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वित्तीय सहायता:
हामीदारी
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हामीदारी एक करार है जो कम्‍पनी द्वारा वित्त एजेंसी के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए ,कि कम्‍पनी द्वारा जारी समस्‍त शेयरों या डिबेन्‍चरों को जनता खरीदेगी, किया जाता है। वित्त एजेंसी हामीदारी दाता के रूप में जानी जाती है और यह उतने हिस्‍से का कम्‍पनी निर्गम खरीदने के लिए सहमत होती है जिसके लिए विशिष्‍ट हामीदारी कमीशन के लिहाज से जनता द्वारा नहीं खरीदा गया है। हामीदारी बाध्‍यता की राशि प्रदान करता है यह अवधि जिसके भीतर निर्गमकर्ता द्वारा सूचित किए जाने के बाद हामीदारी दाता का निर्गम खरीदना है, कमीशन की राशि और व्‍यवस्‍था का ब्‍यौरा, यदि कोई हो, हामीदारी बाध्‍यता पूरा करने के लिए हामीदारी दाता द्वारा दिया जाता है। हामीदारी कमीशन शेयरों पर 5 प्रतिशत और डिबेन्‍चरों के मामले में 2.5 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। हामीदारीदाता अपना कमीशन चाहे वे एक भी प्रतिभूति खरीदें या नहीं, प्राप्‍त करते हैं।

कॉरर्पोरेट क्षेत्रक‍ के विकास के साथ-साथ हामीदारी हाल के वर्षों में बहुत महत्‍वपूर्ण हो गया है। यह कम्‍पनी को अनेकानेक लाभ पहुंचाता हैं :-

  • यह कम्‍पनी को प्रतिभूति की विपणन की अनिश्चितता की जोखिम से मुक्‍त करता है।
  • हामीदारीदाता की पूंजी बाजार के बारे गूढ़ और विशेष जानकारी है। वे निर्गमकर्ता कम्‍पनी को संभावनाएं तैयार करने में उत्‍प्‍लवन समय और प्रतिभूतियों की कीमत के बारे में मूल्‍यवान सुझाव देते हैं। वे कम्‍पनियों को प्रचार-प्रसार सेवाएं मुहैया कराते हैं जिन्‍होंने उनके साथ हामीदारी करार किया है।
  • यह नए उद्यमों के वित्त पोषण और मौजूदा परियोजनाओं के‍ विस्‍तार में सहायता करता है।
  • यह प्रतिभूतियों के निर्गमों में निवेशकों का विश्‍वास बढ़ाता है। सुविज्ञ हामीदारीदाता संघ कम्‍पनी की प्रतिष्‍ठा बढ़ाता और निवेशक महसूस करते हैं कि निर्गम लाभप्रद निवेश के लिए काफी अच्‍छा है। प्रतिष्ठित हामीदारीदाता द्वारा हामीदारी दी गई प्रतिभूतियां भी जनता से बे‍हतर प्रतिक्रिया प्राप्‍त करती हैं।
  • जारीकर्ता कम्‍पनी को धन की उपलब्‍धता के लिए आश्‍वस्‍त किया जाता है। महत्‍वपूर्ण परियोजनाओं को धनराशि की कमी के कारण रोका नहीं जाता है।
  • निर्गमकर्ता कम्‍पनी को निधियों की उपलब्‍धता का आश्‍वासन मिलता हैं महत्‍वपूर्ण परियोजनाओं में निधियों के अभाव में विलंब नहीं होता है। यह प्रतिभतियों के भौगोलिक वितरण सुकर बनाता है क्‍योंकि साधारणत: हामीदारीदाता देशभर में निवेशकों के सम्‍पर्क में रहते हैं।

हामीदारी के प्रकार

  • सिन्‍डीकेट हामीदारी : यह वह हैं जिसमें दो या अधिक एजेंसियां या हामीदारीदाता संयुक्‍त रूप से प्रतिभूतियों के निर्णय की हामीदारी देते हैं। ऐसी व्‍यवस्‍था तब की जाती है जब कुल निर्गम एक हामीदारीदाता की क्षमता से अधिक होते हैं या तब जब वह निधियों की बड़ी राशि एक ही निर्गम में ब्‍लॉक नहीं करना चाहता है।
  • उप-हामीदारी : यह वह है जिसमें हामीदारीदाता अन्‍य एजेंसियों द्वारा हामीदारी दी गई निर्गम का कुछ भाग प्राप्‍त करता है। यह हामीदारी में सन्निहित जोखित को अपविस्‍तृत करने के लिए किया जाता है। प्रोस्‍पेक्‍टस में प्रत्‍येक हामीदारीदाता का नाम उसके द्वारा हामीदारी दी गई प्रतिभूतियों की राशि के साथ उल्लिखित होता है।
  • फर्म हामीदारी : यह वह होता है जिसमें हामीदारीदाता प्रतिभूतियों के ब्‍लाक के लिए आवेदन करता है। इसके अधीन हामीदारीदाता इस प्रतिभूति के ब्‍लॉक के का लेन और इसके लिए भुगतान करने के लिए सहमत होता है, यह हामीदारीदाता के रूप में अपनी वचनबद्धता के अतिरिक्‍त साधारण ग्राहक के रूप में होता है। हामीदारीदाता अपने द्वारा हामीदारी दिए गए सभी प्रतिभूतियों को खरीदे यह आवश्‍यक नहीं है। उदाहरण के लिए यदि हामीदारीदाता ने कम्‍पनी द्वारा पेशकश की गई 5 लाख शेयरों के समग्र निर्गम मे लिए हामीदारी दिया है और इसके अतिरिक्‍त फर्म आबंटन हेतु 1 लाख शेयरों के लिया आवेदन किया है। यदि जनता समग्र निर्गम खरीदती है हामीदारीदाता को 1 लाख शेयर आबंटित किया जाएगा यद्यपि उसे किसी शेयर को खरीदने की आवश्‍यकता नहीं है।

हामीदारी दाताओं के प्रकार

पूंजी बाजार के विकास और विशेष वित्त संस्‍थाओं के विकास के कारण पूंजी निर्गमों की हामीदारी बहुत लोकप्रिय हो गई है। सार्वजनिक वित्त संस्‍थाओं की अगुआई ने बैकों, बीमा कम्‍पनियों और स्‍टॉक ब्रोकरों को नियमित आधार पर हामीदारी देने के लिए प्रोत्‍साहित और मनोभाव में अलग-अलग होते हैं :-

  • आईआईएफ, आईसीआईसी और आईडीबीआई:- जैसे विकास बैंक :- वे एकदम वस्‍तुनिष्‍ठ तरीका अपनाते हैं। वे पूंजी निर्गमों की तत्‍काल लाभोत्‍पादकता की बजाय उद्यम की दीर्घावधि व्‍यवहार्यता पर जोर देते हैं। वे प्रतिभूतियों के नए निर्गमों के प्रति जनता की प्रतिक्रिया प्रोत्‍साहित करने का प्रयास करते हैं।
  • एलआईसी और यूटीआई जैसे संस्‍थागत निवेशक :- उनकी हामीदारी नीति उनकी निवेश नीति द्वारा शासित होती हैं।
  • वित्त और विकास निगम :- पूंजी निर्गमों की हामीदारी देते समय वे भी वास्‍तुनिष्‍ठ नीति का अनुसरण करते है।
  • निवेश और बीमा कम्‍पनियां एवं स्‍टांक्‍ ब्रोकर :- वे निर्गमकर्ता कम्‍पनी की अल्‍पावधि संभावना पर मुख्‍य रूप से जोर देते हैं चूंकि वे लम्‍बी समय अवधि के लिए बड़ी राशि ब्‍लॉक नहीं कर सकते हैं।

हामीदारी के रूप में कार्य करने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्‍त करना होता है। यह प्रमाण पत्र भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (हामीदारीदाता) विनियमन, 1993 के अधीन सेबी द्वारा प्रदान किया यजाता है। ये विनियम प्राथमिक रूप से पंजीकरण पूंजी की पर्याप्‍तता, हामीदारी दाता की वाध्‍यता और उत्तरदायित्‍व जैस मुद्दों से संबंधित होते हैं। इसके अधीन हामीदारी दाता को निर्गमकर्ता को कम्‍पनी के साथ ठोस करार करना पड़ता है और उपयुक्‍त करार अन्‍य चीजों के बीच उसके और निर्गमकर्ता कम्‍पनी के बीच कर्त्तव्‍यों और उत्तरदायित्‍वों के आबंटन को परिभाषित करना चाहिए। इन विनियमों में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (हामीदारीदाता) (संशोधन) विनियमन 2006 द्वारा और आगे संशोधन किया गया है।

^ ऊपर

 
संबंधित सम्‍पर्क :
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) हामीदारी दाता संबंधी विनियमन
भारतीय स्‍टेट बैंक द्वारा हामीदारी
आईडीबीआई द्वारा ऋण व्‍यवस्‍था और हामीदारी
कम्‍पनी (संशोधन) अधिनियम, 2000
कम्‍पनी अधिनियम, 1956
कम्‍पनी (संशोधन) अधिनियम, 2002
कम्‍पनी (संशोधन) अधिनियम, 2006
कम्‍पनी कार्य मंत्रालय
भारतीय रिजर्व बैंक
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी)
 
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