| अंतरदेशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) एक ईंधन दक्ष और पर्यावरण अनुकूल परिवहन माध्यम है। भारत समृद्ध रूप से नौगम्य जल मार्गों से परिपूर्ण है जिसमें नदियां, नहरें, अप्रवाही जल, संकरी खाड़ी आदि शामिल है। यह आकलन किया गया है कि जल मार्ग का लगभग 14500 किलो मीटर भाग यात्रियों और कार्गो आवागमन के लिए उपयोग किया जा सकता है। लगभग 55 मिलियन टन कार्गो का परिवहन प्रति वर्ष अंतरदेशीय जल परिवहन के रास्ते किया जाता है। परन्तु परिवहन का यह माध्यम केवल कुछ ही राज्यों में महत्वपूर्ण है जो हैं असम, पश्चिम बंगला, बिहार, मुम्बई, गोवा और केरल। यह केवल कुछ सीमित क्षेत्रों में गंगा-भागीरथी-हुगली नदियों में कार्यरत है; ब्रहमपुत्र नदी, बाराक नदी, गोवा में नदियों, केरल में अप्रवाही जल, मुंबई में अंतर्देशीय जल और गोदावरी कृष्णा नदी के डेल्टा क्षेत्र में है।
इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्रक की क्षमता का कम उपयोग किया गया है, क्योंकि अधिकांश नौगम्य जलमार्ग, आपदा ग्रस्त होते है जैसे छिछला पानी सूखे मौसम में नहरों की कम चौड़ाई, नदी घाटी में तलछट भरना और किनारों का क्षय, पर्याप्त मूल संरचना सुविधाओं का अभाव जैसे लदान और बर्थिंग के लिए टर्मिनल और सतही सड़क संपर्क।
इसलिए देश में अंतर्देशीय जल मार्गों की क्षमता का अनुकूलतम विकास करने और बढ़ाने के सरकारी नीति के भाग के रूप में 'भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आई डब्ल्यू ए आई)' की स्थापना 'भारतीय अंतर्देशीय जल मार्ग अधिनियम, 1985' . के तहत की गई है। आई डब्ल्यू ए आई की स्थापना नौवहन और नौका परिवहन और इससे संबंधित मामलों के लिए अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास और विनियमन के लिए की गई है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, 1985 सरकार को राष्ट्रीय जल मार्ग के रूप में नौवहन और नाव परिवहन के लिए सक्षम जलमार्ग की घोषणा करने के लिए प्राधिकृत करता है।
वर्तमान में तीन जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में घोषित किया गया है :-
- राष्ट्रीय जल मार्ग संख्या 1:- इलाहाबाद-हलदिया खण्ड (1620 किलो मीटर) गंगा- भागीरथी-हुगली नदी, जो उ. प्र., बिहार, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल में स्थित है।
- राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 2:- ब्रहमपुत्र नदी का सादिया-धाबरी क्षेत्र (891 कि. मी.) असम में; और
- राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 3:- चम्पाकरा और उद्योग मंडल नहर में साथ-साथ पश्चिमी तट नहर को कोल्लम-कोट्टापुरम क्षेत्र (205 कि.मी.) केरल में।
'अंतर्देशीय जल परिवहन' की घोषणा की गई है। इसमें अनेकानेक राजकोषीय रियायतें और मूल संरचना के विकास और अंतर्देशीय पोतों के स्वामित्व और कार्यचलन में निजी क्षेत्रक की भागीदारी प्रोत्साहित करने के लिए दिशानिर्देश शामिल है। आई डब्ल्यू ए आई को बी ओ टी परियोजनाओं में संयुक्त उद्यम एवं इक्विटी भागीदारी के लिए भी प्राधिकृत किया गया है। |