'कम्पनी द्वारा लाभों का पुन: निवेश आंतरिक या स्व वित्त पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसका तात्पर्य कम्पनी के लाभ के कुछ अंश को पुनर्निवेश के उद्देश्य से अपने पास रखना है। दूसरे शब्दों में कम्पनी द्वारा रखे गए अर्जन के रूप में आंतरिक रूप से सृजित बचतों को अपने व्यापार के विविधिकरण के लिए कम्पनी में लगाना। यह उद्यमी द्वारा कम्पनी के शेयरधारकों को समुचित लाभांश का भुगतान करने के बाद वास्तव में अपने पास रखी हुई राशि होती है और इन अवितरित लाभों को अपनी वर्तमान और भावी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए कम्पनी द्वारा उपयोग किया जाता है। इससे उनके नियमित व्यापारी आवश्यकताओं को वित्त पोषित करने के लिए बाहरी स्रोतों से निधियों पर निर्भरता कम हो जाती है। ऐसे वित्त पोषण के स्रोत का उपयोग कम्पनी द्वारा निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए किया जाता हैं :-
- व्यापार के विस्तार और विकास के लिए
- कम्पनी की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ करने के लिए
- कम्पनी की विभिन्न कार्यशील पूंजी पूरी करने के लिए
- पुराने ऋणों के उन्मोचन के लिए
- पुरानी बेकार परिसम्पत्तियों के विस्थापन और आधुनिकीकरण के लिए।
कम्पनी में अपने पास रखे गए अर्जन की राशि निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती हैं :-
- निवल लाभ की राशि आंतरिक बचतों का महत्वपूर्ण निर्धारक है। जितनी अधिक निवल लाभ पूंजी द्वारा अर्जित किया जाता है उनकी ही अधिक लाभों को पुन: निवेश करने की उसकी क्षमता होती है।
- कम्पनी की लाभांश नीति व्यापार में पुन: निवेश करने के लिए कितने लाभों को अपने पास रखा जा सकता है, इसका निर्धारण करती है। यदि कम्पनी उदार और नियमित लाभांश नीति का अनुसरण करती है तो यह कम लाभ अपने पास रख सकती है। परन्तु यदि वह रूढ़िवादी लाभांश नीति का अनुसरण करती है तो इसके पास अधिक आंतरिक बचत की संभावना है।
- दूसरा कारक कम्पनी पर लगाया गया कॉरर्पोरेट की दी दर है। यदि दर अधिक है तो यह कम आंतरिक बचत कर सकती है।
- इस राशि को कम्पनी की आयु भी संभावित करती है। नई कम्पनियां शेयरधारकों का संतुष्ट करने की अपनी इच्छा के कारण अधिक लाभ अपने पास रखने में साधारणत: असमर्थ होती हैं। जबकि पुरानी कम्पनियां शेयर धारकों को अपने लाभ का छोटा हिस्सा वितरित करती है और इस प्रकार आंतरिक बचतों की बड़ी राशि अपने पास रखती हैं। /li>
- आधुनिकीकरण और विस्तार संबंधी कम्पनी की भावी योजनाएं भी अपने पास रखी गई लाभों की राशि को प्रभावित करती हैं।
लाभों को पुन: निवेश करने के लाभ निम्नलिखित हैं :-
- ऐसे आरक्षित के साथ कम्पनी, अप्रत्याशित आकस्मिकताओं, पूंजी बाजार के संकटों और अर्थव्यवस्था में अन्य कठिनाईयों का कम मुश्किल एवं सरलता से सामना कर सकती है।
- ऐसी बचत कम्पनी के लाभांश नीति स्थिर करने में सहायता करती हैं। इस प्रकार से यह कम्पनी का अपने शेयरधारकों के साथ संबंध सुधारने सहायता करती है। यह अपने शेयरों के मूल्य जानने में भी सहायता करती है।
- यह वित्त पोषण का सबसे सुविधाजनक और किफायती विधि है और इसमें किसी प्रकार की कानूनी औपचारिकताएं एवं बातचीत शामिल नहीं हैं।
- यह कम्पनी की वित्तीय ढांचे को पूरी तरह लचीला रखने में सहायता करती हैं और कम्पनी के क्रेडिट मूल्यों को बहाती है।
- कम्पनी को विकास और आधुनिकीकरण योजना वित्त साधन की कमी के कारण कठिनाई नहीं उठाएगी यदि कम्पनी के पास ऐसा रखा गया अर्जन हो।
इस प्रकार से यह कम्पनी के निष्पादन और विकास के लिए अल्प और दीर्घावधि दोनों में महत्वपूर्ण लाभप्रद कारक है। परन्तु अत्याधिक लाभ का पुन: निवेश कम्पनी के लिए हानिकारक हो सकता है :-
- ऐसे लाभों का भारी निवेश वर्षानुवर्ष कम्पनी द्वारा करने से शेयरधारकों के बीच असंतुष्टि होती है चूंकि उन्हें कम लाभाशं मिलता है।
- यह प्रबंधन को इक्विटी शेयरधारकों के लिए बोनस शेयर जुटाने के लिए प्रलोभन दे सकता है इससे रिजर्व का अति पूंजीकरण होता है।
- कम्पनी हमेशा शेयरधारकों के हितों के संवर्धन के लिए अपने पास रखे गए लाभ का उपयोग नहीं कर सकती है। अपितु इसका निवेश अलाभप्रद मार्गों और उन व्यापारी प्रतिष्ठानों में लॉकिंग द्वारा दुरूपयोग किया जा सकता है जो शेयर धारकों के हित विरोधी हैं।
- यह स्टॉक एक्सचेंज के शेयर कीमतों में छल करने में प्रयुक्त हो सकता है। कम्पनी लाभांश दर बहुत कम रख सकती है ताकि शेयरों को कम कीमतों पर खरीदा जा सके और बाद में लाभांश दरें बढ़ाकर अधिक शेयर कीमत से यह मुनाफा कमा सकता है।
शेयरधारकों के हितों की रक्षा करने के लिए, कम्पनी अधिनियम में कम्पनी द्वारा लाभांश के भुगतान के संबंध में नियत वर्णित हैं :-
- लाभांश की दर आम बैठक में घोषित की जानी है और बोर्ड द्वारा अनुशंसित दर इस बैठक में शेयर धारकों द्वारा अनुमोदित हो। लाभांश की घोषणा के लिए तीन प्रारंभिक शर्तें हैं :
- लाभ हो।
- बोर्ड को लाभों का वितरण लाभांश के रूप में करने की सिफारिश करना है; और
- शेयरधारकों की आम बैठक बोर्ड की सिफारिशों को अनुमोदित करे
- लाभांश भुगतान के मुख्य स्रोत निम्नलिखित हो सकते हैं :-
- मूल्यहास के लिए व्यवस्था करने के बाद वर्तमान लाभ या
- पिछले वर्षों का अवितरित या संचित लाभ या
- उपयुक्त दोनों में से या
- केन्द्र या राज्य सरकार द्वारा उस सरकार द्वारा दी गई गारंटी के अनुपालन में लाभांश का भुगतान।
- किसी वित्त वर्ष के लिए लाभांश की घोषणा करने के पहले निश्चित निर्धारित लाभ का प्रतिशत कम्पनी के रिजर्व में आंतरित किया जाएगा। कम्पनी स्वैच्छिक रूप से निवल लाभों का अधिक प्रतिशत रिजर्व में आंतरित कर सकती है।
- यदि उपबंधों द्वारा प्राधिकृत हो कम्पनी प्रत्येक शेयर पर प्रदत राशि के अनुपात में लाभांश का भुगतान कर सकती है। यदि उपबंधों में ऐसी कोई व्यवस्था न हो तो लाभांश शेयरों के अंकित मूल्य के समानुपात में होगा।
- उपबंध के अनुसार जहां पूर्णतया प्रदत बोनस शेयर जारी किए जाते है, को छोड़कर लाभांश केवल नकद (या चैक) में भुगतान योग्य हैं; या इसे शेयरधारिता संबंधी बकाया मांग के लिए समायोजित किया जाता है। लाभांश वारंट शेयरधारक के पंजीकृत पते पर भेजा जाएगा, जो लाभांश भुगतान के लिए हकदार है।
- निम्नलिखित को छोड़कर लाभांश घोषणा के 30 दिनों के भीतर भुगतान किया जाएगा :-
- जहां लाभांश प्राप्त करने के अधिकार के बारे में विवाद हो
- जहां यह शेयरधारक की किसी बकाया देयता के लिए कम्पनी द्वारा कानूनी रूप से समायोजित किया गया है।
- जहां भुगतान का करना, शेयरधारक द्वारा दिए गए कुछ निदेशनों के कारण हैं
- जहां किसी कानून के प्रचालन के कारण लाभांश का भुगतान न किया गया हो
- जहां लाभांश भुगतान या लांभाश वारंट भेजने में जो घोषणा के बाद 30 दिनों के भीतर किया जाना है, में विफलता कम्पनी की ओर से गलती से हुई हो।
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