मौकों और खतरों के प्रति सजग करेगा। तदनुसार उद्यमी अपने उत्‍पादों, उत्‍पाद की कीमतों, इसके वितरण चैनलों और बिक्री संवर्धन तकनीकियों में अपेक्षित परिवर्तन कर सकता है।
    • फर्म लगातार संगठन में प्रौद्योगिकीय अनुसंधान और विकास करने के द्वारा प्रौद्योगि‍कियों के पुराने हो जाने से उत्‍पन्‍न घाटों को कम कर सकता है। इस प्रकार से यह वर्तमान उत्‍पादों के पुराने और बेकार हो जाने के पहले ही नए परिलब्धिक उत्‍पाद विकसित कर सकता है।
    • ग्राहकों की सावधानीपूर्वक जांच, बकाया ऋणों का तुरन्‍त संग्रहण और सख्‍त वस्‍तु सूची नियंत्रण के जरिए क्रेडिट की जांच और नियंत्रण भी जोखिम कम करने में सहायता करेगी
    • विभिन्‍न प्रकार के सुरक्षा कार्यक्रम जैस :-


      • अग्नि शमन उपकरण और स्प्रिंकलर सिस्‍टम अग्नि द्वारा उत्‍पन्‍न हानि को रोकने में सहायता करेंगे।
      • सेंधमारी की घाटी, रात का पहरेदार और सुरक्षा वोल्‍ट्स चोरी और सेंधमारी कम करने में स‍हायता करेंगे।
      • शीतल भण्‍डारण या रेफ्रीजरेटर फर्म के सड़ने लायक उत्‍पादों को सुरक्षित रखने में सहायता करेंगे और इस तरह से उत्‍पाद को होने वाली हानियों को कम करेंगे।
      • विशेष पैकिंग किसी प्रकार के खराब होने, तोड़-फोड़ या माल के रिसाव को भण्‍डार या परिवहन में कम करने में सहायक होगा।
      • सुरक्षित कार्य का माहौल जिसमें पर्याप्‍त प्रकाश व्‍यवस्‍था, क्षतिग्रस्‍त फर्श को ढकना तथा उचित चिकित्‍सा देखभाल सुविधाएं फैक्‍टरी में होने वाली दुर्घटनाओं की संख्‍या कम करने में सहायक होगी।


    • प्रतिस्‍पर्द्धा का जोखिम प्रतिस्‍पर्द्धी फर्मों द्वारा सम्मिलित कार्य द्वारा कम किए जा सकते हैं जो प्रतिफल प्रतिबंधित करने बाजार आबंटन करने या एक समान कीमत प्रभारित करने के लिए सहमत हो सकते हैं।
    • उपयुक्‍त नीतियों और विनियमों के जरिए सरकार की उचित कार्रवाई भी आर्थिक माहौल स्थिर करने में सहायक होगी इस प्रकार से कारोबारी जोखिम कम कर दी जाएगी।


  • उद्यमी को ऐसे कुछ संभावित जोखिमों की परिकल्‍पना करना है जो किसी भी प्रकार से कारोबारी संगठन में सन्निहित हैं। ऐसे जोखिमों से उचित योजना द्वारा और दो संभावित अपनाकर निपटा जा सकता है; ये है :-


  • जोखिमों को उन लोगों पर डाल देना जो उनक प्रबंधन में कुशल हैं और उन्‍हें उठाना चाहते हैं। जोखिमों का अंतरण या बदलाव निम्‍नलिखित के जरिए किया जा सकता है :-

    • बचाव करना :- यह जोखिम अंतरण की विधि है इसके साथ भविष्‍य में परिदाय हेतु खरीद एवं बिक्री की जाती है। यह कीमतों में परिवर्तन के कारण घाटे को कम करने के लिए वायदा सौदे का एक रूप है। इसके अंतर्गत कीमत में उतार-चढ़ाव के कारण होने वाले घाटे की संभावना को वस्‍तु की खरीद और बिक्री के बीच समय अंतराल के दौरान बदला जाता हैं। इसमें साथ-साथ दो विपरीत संविदाएं की जाती हैं यद्यपि वे समान प्रकृति के होते हैं एक स्‍थल पर या नकदी बाजार में और दूसरा वायदा बाजार में। बचाव का प्रयोजन व्‍यापार लाभ को वस्‍तु के मूल्‍यों में प्रतिकूल उतार-चढ़ाव से बचाना होता है।
    • जोखिम अंकन :- शेयर और डिबेन्‍चर निर्गम करने वाली सार्वजनिक कम्‍पनी प्रतिभूतियों के समस्‍त शेयरों की बिक्री में विफलता के कारण घाटे का जोखिम उठा सकती है। ऐसी जोखिमों को हामीदारी देने वाले के ऊपर डाला जा सकता है जो प्रतिभूतियां जारी करने वाली कम्‍पनी और अंतिम निवेशक के बीच वित्तीय मध्‍यस्‍थ है। यह कम्‍पनी को अनेकानेक लाभ पहुंचाता है :-


      • यह कम्‍पनी को जोखिम और प्रतिभूतियों के विपणन की अनिश्चियतता से मुक्‍त करता है।
      • हामीदारी देने वाले की पूंजी बाजार के बारे गूढ़ विशेश जानकारी होती है। वे संभावनाओं की तैयारी, उत्‍पलवन के समय और प्रतिभूतियों की कीमत आदि के संबंध में वे अमूल्‍य सुझाव देते है। वे कम्‍पनियों को प्रचार संबंधी सेवा मुहैया कराते हैं जो उनके साथ हामीदारी करार कर लिया है।
      • यह नए उद्यमों के वित्तपोषण और मौजूदा परियोजना के विस्‍तार में सहायता करती है।
      • यह प्रतिभूतियों के निर्गम में निवेशकों का विश्‍वास बढ़ाता है। सुप्रसिद्ध हामीदारीदाता संघ कंपनी को गौरव निर्गम में निवेशक यह महसूस करते है कि निर्गम लाभदायक निवेश के लिए अच्‍छा है। तथा सुप्रसिद्ध अंकन द्वारा हामीदारी दी गई प्रतिभूतियां जनता से बेहतर प्रतिक्रिया प्राप्‍त करती है।
      • निर्गमकर्ता कम्‍पनी को निधियों की उपलब्‍धता के बारे में आश्‍वासन दिया जाता है। महत्‍वपूर्ण परियोजनाएं निधियों के अभाव में विलंब नहीं होती हैं।
      • यह प्रतिभूतियों का भौगोलिक वितरण सुकर बनाता है चूंकि साधारणत: हामीदारी देने वाले पूरे देश में निवेशकों के सम्‍पर्क में रहते है।

      और अधिक ब्‍यौरे के लिए हमारा अनुभाग ' जोखिम अंकन ' देखें।

    • उपसंविदा :- यह अंतरा फर्म संबंध है, जहां एक छोटा फर्म अलग-अलग संघटकों का उत्‍पादन कर सकता है मध्‍यवर्ती निवेश और अंतिम उत्‍पादन या यह मुख्‍य फर्म के लिए विविध असेम्‍बलिंग कार्यकलाप प्रदान कर सकता है। ऐसे छोटे फर्मों को साधारणत: उपसंविदाकारों के रूप में जाना जाता है। उपसंविदा की आवश्‍यकता तब होती है जब फर्म एक व्‍यापार करता है जो काफी लम्‍बे समय में विस्‍तारित होता है या जिसके लिए अनेकानेक विशेषज्ञों की विशेष सेवा की आवश्‍यकता होती है। ऐसी परिस्थिति में फर्म के लिए सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि क्षम या अन्‍य आयातों के परिणामस्‍वरूप जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे जोखिमों को उपसंविदा द्वारा अन्‍य फर्मों पर लादा जा सकता है। उदाहरण के लिए भवन निर्माण का फर्म संविदाकार को इमारती लकड़ी, शीशा, बिजली, वायरिंग, प्‍लम्बिंग सीमेंट आदि के लिए लगा सकता है।


  • जोखिमों को अन्‍य लोगों के साथ बांटना ताकि फर्म के भार को कम किया जा सके। सामान्‍यत: संगठन में बड़ी संख्‍या में लोगों के निवेशों को लगाना बड़ी संख्‍या में शेयरधारकों पर जोखिम को फैलाने में सहायक होता है। तथापि, जोखिम बंटवारे के लिए बीमा अति महत्‍वपूर्ण और प्रबल उपकरण है।

    बीमा की परिभाषा लिखित संविदा के रूप में दी जा सकती है जिसके अंतर्गत एक पार्टी दूसरे पार्टी को अनिश्चित भविष्‍य के कारण इसको होने वाले नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति करने के लिए सहमत होती है। इसके बदले में प्रीमियम का भुगतान किया जाता है। व्‍यक्ति/व्‍यापार जो अपना जीवन/सम्‍पत्ति बीमा करता है वह बीमित/आश्‍वासित कहलाता है। एजेंसी जो बीमा करार करने में सहायता करती है वह बीमाकर्ता या बीमा कम्‍पनी कहलाती है। सह‍मति या संविदा जो लिखित रूप में की जाती है वह पॉलिसी कहलाती है। बीमा पॉलिसी कारोबारी प्रतिष्‍ठान को निम्‍नलिखित लाभ मुहैया कराती है :-

    • रक्षा :- यह घाटे की जोखिम के लिए रक्षा और व्‍यापारी को सुरक्षा की भावना मुहैया कराती है।
    • जोखिमों का अपविस्‍तार :- नुकसान का भार अधिक लोगों पर फैल जाता है।
    • ऋण स्‍थायी :- फर्म का ऋण बढ़ाया जाता है चूंकि व्‍यापारी आसानी से अपने कुछ जोखिमों को बीमा कम्‍पनी को अंतरित कर सकता है।
    • व्‍यापार की सततता और निश्चितता :- यदि सभी जोखिमों का केवल व्‍यापारियों को ही उठाना पड़े तो व्‍यापार का संचालन अनिश्चित और रूक-रूक कर होगा।
    • फर्म की पूंजी का बेहतर उपयोग :- चूंकि बीमा कम्‍पनियां जोखिम अपने ऊपर ले लेती हैं यह काराबारी फर्म को निवेश करने और अपनी पूंजी का अनुकूलतम उपयोग करने में समर्थ बनाता है।

    अधिक जानकारी के लिए हमारे अनुभाग "व्‍यापार का प्रबंधन" देखें।

जोखिम व्‍यापार के अभिन्‍न अंग हैं और इसकी लाभोत्‍पादकता को अल्‍प और दीर्घावधि दोनों में प्रभावित करते हैं। इस प्रकार से प्रभावी जोखिम प्रबंधन रणनीति सफल संगठन के लिए अनिवार्य है।

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