Spacer
 
Spacer
  Business.gov.in Indian Business Portal
An Initiative of India.gov.in
 
 
तीव्र मीनू
 
Growing Business
spacer
starting a Business व्‍यापारी जोखिम
starting a Business संयुक्‍त उद्यम
starting a Business संयुक्‍त कार्यालय खोलना
starting a Business विलयन और अधिग्रहण
starting a Business वित्तीय सहायता
starting a Business विनियामक अपेक्षाएं
   
 
Growing A Business
Growing A Business
वित्तीय सहायता:
सार्वजनिक जमा
Previous Page
spacer

सार्वजनिक जमा कम्‍पनी की अल्‍पा‍वधि और दीर्घावधि आवश्‍यकताओं के वित्तपोषण का एक महत्‍वपूर्ण स्रोत है। शब्‍द ‘’पब्लिक डिपोजिट’’ का अभिप्राय है कम्‍पनी द्वारा जमा या जनता से संग्रहित ऋण के जरिए प्राप्‍त धन। पब्लिक में सामान्‍य जनता, कर्मचारी और कम्‍पनी के शेयरधारक शामिल हैं परन्‍तु इसमें शेयरों और डिबेन्‍चरों में प्राप्‍त धन को शामिल नहीं किया जाता है। भारत में वित्त जुटाने की य‍ह विधि बहुत अधिक महत्‍वपूर्ण हो गई है चूंकि जनता की जमा के अनेकानेक लाभ हैं :-

  • यह निधियां जुटाने की अपेक्षाकृत सरल विधि है विशेषकर ऋण की कमी की अवधि के दौरान।
  • कम्‍पनी के लिए जमाओं की प्रशासनिक लागत शेयर और डिबेन्‍चर के निर्गम में होने वाली लागत की अपेक्षा कम है। सार्वजनिक जमा आमंत्रित करने की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत सरल है और इसमें कम औपचारिकताएं शामिल हैं।
  • कम्‍पनी द्वारा सार्वजनिक जमा पर देय ब्‍याज की दर बैंकों और अन्‍य वित्त संस्‍थाओं से ऋण पर ब्‍याज की अपेक्षा कम है। ऐसे ब्‍याज पर कर में छूट मिलती है।
  • यह कम्‍पनी को बड़े वर्गों की जनता से निधियां उधार लेने में सहायता करती है और कम्‍पनी की वित्त संस्‍थाओं पर निर्भरता कम करती है।
  • यह कम्‍पनी को बड़ी संख्‍या में निवेशकों के साथ सम्‍पर्क बनाने में समर्थ बनाती है।
  • यह लम्‍बी अवधि के लिए निधियों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करती है और कम्‍पनी की वित्तीय संरचना को लोच प्रदान करती है। यहां अति पूंजीकरण का कोई जोखिम नहीं है और जमाओं का पुनर्भुगतान किया जा सकता है जब उनकी आवश्‍यकता नहीं होती है।
  • शेयरधारकों के नियंत्रण को कोई बिखराव नहीं है चूंकि जमाकर्ताओं को मताधिकार नहीं है और कम्‍पनी के आंतरिक प्रबंधन में हस्‍तक्षेप नहीं कर सकते हैं।

परन्‍तु जनता की जमाओं के माध्‍यम से वित्तपोषण की इस विधि की अपनी सीमाएं हैं :-

  • चूंकि सार्वजनिक जमाएं अर्थव्‍यवस्‍था में अनिश्चित परिस्थितियों से अधिक प्रभावित होती हैं, तदनुसार जमाकर्ताओं की प्रतिक्रिया अलग-अलग होती है। यदि कम्‍पनी का निष्‍पादन अच्‍छा न हो तो उनकी प्रवृत्ति वापस लेने की हो सकती है।
  • कम्‍पनी में सार्वजनिक जमा और प्राथमिकता और अनचाहा क्षेत्रों में संसाधनों के विचलन का कारण उत्‍पन्‍न कर सकती है।
  • व्‍यवसायिक निवेशक ऐसी जमाओं में निवेश करना पसंद नहीं कर सकते हैं चूंकि पूंजी वृद्धि की कोई नहीं या कम संभावना है।
  • चूंकि सार्वजनिक जमाकर्ता असुरक्षित होते हैं, कम्‍पनी बंद हो जाने की दशा में जमाकर्ताओं के लिए धन गवाने का जोखिम होता है।
  • उनका विस्‍तृत उपयोग स्‍वास्‍थ्‍य पूंजी बाजार के विकास को प्रतिबंधित करता है, उतकी प्रवृत्ति अर्थव्‍यवस्‍था की ब्‍याज दर के पैटर्न को विकृत करने की होती है और इसके कारण दुरूस्‍त औद्योगिकर सुरक्षाओं को सत्‍यानाश हो सकता है।

सार्वजनिक जमाओं को विनियमित करना

सार्वजनिक जमाओं का विनियमन कम्‍पनी अधिनियम और कम्‍पनी (जमा स्‍वीकार) नियमावली 1975 के उपबंधों द्वारा होता है। उनके अनुसार निम्‍नलिखित राशि जमा शब्‍द में शामिल नहीं किए जाते हैं :-

  • केन्‍द्र सरकार या राज्‍य सरकार या स्‍थानीय प्राधिकरण, विदेशी सरकार, कोई विदेशी नागरिक, या प्राधिकरण या कोई अन्‍य स्रोत से प्राप्‍त जिसका पुनर्भुगतान की गारंटी केन्‍द्र सरकार या राज्‍य सरकार द्वारा दी जामी है वह राशि किसी बैंकिंग कम्‍पनी, भारतीय स्‍टेट बैंक या अनुषंगी, राष्‍ट्रीयकृत बैंक या सहकारी बैंक से प्राप्‍त कोई राशि।
  • किसी बैंकिंग कम्‍पनी, भारतीय स्‍टेट बैंक या इसकी कोई सहायक शाखा या सहकारी बैंक से ऋण के रूप में प्राप्‍त कोई राशि
  • किसी भी अधिसूचित वित्त संस्‍था से ऋण के रूप में प्राप्‍त कोई राशि
  • किसी अन्‍य कम्‍पनी से कम्‍पनी द्वारा प्राप्‍त की गई कोई राशि
  • कम्‍पनी के कर्मचारी से प्रतिभूति जमा के रूप में प्राप्‍त की गई कोई राशि
  • कम्‍पनी के व्‍यापार के सिलसिले में या कारोबार के प्रयोजन से किसी खरीद, बिक्री या अन्‍य एजेंटों से प्रतिभूति के रूप में या अग्रिम के रूप में प्राप्‍त की गई कोई राशि
  • किसी शेयर, स्‍टॉक, बांड या डिबेन्‍चर की खरीद ऐसे शेयरों का आबंटन निलंबित करने आदि और शेयरों को अग्रिम वापस मांगने द्वारा प्राप्‍त कोई राशि
  • न्‍यास में प्राप्‍त कोई राशि या मार्गस्‍थ कोई राशि
  • कोई भी राशि को कम्‍पनी के निदेशकों या इसके शेयरधारकों से निजी कम्‍पनी द्वारा प्राप्‍त की जाती है।
  • किसी भी गैर जमानती ऋणों की राशि जो वित्त संस्‍थाओं की परिकल्‍पना अनुशीलन में प्रवर्तकों द्वारा लाई जाती है या ऐसे ऋण जो खुद प्रवर्तकों द्वारा प्रदान की जाती है और/या उनके रिश्‍तेदारों द्वारा दी जाती है परन्‍तु उनके मित्रों द्वारा एवं कारोबार सहयोगियों द्वारा प्रदान नहीं की जाती है।

कम्‍पनी अधिनियम और उनके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन कम्‍पनियों द्वारा जमा का आमंत्रण और स्‍वीकार करना निम्‍नलिखित शर्तों के अधीन होते हैं :-

  • कम्‍पनियों को असीमित राशियां सार्वजनिक जमाओं के ज‍रिए जुटाने की अनुमति नहीं है। सभी बकाया जमाओं का कुल योग प्रदत पूंजी और कम्‍पनी की मुक्‍त जमा के एक निश्चित प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है।
  • कम्‍पनी द्वारा जमा का आमंत्रण केवल विज्ञापन के द्वारा किया जा सकता है जिसमें कम्‍पनी संबंधी वित्तीय स्थिति, प्रबंधन ढांचा और अन्‍य विवरणों का उल्‍लेख किया जाता है। वह कम्‍पनी जो जमाओं के पुनर्भुगतान या उन पर ब्‍याज अदा करने में चूक करती है, उसे जमा आमंत्रित करने से निषेध किया जाता है।
  • माकर्ता कम्‍पनी द्वारा दिया गया आवदेन प्रपत्र भरेंगे। इसके बदले में कम्‍पनी जमा रसीद जारी करती है जो कम्‍पनी द्वारा ऋण की पावती होती है। जमा के निबंधन और उसकी शर्तें रसीद के पीछे मुद्रित होती हैं। कम्‍पनी जमाओं का रजिस्‍टर रखेगी जिसमेंर निर्धारित विवरण, और जमा का फाइल रिटर्न जो रजिस्‍ट्रार के पास अपने लेखापरीक्षक द्वारा विधिवत रूप से प्रमाणित होगा, यह प्रतिवर्ष 30 जून या इससे पहले किया जाएगा।
  • कम्‍पनी द्वारा ऐसी जमाओं पर दिया जाने वाला ब्‍याज सरकार द्वारा निर्धारित दर के अनुसार होना है। जमाओं पर ब्‍याज दर भी भिन्‍न-भिन्‍न होती हैं यह जमा की अवधि और कम्‍पनी की प्रतिष्‍ठा पर निर्भर करता है।

कम्‍पनी (संशोधन) अधिनियम, 2000 में कुछ नई धाराएं अंतर्विष्‍ट की गई हैं यह लघु जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए की गई हैं। शब्‍द लघु जमाकर्ता का अभिप्राय जमाकर्ता जिसमें (वित्तीय वर्ष में) कम्‍पनी में बीस हजार रुपए से कम राशि जमा किया है इसमें उसके नामित, उत्तराधिकारी और कानूनी प्रतिनिधि भी शामिल हैं। उनको वापस भुगतान करने में किसी चूक के मामले में इसे चूक की तारीख से साठ दिनों के भीतर कम्‍पनी के विधि बोर्ड को सूचित करना होगा। तब कम्‍पनी का विधि बोर्ड चूक संबंधी सूचना प्राप्‍त करने की निदेश होगा। बोर्ड के आदेश का पालन न करने पर, कम्‍पनी और इसके निदेशकों को कारावास की सजा होगी और दैनिक जुर्माने का भुगतान उस अवधि के दौरान करना होगा जब तक ऐसा अननुपालन जारी रहता है। तथापि, यदि ऐसी चूक‍कर्ता कम्‍पनी लघु जमाकर्ताओं से जमा आमंत्रित करना चाहती है, तो यह अपने सभी भावी विज्ञापनों और आवेदन प्रपत्रों में अपनी चूक की प्रकृति का उल्‍लेख करेगी।

इसके अतिरिक्‍त सार्वजनिक जमाओं को विनियमित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर निदेशपत्र जारी करता है। इनका लक्ष्‍य सार्वजनिक हित की रक्षा करना और जमाओं में निवेश करने में उन्‍हें सुरक्षा का एहसास दिनाना है। ये विनियमन निम्‍नलिखित से संबंधित हैं :-

  • प्रदत्त पूंजी के प्रति जमाओं और कम्‍पनी की मुक्‍त आरक्षित निधियों का अनुपालन
  • अधिकतम समय अवधि
  • चालू या किसी अभियोग से मुक्‍त या लियन से मुक्‍त अनुसूचित बैंक के अन्‍य खाते में या अनुमोदित प्रतिभूतियों में जमा का विनिर्दिष्‍ट प्रतिशत निवेश करने की बाध्‍यता, जिसका उपयोग केवल जमाओं के पुनर्भुगतान के लिए किया जाएगा।
  • आरबीआई के पास समय-समय पर विवरणी फाइल करना जिसमें सार्वजनिक जमाओं/ऋणों संबंधी अपेक्षित सूचना देना तथा इसकी वित्तीय स्थिति एवं कार्यचालन संबंधी कुछ विनिर्दिष्‍ट सूचना देना। पीछे

^ ऊपर

 
संबंधित लिंक्‍स :
कम्‍पनी (संशोधन) अधिनियम, 2000
कम्‍पनी अधिनियम, 1965
कम्‍पनी (संशोधन) अधिनियम, 2002
कम्‍पनी (संशोधन) अधिनियम, 2006
कम्‍पनी कार्य मंत्रालय
भारतीय रिजर्व बैंक
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी)
 
Government of India
spacer
 
 
Business Business Business
 
  खोजें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
मैं कैसे करूँ
Business कम्‍पनी पंजीकरण करूं
Business नियोक्‍ता के रूप में पंजीकरण करें
Business केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में शिकायत भरें
Business टैन कार्ड के लिए आवेदन करें
Business आयकर विवरणी भरें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
  हमें सुधार करने में सहायता दें
Business.gov.in
हमें बताएं कि आप और क्‍या देखना चाहते हैं।
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
निविदाएं
नवीनतम शासकीय निविदाओं को देखें और पहुंचें...
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
 
पेटेंट के बारे में जानकारी
Business
कॉपीराइट
Business
पेटेंट प्रपत्र
Business
अभिकल्पन हेतु प्रपत्र
 
 
Business Business Business
 
 
 
Spacer
Spacer
Business.gov.in  
 
Spacer
Spacer