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मूल संरचना राष्‍ट्रीय स्‍तर की मूल संरचना
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राष्‍ट्रीय स्‍तर की मूल संरचना :
विमानन
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भारत का उड्डयन उद्योग घरेलू यात्रियों, कार्गो आवागमन और अंतरराष्‍ट्रीय वायु मार्ग के यातायात में असाधारण वृद्धि के कारण काफी उछाल पर है। भारत का स्‍थान वर्ष 2007 में विश्‍व उड्डयन बाजार में नौवा था जो 2006 में 12वां हो गया। एयरलाइन व्‍यापार भारत में प्रतिवर्ष 27 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। वर्ष 2007 के दौरान घरेलू एयरलाइन यात्री यातायात 32.51 प्रतिशत बढ़ा है। इसके अलावा भारत का नया अंतरराष्‍ट्रीय दर्जा जो इसके सूचना प्रौद्योगिकी और निर्माण केन्‍द्र के कारण है, अंतरराष्‍ट्रीय वायु यातायात की वृद्धि का आधार है।

विमानन क्षेत्रक को हवाई अड्डा और एयरलाइन उद्योग में उप विभाजित किया जा सकता है। सशक्‍त हवाई अड्डा मूल संरचना समग्र परिवहन नेटवर्क का महत्‍वपूर्ण संघटक है और यह प्रत्‍यक्ष रूप से देश के अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्धा में योगदान करता है। यह अर्थव्‍यवस्‍था में विदेशी मुद्रा प्रवाह को भी प्रोत्‍साहित करता है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश की सीमा स्‍वचालित मार्ग पर 49 प्रतिशत और वायु परिवहन सेवाओं में अनिवासी भारतीयों के लिए 100 प्रतिशत तक है जो विदेशी एयरलाइनों द्वारा किसी प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष भागीदारी के अधीन है। इसमें हरित क्षेत्र हवाई अड्डा परियोजनाओं की स्‍थापना के लिए 100 प्रतिशत तक प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश शामिल है।

जहां तक एयरलाइन्‍स का संबंध है, अनेकानेक कंपनियां हैं सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रकों में, जो देश में सवारी परिवहन और कार्गो संचालन प्रदान कर रही है। सार्वजनिक क्षेत्र में ये मुख्‍यत: इस प्रकार हैं एयर इंडिया, एयर इंडिया चार्टर्स लि. और एलाइंस एयर। निजी क्षेत्र में 8 अनुसूचित एयरलाइन (या‍त्री) हैं जो हैं, जैट एयरवेस, सहारा एयरलाइन्‍स, डेकन एविएशन, गो एयरवेस, स्‍पाइस जैट, किंगफिशर एयरलाइन्‍स, पारामाउंट एयरवेस और इंटर ग्‍लोब एविएशन लि. (इंडिगो)। यहां निजी कार्गो अनुसूचित एयरलाइन भी हैं, जिन्‍हें ब्‍लू डार्ट एविएशन लि. कहा जाता है। इसके अलावा 86 कंपनियां है जो गैर अनुसूचित वायु परिवहन प्रचालक अनुमति रखते हैं।

पुन:, अंतरराष्‍ट्रीय सयोजकता बढ़ाने तथा यात्रियों के लिए विदेशी यात्रा सहज उपलब्‍ध कराने के लिए भारत में लगभग 103 देशों के साथ 'वायु सेवा करारनामे (एएसए)' पर हस्‍ताक्षर किए हैं। ये द्विपक्षीय करार दो संविदाकारी पक्षों के बीच हवाई सेवा संचालन के लिए मूल कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं। प्रत्‍येक देश जितनी संख्‍या में उड़ानों का संचालन कर सकता है और जितनी दूरी तक सेवा दी जा सकती है, उनको भी करारों में विनिर्दिष्‍ट किया गया है1

नागर विमान मंत्रालय नोडल प्राधिकरण है, जो देश में नागर विमानन उद्योग के लिए विकास और विनियमन के लिए राष्‍ट्रीय नीतियां और कार्यक्रम बनाने के लिए जिम्‍मेदार है। इसके कार्यों का विस्‍तार हवाई अड्डा सुविधाओं, हवाई यातायात सेवाओं और वायु द्वारा सवारी और माल के आवाजाही का पर्यवेक्षण भी करना है। मंत्रालय के अधीन दो अलग-अलग संगठन क्षेत्रक की निगरानी और इसको विनियमित करते हैं :-

  1. नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) विनियामक निकाय है जो भारत के भीतर आने-जाने की हवाई यातायात सेवाओं और सिविल हवाई विमानन के प्रवर्तन, हवाई सुरक्षा और हवाई योग्‍य मानक के लिए जिम्‍मेदार है। वायुयान अधिनियम,1934; वायुयान अधिनियम,1937; नागर विमानन अपेक्षाएं; और ऐरोनौटिकल सूचना परिपत्र के रूप में होते हैं। इसके अन्‍य कार्यों में निम्‍नलिखित शामिल हैं:-

    • सिविल वायुयान का पंजीकरण;

    • भारत में पंजीकृत सिविल वायुयान के लिए यथा योग्‍य मानकों का निर्माण और ऐसे वायुयानों को प्रमाणपत्र प्रदान करना ;

    • पायलटों, वायुयान इंजीनियरों, उड़ान इंजीनियरों और वायुयान नियंत्रकों को लाइसेंस देना;

    • फ्लाइट क्रू की दक्षता की जांच करते रहना और अन्‍य कार्यरत कार्मिकों की जैसाकि डिस्‍पैचर्स और केबिन क्रू;

    • दुर्घटनाओं/घटनाओं की जांच करना और दुर्घटना से बचाव के उपाय करना;

    • वायुयान अधिनियम वायुयान नियामों और नागर विमानन अपेक्षाओं अंतरराष्‍ट्रीय नागर विमानन संगठन की अपेक्षाओं का पालन करने के लिए संशोधन करना;

    • वायुयान रखरखाव, मरम्‍मत और विनिर्माण संगठनों को अनुमोदित करना;

    • द्विपक्षीय हवाई सेवा करारों सहित हवाई परिवहन से संबंधित मामलों पर, आईसीओ मामलों और नागर विमानन से संबंधित सभी तकनीकी मामलों पर सरकार को परामर्श देना।

  2. नागर विमानन सुरक्षा ब्‍यूरो (बी सी ए एस) देश में नागर विमानन सुरक्षा का विनियामक है। इसकी मुख्‍य जिम्‍मेदारी भारत में अंतरराष्‍ट्रीय और देशीय हवाई अड्डों पर सिविल उड़ानों की सुरक्षा संबंधी मानक और उपाय निर्धारित करना है। इसमें सभी विमानन सुरक्षा से संबंधित क्रियाकलापों की योजना बनाना और उनका समन्‍वयन करना, कार्यात्‍मक आकस्मिकता और संकट प्रबंधन शामिल है। यह भारत के लिए राष्‍ट्रीय विमानन सुरक्षा कार्यक्रम का विकास, रखरखाव, उन्‍नयन और क्रियान्‍वयन करने और इस परिप्रेक्ष्‍य में सभी अंतरराष्‍ट्रीय दायित्‍वों को पूरा करने के लिए उपयुक्‍त प्राधिकरण है। ब्‍यूरो के पास चार बम्‍ब खोजी और निष्क्रिय करने के दस्‍ते हैं जो दिल्‍ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्‍नै अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डों पर अद्यतन जटिलतम उपकरणों जैसे रोबोट, रियल टाइम वीविंग सिस्‍टम (आरटीवीएस) विद्युत स्‍टेथेस्‍कॉप, विस्‍फोटक डिटेक्‍टर आदि से लैस रखे गए हैं।

नागर विमानन मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन निम्‍नलिखित सरकारी क्षेत्रक उपक्रम/कंपनियां/स्‍वायत्‍तशासी निकाय हैं :-

  1. नेशनल एविएशन कंपनी ऑफ इंडिया लि. (एनएसीआईएल) :- यह कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत निगमित एक कंपनी है और यह सुरक्षित, दक्ष, पर्याप्‍त और किफायती तथा उचित रूप से समन्वित अंतरराष्‍ट्रीय वायु परिवहन सेवाएं प्रदान करने का कार्य और दायित्‍व निभाती है। इसकी स्‍थापना एयरइंडिया और इंडियन एयरलाइन्‍स को विलीन कर 2007 में की गई है। इस विलय के परिणाम स्‍वरूप कंपनी का लक्ष्‍य भारत में सबसे बड़ी एयरलाइन का गठन करना है। इस नई एयरलाइन का नाम एयरइंडिया है और इसका लोगो महाराजा है। एनएसीआईएल के कार्य दो प्रचालन परमिट के तहत किए जाते हैं जो हैं एनएसीआईएल-ए और एनएसीआईएल-आई। इसके निम्‍नलिखित पूर्ण स्‍वामित्‍व के संगठन भी है, जिनके नाम है होटल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लि. (एचसीआई), एयर इडिया चार्टर्स लि. (एआईसीएल), एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लि. (एआईईएसएल); एयर इंडिया एयर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लि. (एआईएटीएसएल);तथा एलाइन्स एयर

  2. भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण (ए ए आई) :- का गठन वर्ष 1995 में देश की सतह और आसमान दोनों में सिविल विमानन मूल संरचना के सृजन उन्‍नयन, रखरखाव और प्रबंधन के उद्देश्‍य से किया गया। इसका लक्ष्‍य देश में सक्षम प्रचालन के लिए विश्‍वस्‍तरीय हवाई अड्डा सेवाएं मुहैया कराना है। इसके द्वारा 127 हवाई अड्डों का प्रबंधन किया जाता है, जिसमें 16 अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डे; 8 सीमा शुल्‍क और 79 घरेलू हवाई अड्डे और 24 नागरिक एन्‍क्‍लेवशामिल हैं जो रक्षा एयर फील्‍ड में स्थित हैं।

  3. पवन हंस हेलीकॉप्‍टर लिमिटेड (पीएचएचएल) :- इसकी स्‍थापना वर्ष 1985 में तेल क्षेत्रक को हेलीकॉप्‍टर सहायता सेवाएं मुहैया कराने के लिए देश की राष्‍ट्रीय हेलीकॉप्‍टर कंपनी के रूप में की गई थी इसके कार्य दूरस्‍थ दुर्गम क्षेत्रों और मुश्किल भूभागों में अनुसूचित/गैर - अनुसूचित हेलीकॉप्‍टर सेवाओं का संचालन करने के लिए तथा यात्रा और पर्यटन के लिए चार्टर मुहैया कराने के लिए की गई है। इसमें 35 हैलीकॉप्‍टर के एक संतुलित बेड़े के साथ बेल 206 एल4, बेल 407, दाउ फिन एसए 365 एन और एएस 365 एन 3 तथा एनआई-172 शामिल हैं, जो अनेक प्रकार के कार्यों के लिए सर्वाधिक उपयुक्‍त हैं। यह भारत में एकमात्र विमानन कंपनी हैं जिसे आईएसओ 9001:2000 प्रमाणपत्र इसके समस्‍त कार्यकलापों के लिए दिया गया है।

  4. इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय उड़ान अकादमी (आईजीआरयूए) :- इसकी स्‍थापना सरकार द्वारा नागर विमानन में उड़ान प्रशिक्षण स्‍तर में सुधार लाने और अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तरों का इसी तरह की उन्‍मुखी उड़ान प्रशिक्षण शामिल करने के उद्देश्‍य से की गई है। इसकी स्‍थापना फुरसगंज, रायबरेली, उत्‍तर प्रदेश में की गई है। यह आधुनिक और उन्‍नत तकनीकी वाले प्रशिक्षक, वायुयान, उड़ान अनुरूपक, कम्‍प्‍यूटर आधरित प्रशिक्षण प्रणाली, आधुनिक नेविगेशनल और लैंडिंग आधार के साथ रनवे और अपना स्‍वयं के एयरस्‍पेस से लैस है। इसका संचालन उच्‍च योग्‍यता प्राप्‍त उड़ान और भू-अनुदेशकों द्वारा किया जाता है जिनका विमानन और उड़ान के क्षेत्र में लंबा अनुभव हैं।
  5. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के उदारीकरण के साथ और इसके वैश्विक एकीकरण, निरंतर उन्‍नयन और विमानन क्षेत्रक के आधुनिकीकरण से यह अति महत्‍वपूर्ण हो गया है। तद्नुसार सरकार का वर्तमान नीति संकेंद्रण मौजूदा हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण तथा नए हवाई अड्डों का निर्माण करना है। उदाहरण के लिए दिल्‍ली और मुंबई में स्थित अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अडडों का पुनर्गठन सरकारी निजी भागीदारी के जरिए किया जा रहा है। बैंगलोर और है‍दराबाद में दो हरित पट्टी हवाई अड्डों का क्रियान्‍वयन निर्माण, स्‍वामित्‍व संचालन अंतरण (बीओओटी) आधार पर किया जा रहा है। ए ए आई ने 35 गैर मैट्रो हवाई अड्डों को विश्‍वस्‍तरीय बनाने के लिए वि‍कसित और आधुनिक बनाने का निर्णय लिया है। बेहतर अंतरराष्‍ट्रीय संपर्क सुनिश्चित करने के लिए द्विपक्षीय करारों को सुदृढ़ किया जा रहा है।

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हवाई अड्डा मूल संरचना नीति
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