व्यापार जोखिम ऐसे विविध प्रकार के जोखिम हैं जो अनेक कारणों से उत्पन्न होते हैं। इन जोखिमों को मोटे तौर पर उनके उद्गम स्थल के आधार पर दो प्रकारों में बांटा गया है।
- आंतरिक जोखिम ऐसे जोखिम है जो व्यापार उद्यम के अंदर होने वाली घटनाओं से उत्पन्न होते हैं। ये जोखिम व्यापार के सामान्य रूप से चलने के दौरान उत्पन्न होते हैं। इन जोखिमों की भविष्यवाणी की जा सकती है तथा उनके होने की संभावना का निर्धारण किया जा सकता है। अत: इन्हें काफी हद तक उद्यमी द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।
इन जोखिमों को उत्पन्न करने वाले विभिन्न आंतरिक कारक इस प्रकार है :-
- मानवीय कारक:-आंतरिक जोखिम के महत्वपूर्ण कारण हैं। ये व्यापार यूनियन द्वारा हड़ताल या तालाबंदी, एक कर्मचारी की लापरवाही और बेईमानी, उद्योग में दुर्घटना या मौत होने पर, प्रबंधक या संगठन के अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति की अक्षमता आदि हो सकती हैं। साथ ही आपूर्तिकार द्वारा समय पर सामग्रियों या मदों की आपूर्ति न होना अथवा उधारकर्ता द्वारा भुगतान में चूक होने से व्यापार उद्यम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- प्रौद्योगिकीय कारक:- ये उत्पादन या वितरण की तकनीकों में होने वाले अप्रत्याशित परिवर्तन हैं। वे प्रौद्योगिकीय समस्या या अन्य व्यापार जोखिमों के परिणाम स्वरूप उत्पन्न होते हैं। उदाहरण के लिए यदि कोई ऐसी प्रौद्योगिकी उन्नति होती है जो उच्चतर गुणवत्ता के उत्पाद तैयार कर सकती है तब उत्पादन में पारम्परिक तकनीक का उपयोग करने वाली फर्म को बाजार के छूट जाने का जोखिम हो सकता है जो निम्न गुणवत्ता के उत्पाद प्रदान करती है।
- भौतिक कारक:- ऐसे कारक जिन से फर्म की संपत्ति को हानि या क्षति हो सकती है। इसमें मशीनरी और व्यापार में प्रयुक्त उपकरण का खराब हो जाना; उद्योग में चोरी, सामान को लाने या ले जाने में हुई क्षति आदि शामिल हैं। इसमें फर्म द्वारा जानबूझ कर या बिना जाने हुई क्षतियों के लिए तृतीय पक्षों को भुगतान किए गए मुआवज़े के परिणामस्वरूप हुई क्षति भी शामिल है।
- बाह्य जोखिमों में ये जोखिम शामिल हैं जो व्यापारिक संगठन के बाहर होने वाली घटनाओं से उत्पन्न होते हैं। आम तौर पर ये घटनाएं उद्यमी के नियंत्रण से बाहर होती है। अत: परिणामी जोखिम का पहले से अनुमान नहीं लगया जा सकता और उनके होने की संभावना का निर्धारण शुद्धतापूर्वक नहीं किया जा सकता।
विभिन्न बाह्य कारक जो इन जोखिमों को पैदा कर सकते हैं :-
- आर्थिक कारक:- बाह्य जोखिमों का सबसे महत्वपूर्ण कारक यही कह जा सकते हैं। ये बाजार की प्रचलित परिस्थितियों में आने वाले बदलाव से उत्पन्न होते हैं। वे उत्पाद की मांग में बदलावों के रूप में, मूल्यों में उतार चढ़ाव, स्वाद में परिवर्तन तथा उपभोक्ताओं की रुचि में बदलाव एवं उनकी आय के परिवर्तन से, आउटपुट या व्यापार चक्र से प्रभावित हो सकते हैं। उत्पाद के लिए बढ़ी हुई प्रतिस्पर्द्धा, अर्थव्यवस्था में मुद्रा स्फीति का रुझान, बढ़ती बेरोजगारी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उतार चढ़ाव व्यापार उद्यमों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे जोखिम जो अर्थव्यवस्था में आए बदलाव के कारण उत्पन्न होते हैं, इन्हें ''गतिशील जोखिम'' कहते हैं। ये जोखिम आम तौर पर पहले से कम अनुमान लगाने योग्य होते है, क्योंकि ये नियमित अंतरालों पर उत्पन्न नहीं होते। साथ ही इन जोखिमों से फर्म को अनिवार्य रूप से नुकसान नहीं होता, क्योंकि इनमें फर्म के लिए प्राप्ति का एक तत्व भी निहित होता है। उदाहरण के लिए बाजार में उतार चढ़ाव के कारण एक फर्म का जाना माना उत्पाद या तो अपनी मांग खो सकता है या बाजार में इसकी हिस्सेदारी बढ़ सकती है।
- प्राकृतिक कारक:- ये अनदेखी प्राकृतिक आपदाएं हैं, जिन पर उद्यमी का बहुत कम या लगभग नहीं के बराबर नियंत्रण होता है। ये भूकम्प, बाढ़, अकाल, तूफान, बिजली गिरने, चक्रवात आदि के परिणाम स्वरूप हो सकती हैं। इन घटनाओं से फर्म को जीवन और संपत्ति दोनों की हानि हो सकती है या इसकी वस्तुओं को नुकसान पहुंच सकता है। उदाहरण के लिए गुजरात के भूकंप से केवल उन व्यापार उद्यमियों को ही ठीक न होने योग्य नुकसान हुए बल्कि पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
- राजनैतिक कारक:- व्यापार की कार्यशैली में इनका दीर्घ और अल्पवधि दोनों पर ही महत्वपूर्ण प्रभाव है। ये एक देश की राजनैतिक उथल पुथल के परिणाम स्वरूप जैसे कि सरकार के गिरने या बदलने, सामुदायिक हिंसा या देश में हुए दंगों, गृह युद्ध और साथ ही आस पास के देशों से बगावत के रूप में प्रभाव डालते हैं। इसेक अलावा सरकारी नीतियों और विनियमों में बदलाव से भी एक उद्यम की लाभ प्रदता और स्थिति पर प्रभाव पड़ सकता है। उदाहरण के लिए औद्योगिक नीति, व्यापार नीति, बजट की वार्षिक घोषणा, विभिन्न विधानों में संशोधन आदि से एक व्यापार उद्यम के लाभ में वृद्धि या कमी हो सकती है।
इस प्रकार व्यापार के जोखिम अनेक रूपों में हो सकते हैं। इन जोखिमों का सामना सफलतापूर्वक करने के लिए प्रत्येक व्यापारी को इन जोखिमों के प्रकार और कारणों तथा विभिन्न उपायों को समझना चाहिए जो इन्हें न्यूनतम बनाने के लिए अपनाए जाएं।
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