भारत विश्व में 20वां सबसे बड़ा समुद्री देश है। इसका महत्वपूर्ण लंबी समुद्र तटीय रेखा है जो महत्वपूर्ण नौवहन भाग का कार्य करता है। जो इसे मुख्य समुद्री परिवहन राष्ट्र बना देती है। भारत में समुद्री क्षेत्रक में पत्तन, नौवहन, जहाज निर्माण, और जहाज मरम्मत तथा अंतदेर्शीय जल परिवहन प्रणाली हैं। मात्रा की द़ृष्टि से देश के व्यापार का लगभग 95 प्रतिशत और मूल्य की दृष्टि से 70 प्रतिशत व्यापार समुद्री परिवहन के जरिए किया जाता है। भारत का वर्तमान वैश्विक पण्य वस्तु का शेयर 80 प्रतिशत है, एक सशक्त समुद्री मूल संरचना हमारे आर्थिक विकास की गति, संरचना और पैटर्न में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नौवहन मंत्रालय (डी ओ एस), के अधीन जहाज रानी विभाग, सड़क परिवहन और राजमार्ग एक नोडल संगठन है जिसे इन क्षेत्रों के संबंध में नीतियों का निर्माण और क्रियान्वयन और कार्यक्रम बनाने का कार्य सौंपा गया है। जहाज रानी विभाग की परिकल्पना भारतीय समुद्री परिवहन क्षेत्र को भारत के व्यापार और सुरक्षा हितों की सक्षम तरीके से और आर्थिक दृष्टि से सेवा करने के लिए एकाधिकार ऊंचाई पर ले जाना है। यह देश में समुद्री परिवहन मूलसंरचना के उन्नयन और आधुनिकीकरण के लिए अनेकानेक उपाय कर रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा किया जा सके। ऐसा एक महत्वपूर्ण कदम राष्ट्रीय मेरीटाइन विकास कार्यक्रम (एनएमडीपी)' बनाना जिसमें कुल 387 परियोजनाएं हैं जो पत्तनों व्यापार नौवहन और अंतर्देशीय जल परिवहन के समस्त क्षेत्रों को शामिल करता है। कार्यक्रम का लक्ष्य विशिष्ट मूल संरचना में संकेद्रित को सुसाध्य बनाना और निवेश त्वरित करना है, टॉनेज की अधिप्राप्ति करना और संस्थागत क्षमता निर्माण करना है। इसमें 100,339 करोड़ रुपए के कुल निवेश की परिकल्पना की गई है जिसमें से 55804 करोड़ रुपए मुख्य पत्तनों के लिए है और शेष नौवहन और अंतर्देशीय जल परिवहन क्षेत्रक के लिए है।
कार्यक्रम का लक्ष्य है:-
- पत्तनों में विश्व स्तर की मूल संरचना का सृजन करना।
- भारतीय समुद्री/जल परिवहन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारतीय टन भार को प्रोत्साहित करना
- देशीय व्यापार में अंतर्देशीय जल परिवहन का शेयर प्रोत्साहित करना
- व्यापार को सुसाध्य बनाने के लिए माल के बहुत नोडल परिवहन का संवर्धन करना
- अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ साझेदारी में समुद्री पर्यावरण की रक्षा करना।
उपर्युक्त लक्ष्यों और उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2011-12 तक एक विकास योजना, राष्ट्रीय यातायात की मांगों का मूल्यांकन करने, इस मांग को पूरा करने के लिए अपेक्षित अतिरिक्त क्षमता तथा अपेक्षित निवेश और निधियन के तरीके का मूल्यांकन करने के बाद, तैयार की गई है। इस प्रकार से इस कार्यक्रम के माध्यम से नौवहन विभाग देश की आर्थिक और सामरिक आवश्यकताओं को उन्नत तरीके से पूरा करने के लिए पत्तन, नौवहन और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग सहित भारतीय समुद्री परिवहन/जल परिवहन प्रणाली को सुदृढ़ करना चाहता है।
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