भारत में अनेक अधिकरण और संगठन अध्ययन और सर्वेक्षणों का आयोजन करते हैं, साथ ही अर्थव्यवस्था की विविध पहलुओं शामिल करते हुए एक नियमित आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित करते हैं। प्रत्येक अनुसंधान और प्रकाशन देश के एक विशेष खंड पर केन्द्रित होता है तथा इसके निष्पादन और घटनाओं का विश्लेषण करता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सबसे महत्वपूर्ण संगठन है जो अपने वार्षिक, तिमाही, मासिक, साप्ताहिक और यदाकदा होने वाले प्रकाशनों में अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों पर सूचना और आंकड़े प्रकाशित करता है। इनमें शामिल हैं:-
- वार्षिक प्रतिवेदन एक संवैधानिक दस्तावेज़ है जो रिजर्व बैंक के वित्तीय वर्ष (जुलाई से जून) से संबंधित है और इसे हर वर्ष अगस्त माह के अंत में प्रकाशित किया जाता है। यह अर्थव्यवस्था की स्थिति और रिजर्व बैंक के तुलनपत्र पर निदेशक मंडल की ओर से दिया गया एक वक्तव्य है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के एक आकलन और संभावनाओं को भी प्रस्तुत करता है।
- भारत में बैंकिंग के रुझान और प्रगति पर प्रतिवेदन यह भी एक संवैधानिक दस्तावेज है जिसे पिछले वर्ष के दौरान वित्तीय क्षेत्र की नीतियों और निष्पादन की समीक्षा के लिए हर वर्ष प्रकाशित किया जाता है। अप्रैल से मार्च तक अवधि को शामिल करते हुए यह प्रकाशन आमतौर पर नवम्बर/दिसम्बर में जारी किया जाता है।
- मुद्रा और वित्त पर प्रतिवेदन एक वार्षिक दस्तावेज है जो एक विषय वस्तु से संबंधित मुद्दों के विस्तृत आर्थिक विश्लेषण को प्रस्तुत करता है और एक विशेष विषय वस्तु के आसपास घूमता है। यह प्रकाशन दिसम्बर के आसपास जारी किया जाता है अत: यह अर्थव्यवस्था की अर्थवार्षिक समीक्षा प्रस्तुत करने का प्रयोजन भी पूरा करता है।
- भारतीय अर्थव्यवस्था पर सांख्यिकीय हैंडबुक यह एक स्थान पर सांख्यिकीय सूचना के एक उपयोगी भंडार गृह के रूप में कार्य करते हुए आंकड़ा प्रसार में सुधार लाने पर लक्षित रिजर्व बैंक की एक प्रमुख पहल है। यह प्रकाशन आर्थिक परिवर्तियों के साथ राष्ट्रीय आय, आउटपुट, मूल्यों, मुद्रा, बैंकिंग, वित्तीय बाजार, सार्वजनिक वित्त, व्यापार तथा भुगतानों के शेष से संबंधित समय श्रृंखला आंकड़े (वार्षिक/तिमाही/मासिक/पाक्षिक/दैनिक) प्रदान करता है।
- राज्य के वित्त मामले : बजट का एक अध्ययन यह प्रकाशन राज्य सरकारों के वित्त का एक व्यापक वैश्लेषिक आकलन प्रदान करता है।
- बृहत आर्थिक और मौद्रिक विकास यह समीक्षाधीन वर्ष के दौरान बृहत आर्थिक और मौद्रिक विकासों का एक वैश्लेषिक सिंहावलोकन प्रदान करता है। यह प्रकाशन वर्ष के लिए मौद्रिक नीति की एक पृष्ठ भूमि और तर्काधार के रूप में कार्य करता है।
- भारत में बैंकों से संबंधित सांख्यिकीय तालिकाएं यह एक वार्षिक प्रकाशन है जिसमें वाणिज्यिक बैंकिंग क्षेत्र से संबंधित व्यापक आंकड़े दिए जाते हैं। यह प्रकाशन विदेश में पंजीकृत बैंकों सहित भारत के प्रत्येक वाणिज्यिक बैंक के तुलनपत्र की जानकारी और निष्पादन संकेतक प्रदान करता है।
- मूलभूत सांख्यिकीय विवरणी यह एक अन्य आंकड़ा उन्मुख प्रकाशन है जो कार्यालयों, कर्मचारियों, जमा और ऋण पर अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के व्यवसाय के अनुसार संख्या के व्यापक आंकड़े प्रस्तुत करता है।
- आरबीआई बुलेटिन यह एक मासिक प्रकाशन है जो हर माह के पहले सप्ताह में प्रकाशित होता है। यह रिजर्व बैंक द्वारा संग्रह किए गए आंकड़ों के आधार पर विश्लेषक लेख प्रकाशित करता है और इसमें राज्यपाल, उपराज्यपाल तथा कार्यकारी निदेशकों के भाषण दिए जाते हैं। बुलेटिन में शामिल अन्य उपयोगी बातें हैं रिजर्व बैंक के विभिन्न विभागों द्वारा जारी महत्वपूर्ण प्रैस निर्मुक्तियां और परिपत्र तथा अर्थव्यवस्था, वित्त और बैंकिंग से संबंधित आंकड़े।
- साप्ताहिक सांख्यिकीय पूरक यह आरबीआई बुलेटिन का पूरक है जो वित्तीय, वस्तु और बुलियन बाजारों से संबंधित रिजर्व बैंक तथा अन्य विकास का साप्ताहिक तुलनपत्र प्रस्तुत करता है।
वित्त मंत्रालय का 'आर्थिक प्रभाग' इसमें अर्थव्यवस्था के रूझानों का परीक्षण किया जाता है और यह तकनीकी-आर्थिक अध्ययन करता है, जिससे आंतरिक और बाह्य आर्थिक विकास पर एक गहरी नजर रखने में मदद मिलती है। यह मासिक आधार पर चुने हुए आर्थिक सूचक भी जारी करता है और वार्षिक आधार पर आर्थिक सर्वेक्षण तैयार करता है। आर्थिक सर्वेक्षण में एक दिए गए वर्ष के लिए अर्थव्यवस्था में प्रमुख विकासों और रुझानों की समीक्षा की जाती है तथा आने वाले वर्ष के लिए बजटीय और आर्थिक नीतियों को तैयार करने के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत तथा विचार किए जाते हैं।
सांख्यिकीय और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ विश्वसनीय और साखपूर्ण सांख्यिकीय आंकड़ों के प्रसार हेतु एक शीर्ष संगठन है। इस प्रयोजन के लिए मंत्रालय ने ‘सांख्यिकीय स्कंध’ बनाया है जिसमें केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) और राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) शामिल हैं।
केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) यह देश में सांख्यिकीय गतिविधियों के समन्वय तथा सांख्यिकीय मानकों के रखरखाव हेतु उत्तरदायी है। इसकी गतिविधियों में शामिल हैं राष्ट्रीय आय लेखा; उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण आयोजित करना; आर्थिक जनगणना और इसके अनुपालन सर्वेक्षण, औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक का संकलन, शहरी नॉन-मैनुअल कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक।
राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) यह आर्थिक सर्वेक्षण करता है, उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण के लिए क्षेत्र कार्य करता है और आर्थिक जनगणना के अनुपालन सर्वेक्षणकर्ता है, क्षेत्र की गणना पर और फसल आकलन सर्वेक्षणों पर नियंत्रण रखता है तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से मूल्य आंकड़ों के संग्रह के अलावा शहरी नमूने लेने में उपयोगी शहरी रूपरेखा तैयार करता है। एनएसएसओ में चार प्रभाग हैं नामत: सर्वेक्षण डिजाइन और अनुसंधान प्रभाग (एसडीआरडी), क्षेत्र प्रचालन प्रभाग (एफओडी), आंकड़ा प्रक्रमण प्रभाग (डीपीडी) तथा समन्वय एवं प्रकाशन प्रभाग (सीपीडी)।
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