आयात शुल्क
व्यापार के उद्देश्य से आयातित अधिकतर वस्तुओं पर सरकार आयात शुल्क लगाती है। ये शुल्क विभिन्न प्रकार के होते हैं, जैसे - बुनियादी शुल्क, अतिरिक्त सीमा शुल्क, ट्रू काउंटरवेलिंग ड्यूटी, एंटी डम्पिंग या सेफगार्ड ड्यूटी और शिक्षा उपकर आदि। शुल्क से सम्बंधित विवरण यहां से प्राप्त किए जा सकते हैं।
आयात शुल्क का भुगतान
बैंक का प्रोविजनल डिपोजिट अकाउंट : सीमा शुल्क द्वारा नामित बैंकों से शुल्क सीधे काटने की सुविधा उपलब्ध है। यह सुविधा आयातकों से सीमा शुल्क प्राप्ति में होने वाले देरी तथा दो दिन बाद शुल्क के ब्याज के भुगतान को कम करती है। आयातकों को नामित बैंक में एक डिपोजिट अकाउंट खुलवाना होता है और बैंक के निर्देशानुसार उसमे न्यूनतम निर्धारित रकम रखना होता है। प्रविष्टियों के मूल्यांकन के पूरा होने पर, आयातक प्राधिकार स्लिप के अनुसार सीमा शुल्क राशि काटने का अधिकार दे सकता है।
- ड्राफ्ट / बैंकर्स चैक द्वारा भुगतान : भारतीय रिजर्व बैंक ने नामित बैंकों को केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों से स्वीकृत लेखपत्र के अनुसार ही भुगतान के नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
- ब्याज : 2 दिनों के भीतर शुल्क का भुगतान ना किए जाने के बाद ब्याज लगाया जाता है।
प्रविष्टि के बिल
यह एक दस्तावेज होता है जो सत्यापित करता है कि निर्दिष्ट विवरण और मूल्य की वस्तु विदेश से देश में प्रवेश कर रही है। अगर माल इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटरचेंज (ईडीआई) प्रणाली के माध्यम से आगे बढ़ा दिया गया है तो कोई औपचारिक प्रविष्टि दायर नहीं करना पड़ता है क्योंकि यह पहले से ही कंप्यूटर द्वारा बनाया जा चुका होता है, लेकिन आयातक को कस्टम क्लियरेंस की एंट्री के लिए दिए गए विवरण के साथ एक कार्गो घोषणा दायर करनी होती है।
प्रविष्टि के बिल कई प्रतियों में अलग-अलग उद्देश्य के लिए और अलग-अलग रंगों के साथ दायर की जानी होती है। प्रविष्टि के बिल तीन प्रकार के होते हैं :-
- घरेलू खपत के लिए प्रविष्टि बिल
- भंडारगृहों के लिए प्रविष्टि बिल
- बॉण्ड पूर्व क्लीयरेंस के लिए एंट्री का बिल
नॉन इडीआई सिस्टम के मामले में दायर किये जाने वाले दस्तावेज और इनसे सम्बंधित विवरण यहां से प्राप्त किए जा सकते हैं
ग्रीन चैनल सुविधा
कुछ बड़े आयातकों को ग्रीन चैनल क्लियरेंस की सुविधा प्रदान की गई है। इस सुविधा के अंतर्गत वस्तुओं की निकासी रुटीन परीक्षण के बगैर ही कर दी जाती है। ऐसे आयातकों को बिल ऑफ़ एंट्री का फॉर्म भरते समय एक घोषणा करनी पड़ता है जिसमे वस्तुओं का मूल्यांकन सामान्य तौर पर ही किया जाता है सिवाय इसके कि उनका भौतिक परीक्षण नहीं किया जाता है। ऐसे मामलों में केवल चिन्ह और संख्या की जांच की जाती है। हालांकि कुछ मामलों में जब वस्तु के विवरण और मात्रा में संदेह हो तब भौतिक परीक्षण के भी आदेश दिए जाते हैं।
इस सुविधा का लाभ ऐसे आयातक उठा सकते हैं जो सीमा शुल्क विभाग द्वारा इस सुविधा के लिये योग्य पाए गए हैं। जिन आयातकों की छवि साफ सुथरी रही है, वे कस्टम्स (ईडीआई) को एक पत्र और एक वर्ष में किए गए शुल्क भुगतान को प्रदर्शित करने वाली बैलेंस शीट की प्रति के साथ ग्रीन चैनल सुविधा के लिये आवेदन कर सकते हैं।
डंपिंग
डंपिंग तब होती है जब कोई निर्यातक किसी वस्तु को बाजार मूल्य से कम दाम पर भारत को बेचता है। फिर भी डंपिंग निंदनीय नहीं है क्योंकि यह पाया गया है की उत्पादक अपने सामान को विभिन्न बाजारों में अलग अलग दर पर बेचते हैं। हालांकि जब डंपिंग भारतीय उद्योग को कोई खतरा पैदा करता है या नुकसान पहुंचाता है तब सम्बंधित अधिकारी जांच के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू करता है और उसके बाद एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया जाता है।
माल के आयात के समय भारत सरकार द्वारा जारी एंटी डम्पिंग निर्देशों को समझना और उनका अनुपालन करना अत्यंत आवश्यक होता है।
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