किसी वस्तु/सामान को किसी दूसरे देश को बेचना निर्यात कहा जा सकता है। भारतीय विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम (1992), के धारा 2 (ई) के तहत निर्यात शब्द का अर्थ किसी वस्तु को उचित मूल्य के लेनदेन के बदले, सड़क, समुद्री या हवाई मार्ग से भारत से बाहर ले जाने से है।
किसी उत्पाद को निर्यात करना एक लाभदायक तरीका है जो व्यापार को बढ़ाता है और क्षेत्रीय बाजारों पर निर्भरता को कम करता है। निर्यात का पहला प्रयोजन विदेशी मुद्रा अर्जित करना होता है, जो ना केवल निर्यातक को फायदा पहुचाता है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ प्रदान करता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एक निर्यातक को अधिक प्रतियोगी और कम असुरक्षित बनाता है।
भारत सरकार प्रोत्साहन और योजनाओं तथा विदेशी सरकार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठनों के साथ लाभदायक व्यापारिक समझौतों के द्वारा भारतीय निर्यात को बढ़ावा देती है।
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