एक्सिम नीति के उद्देश्य राज्य सरकारों तथा केन्द्रीय सरकार के समन्वित प्रयासों के माध्यम से पूरे किए जाते हैं। केन्द्रीय स्तर पर वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय भारत में विदेशी व्यापार के प्रवर्तन और विनियमन से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण अंग है। मंत्रालय में व्यापार के विभिन्न पक्षों पर नजर रखने के लिए एक व्यापक संगठनात्मक व्यवस्था है। मंत्रालय के अंदर वाणिज्य विभाग विदेशी व्यापार नीति के निर्धारण एवं कार्यान्वयन हेतु उत्तरदायी है। विभाग को बहुपक्षीय और द्विपक्षीय वाणिज्यिक संबंधों के दायित्व, राज्य कारोबार, निर्यात प्रवर्तन उपाय तथा कुछ विशिष्ट निर्यात उन्मुख उद्योगों एवं मदों के विकास तथा विनियमन का कार्य भी सौंपा गया है। विदेशी व्यापार से संबंधित मामले विभाग के निम्नलिखित प्रभागों द्वारा निपटाए जाते हैं :-
- प्रशासनिक और सामान्य प्रभाग
- वित्त प्रभाग
- आर्थिक प्रभाग
- व्यापार नीति प्रभाग
- विदेशी कारोबार क्षेत्रीय प्रभाग
- राज्य व्यापार और मूल संरचना प्रभाग
- आपूर्ति प्रभाग
- पौधारोपण प्रभाग
कार्यालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत विभिन्न कार्यालय / संगठन आते हैं, जो इस प्रकार हैं : (क) दो संलग्न कार्यालय, (ख) ग्यारह अधीनस्थ कार्यालय, (ग) दस स्वायत्त निकाय, (घ) पांच सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, (ड.) सलाहकार निकाय, (च) चौदह निर्यात प्रवर्तन परिषदें और (छ) अन्य संगठन।
- संलग्न कार्यालय:-
- विदेशी व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी):-नई दिल्ली में स्थित मुख्यालय के साथ इसका नेतृत्व विदेशी व्यापार के महानिदेशक द्वारा किया जाता है। यह भारतीय निर्यातों को प्रोत्साहन देने के मुख्य उद्देश्य के साथ विदेश व्यापार नीति / एक्सिम नीति के कार्यान्वयन हेतु उत्तरदायी है। डीजीएफटी द्वारा निर्यातकों और प्रबोधकों को उनकी संगत बाध्यताओं के लिए लाइसेंस भी जारी किए जाते हैं, जो क्षेत्रीय कार्यालयों के नेटवर्क के माध्यम से होता है। क्षेत्रीय कार्यालय 34 स्थानों पर स्थित है।
- आपूर्ति एवं निपटान महानिदेशालय (डीजीएस एण्ड डी):- नई दिल्ली में इसके मुख्यालय से इसका नेतृत्व महानिदेशक करते हैं। यह सामान्य प्रयोक्ता मदों, भण्डारों के लिए प्रापण, भण्डारों के निरीक्षण, नाव में लदाई और आयातित भण्डारों / कार्गो को समाशोधित करने के लिए दर संविदाएं समाप्त करने हेतु वाणिज्य विभाग के आपूर्ति प्रभाग में एक कार्यकारी भुजा के रूप में कार्य करता है। चेन्नई, मुम्बई और कोलकाता में इसके 3 क्षेत्रीय कार्यालय स्थित हैं।
- अधीनस्थ कार्यालय:-
- वाणिज्यिक आसूचना और सांख्यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआई एण्ड एस):-
कोलकात्ता में स्थित कार्यालय के साथ इसका नेतृत्व महानिदेशक करते हैं। इसे नीति निर्माताओं, अनुसंधानकर्ताओं, आयातकों, निर्यातकों, व्यापारियों एवं विदेशी क्रेताओं द्वारा आवश्यक वाणिज्यिक सूचना के विभिन्न प्रकारों एवं व्यापार संबंधी आंकड़ों के संग्रह, संकलन तथा प्रकाशन / प्रसार का कार्य सौंपा गया है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्रों के विकास आयुक्त के कार्यालय विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) घरेलू प्रशुल्क क्षेत्रों से विशिष्ट रूप से अलग किए गए भौगोलिक क्षेत्र हैं। एसईजेड का प्रमुख उद्देश्य कुछ विशिष्ट सामान्य सुविधाएं और निर्यातकों को करमुक्त परिवेश प्रदान करना है। भारत के सभी कानून विशेष आर्थिक क्षेत्रों में लागू होते हैं सिवाय एसईजेड अधिनियम / नियमों के अनुसार विशिष्ट रूप से छूट प्रदान करने के। प्रत्येक क्षेत्र का नेतृत्व एक विकास आयुक्त करते हैं और इसका प्रशासन प्रत्येक आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 और विशेष आर्थिक क्षेत्र नियम, 2006 के अनुसार किया जाता है।
- वेतन और लेखा कार्यालय (आपूर्ति) : डीजीएस एण्ड डी सहित आपूर्ति प्रभाग के वेतन और लेखा कार्यों का निष्पादन विभागीय लेखा प्रणाली के तहत मुख्य लेखा नियंत्रक (सीसीए) द्वारा किया जाता है। पूरे देश के आपूर्तिकारों का भुगतान इस संगठन के माध्यम से किया जाता है।
- वेतन और लेखा कार्यालय (वाणिज्य तथा वस्त्रोद्योग):- वाणिज्य विभाग और वस्त्र मंत्रालय दोनों के लिए सामान्य वेतन और लेखा कार्यालय दावों के भुगतान, लेन देनों के लेखा एवं चार विभागीय वेतन और लेखा कार्यालयों के माध्यम से अन्य संबंधित मामलों के लिए उत्तरदायी है, जिनमें से दिल्ली में, दो मुम्बई, दो कोलकाता और एक चेन्नई में है।
- स्वायत्त निकाय:-
- कॉफी बोर्ड:- भारत का कॉफी बोर्ड एक स्वायत्त निकाय है जो वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्य करता है। यह बोर्ड भारत में कॉफी उद्योग के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है। बोर्ड भारतीय कॉफी के अनुसंधान, विकास, विस्तार, गुणवत्ता उन्नयन, बाजार की सूचना और घरेलू तथा बाह्य प्रवर्तन पर केंद्रित है।
- रबर बोर्ड :- यह बोर्ड रबर उद्योग के विकास में संलग्न है। इसके लिए वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक अनुसंधान में सहायता तथा प्रोत्साहन दिया जाता है; रबर उगाने वालों को तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है और पौधरोपण तथा संवर्धन की उन्नत विधियों का प्रशिक्षण इसके उगाने वालों को दिया जाता है।
- चाय बोर्ड:- चाय बोर्ड के प्राथमिक कार्यों में चाय के संवर्धन, निर्माण और विपणन के लिए वित्तीय तथा तकनीकी सहायता प्रदान करना; चाय के निर्यातकों को प्रोत्साहन देना; चाय उत्पादन तथा चाय की गुणवत्ता में सुधार के लिए अनुसंधान और विकास गतिविधियों में सहायता देना एवं छोटे स्तर पर चाय उगाने वाले व्यक्तियों को वित्तीय तथा तकनीकी सहायता प्रदान करना शामिल है।
- तम्बाकू बोर्ड:- भारत सरकार ने तम्बाकू बोर्ड अधिनियम, 1975 के तहत तम्बाकू के निर्यात प्रवर्तन परिषद के स्थान पर तम्बाकू बोर्ड की स्थापना की, जो आपूर्ति और मांग के असंतुलन की घटनाओं पर नियंत्रण रखता है, जिनसे बाजार की समस्याएं होती थी, उत्पादन का विनियमन करता है, विदेशी विपणन को प्रोत्साहन देता है। तम्बाकू बोर्ड अधिनियम का लक्ष्य देश में तम्बाकू उद्योग के योजनाबद्ध विकास का है। बोर्ड की गतिविधियों में भारत तथा विदेश की मांगों के संबंध में वर्जिनिया तम्बाकू के उत्पादन और क्योरिंग का विनियमन शामिल है।
- मसाला बोर्ड :- मसाला बोर्ड का गठन मसाला बोर्ड अधिनियम, 1986 के तहत 26 फरवरी 1987 को किया गया था। यह वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत एक वस्तु बोर्ड है। यह स्वायत्त निकाय अनुसूचित मसालों के निर्यात प्रोत्साहन और उत्पादन या इनमें से कुछ के विकास के लिए उत्तरदायी है जैसे कि इलायची और वनीला।
- निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी), नई दिल्ली :- निर्यात निरीक्षण परिषद निर्यात तथा निर्यात (गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण) अधिनियम, 1963 के तहत अधिसूचित विभिन्न मदों के अनिवार्य लदान पूर्व निरीक्षण तथा गुणवत्ता नियंत्रण के लागू करने के लिए उत्तरदायी है।
- भारतीय विदेशी व्यापार संस्थान (आईआईएफटी), नई दिल्ली :- निम्नलिखित गतिविधियों में संलग्न है :-
- अंतरराष्ट्रीय कारोबार की आधुनिक तकनीकों में कार्मिकों का प्रशिक्षण;
- विदेशी कारोबार की समस्याओं में अनुसंधान आयोजित करना;
- विपणन अनुसंधान, क्षेत्र सर्वेक्षण, वस्तु सर्वेक्षण, बाजार सर्वेक्षण आयोजित करना;
- इसकी गतिविधियों से उत्पन्न जानकारी का प्रसार जो अनुसंधान तथा बाजार अध्ययन से संबंधित है।
- भारत पैकेजिंग संस्थान (आईआईपी), मुम्बई :- इसका पंजीकरण संस्था पंजीकरण अधिनियम के तहत किया गया है। संस्थान का मुख्य लक्ष्य पैकेजिंग उद्योग के लिए कच्ची सामग्री का अनुसंधान करना; पैकेजिंग प्रौद्योगिकी पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना और अच्छी पैकेजिंग की जरूरत के प्रति जागरूकता लाना आदि है।
- समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए), कोच्ची :- यह वाणिज्य मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्य करता है और विभिन्न केन्द्र तथा राज्य सरकारों के साथ समन्वय एजेंसी के रूप में भी कार्य करता है जो मछली उत्पादन और संबद्ध गतिविधियों में संलग्न है। यह प्राधिकरण समुद्री उत्पाद उद्योग के विकास हेतु उत्तरदायी है जिसका विशेष फोकस समुद्री निर्यातों पर है। एमपीईडीए के लिए संकल्पित भूमिका सभी प्रकार की मछलियों, निर्यात का बढ़ना, मानकों को निर्दिष्ट करना, संसाधन, विपणन, विस्तार और समुद्री उद्योग के विभिन्न पक्षों में प्रशिक्षण को शामिल करते हुए व्यापक है।
- कृषि और संसाधित खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपेडा), नई दिल्ली :- यह प्राधिकरण 1986 में अस्तित्व में आया जो कृषि वस्तुओं और संसाधित खाद्य के विकास, उनके निर्यात को बढ़ाने हेतु अस्तित्व में आया। इस का लक्ष्य बढ़े हुए कृषि निर्यात के माध्यम से विदेशी मुद्रा अर्जन को अधिकतम करना, उच्चतर इकाई मूल्य प्राप्ति के माध्यम से किसानों को बेहतर आय प्रदान करना और खेत के उत्पादों के मूल्यवर्धित निर्यात को प्रोत्साहन देकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
- सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम:-वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में निम्नलिखित ट्रेडिंग / सेवा निगम कार्यरत हैं
- सलाहकार निकाय:-
- व्यापार बोर्ड (बीओटी):- का गठन 5 मई 1989 को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में प्रमुख विकासों के संदर्भ में व्यापार तथा उद्योग के साथ निरंतर बातचीत बनाए रखने के लिए एक प्रभावी प्रक्रिया प्रदान करने के विचार से किया गया था।
- निर्यात प्रवर्तन बोर्ड (ईपीबी):- यह निर्यातों की वृद्धि को प्रोत्साहन देकर संबंधित मंत्रालयों के बीच उचित समन्वय के माध्यम से नीति तथा मूलसंरचनात्मक सहायता प्रदान करता है।
- अंतर राज्य व्यापार परिषद:- इसका गठन 24 जून 2005 को राज्य सरकार एवं केन्द्रीय सरकार के बीच एक निरंतर वार्ता सुनिश्चित करने के लिए एवं भारत का निर्यात बढ़ाने के दृष्टिकोण के साथ राज्यों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक स्वस्थ परिवेश प्रदान करने के लिए उपाय पर सरकार को सलाह देने हेतु किया गया था। इस परिषद का प्रतिनिधित्व राज्यों के मुख्य मंत्री या राज्य मंत्रिमंडलीय मंत्रियों द्वारा किया जाता है, जिन्हें मुख्य मंत्री, लेफ्टिनेंट गवर्नर या केन्द्रीय संघ राज्य क्षेत्र के प्रशासक, या वाणिज्य विभाग के सचिव, राजस्व, औद्योगिक नीति तथा प्रवर्तन, कृषि और सहकारिता, नौवहन, सड़क परिवहन और राजमार्ग, विदेश मंत्रालय तथा विद्युत मंत्रालय एवं अध्यक्ष, रेलवे बोर्ड द्वारा मनोनीत किया गया।
- निर्यात प्रवर्तन परिषदें (ईपीसी):-
वर्तमान में वाणिज्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में चौदह निर्यात प्रवर्तन परिषदे हैं। ये परिषदें कंपनी अधिनियम / संस्था पंजीकरण अधिनियम के तहत गैर लाभकारी संगठन के रूप में पंजीकृत है। ये परिषदें सलाहकारी और कार्यपालक दोनों ही रूपों में कार्य करती है।
- अन्य संगठन:-
- भारतीय निर्यात संगठन संघ (एफआईईओ):- दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई और कोलकाता में प्रमुख क्षेत्रीय कार्यालयों सहित यह विभिन्न निर्यात प्रवर्तन संगठनों और संस्थानों का एक शीर्ष निकाय है। यह भारत के वैश्विक निर्यात प्रयास को सामग्री, दिशा और प्रबलन प्रदान करता है।
- भारतीय विवाचन परिषद (आईसीए), नई दिल्ली :- इसका गठन संस्था पंजीकरण अधिनियम के तहत किया गया था और यह विवाचन को वाणिज्यिक विवादों के निपटान एवं व्यापारियों, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संलग्न व्यक्तियों के बीच विवाचन की संकल्पना को लोकप्रिय बनाने के साधन के रूप में कार्य करता है।
- भारतीय हीरा संस्थान (आईडीआई), सूरत :- भारतीय आभूषणों की गुणवत्ता, डिज़ाइन और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय हीरा संस्थान (आईडीआई) की स्थापना रत्न एवं आभूषण उद्योग में तकनीकी कुशलता प्रदान करने के लिए एक केन्द्रीय संस्थान के रूप में जेमोलॉजी (रत्न विज्ञान) और आभूषण निर्माताओं के क्षेत्र में की गई थी।
- फुटवेयर डिजाइन एण्ड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई): - इसकी स्थापना 1986 में जूता चप्पल उद्योग और मानव संसाधन विकास के लिए मूल संरचनात्मक विकास हेतु संस्था अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत एक संस्था के रूप में की गई थी। यह संस्था खुदरा प्रबंधन, फैशन, जूते चप्पलों के डिजाइन, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, फैशन व्यापार, विपणन, रचनात्मक संकल्पना तथा कैड / कैम, चमड़े की वस्तुओं और सहायक वस्तुओं की डिज़ाइन आदि में दीर्घ अवधि और अल्प अवधि के कार्यक्रमों का आयोजन करती है।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एंटी डम्पिंग एण्ड एलाइड ड्यूटीज् (डीजीएडी):- यह निदेशालय सीमा शुल्क अधिनियम के तहत छानबीन और सिफारिश करने के लिए उत्तरदायी है, जहां इसकी आवश्यकता हो, यह चुने गए मदों पर एंटी डम्पिंग ड्यूटी / काउंटर वेलिंग ड्यूटी की राशि तय करने के लिए भी उत्तरादायी है जो घरेलू उद्योग की क्षति को दूर करने में पर्याप्त होगी।
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