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मूल संरचना राष्‍ट्रीय स्‍तर की मूल संरचना
मूल संरचना राज्‍य स्‍तर की मूल संरचना
   
 
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राज्‍य स्‍तर की मूल संरचना

राज्‍य के समग्र सामाजिक आर्थिक विकास के लिए मजबूत मूल संरचनात्‍मक नींव की चाभी है। यह राज्‍य में अतिरिक्‍त निवेश आकर्षित करने के लिए चुम्‍बक के रूप में कार्य करता है और इस प्रकार से यह अन्‍य राज्‍यों के साथ इसको प्रतिस्‍पर्धी बनाता है। पर्याप्‍त और सक्षम मूल संरचना ढांचा की उपलब्‍धता न केवल त्‍वरित औद्योगिकीकरण का संवर्धन करती है अपितु राज्‍य की जनता की जीवन की गुणवत्‍ता में सुधार लाता है। इस क्षेत्र में रेल, सड़क मार्ग, पत्‍तन, विमानन, विद्युत दूरसंचार आदि शामिल हैं। ऐसी सभी सेवाएं राज्‍य का देश एवं विश्‍व के अन्‍य भागों के साथ जोड़ने के द्वारा पूरे राष्‍ट्र की उन्‍नति और विकास सुनिश्चित करती हैं।

आज से पहले राज्‍य सरकारें अपने स्‍वयं की बजटीय संसाधनों में से संबंधित राज्‍यों में मूल संरचनात्‍मक सुविधाओं का सृजन कर रही थीं जिनका सम्‍पूरण अन्‍य सरकारी एवं अंतरराष्‍ट्रीय एजेंसियों से किया जाता था। परन्‍तु अर्थव्‍यवस्‍था के खुलने से और इसके परिणामस्‍वरूप प्रतिस्‍पर्धा में वृद्धि होने से (देशीय और विदेश दोनों) मूल संरचना विकास और रखरखाव के लिए उपलब्‍ध मूल संरचना में क्षीणता हो गई है। इसलिए राज्‍य सरकारों ने मूल संरचना क्षेत्रक में पूंजी अन्‍तर्वाह आकर्षित करने के सभी प्रयास की है। इस दिशा में सबसे महत्‍वपूर्ण कदम 'सरकारी निजी भागीदारी (पीपीपी)' कार्यक्रम आरंभ करना रहा है। सरकारी निजी भागीदारी का अभिप्राय सरकारी और निजी क्षेत्रक एजेंसियों के बीच दीर्घावधिक संविदात्‍मक भागीदारी से है जो विशिष्‍ट रूप से राज्‍य में मूल संरचना सेवाओं और सुविधाओं के वित्‍त पोषण, डिजाइनिंग क्रियान्‍वयन और संचालन करने के लिए लक्षित हैं। इन सरकारी निजी भागीदारी का उद्देश्‍य उच्‍च व़ृद्धि और स्‍थायी आधार पर इक्विटी प्राप्‍त करने के दोहरे लक्ष्‍य पाने का हैं।

राज्‍य सरकारों ने सरकारी निजी भागीदारी के लिए संपूर्ण दायरे के क्षेत्रकों का चयन किया है जिनमें सड़कें/राजमार्ग, पर्यटन, औद्योगिकी मूल संरचना, नौवहन आदि शामिल हैं। सरकारी निजी भागीदारी का उपयोग करते हुए राज्‍यों द्वारा की गई कुछ मुख्‍य मूल संरचना संबंधी पहलें निम्‍नलिखित हैं:-

  • कर्नाटक :- राज्‍य में क्रियान्‍वयनाधीन मुख्‍य सरकारी निजी भागीदारी परियोजना 'बैंगलोर अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा है। यह देश में पहला हवाई अड्डा है जिसका निर्माण सरकारी निजी भागीदारी मार्ग द्वारा किया जा रहा है। हवाई अड्डा का विकास, भारतीय विमान पत्‍तन प्राधिकरण (एएआई), और कर्नाटक राज्‍य औद्योगिक निवेश और विकास निगम लिमिटेड (केएसआईआईडीसी) और निजी प्रवर्तक (सीमेन्‍स ज्‍युरिख एयरपोर्ट, लारसन और टूब्रो) के संयुक्‍त उद्यम द्वारा किया जा रहा है। ऐसे कुछ अन्‍य परियोजनाएं हैं हुसैन मैंगलोर रेल लाइन जिसकी लागत 310 करोड़ रुपए है (पूरी हुई) ई-सिटी जाने के लिए उठा हुआ एक्‍सप्रेस (600 करोड़ रुपए निर्माणाधीन); आदि।

  • आंध्र प्रदेश :- राज्‍य में मुख्‍य सरकारी निजी भागीदारी परियोजना है ''हैदराबाद अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा जिसका निष्‍पादन बनाओ, अपनाओ चलाओ फॉर्मेट में किया जा रहा है। अन्‍य प्रस्‍तावित सरकारी निजी भागीदारी परियोजनाओं में काकिनादा गहन जल पत्‍तन जो 'चलाओ : अनुरक्षण करो - शेयर और अंतरण करो' के आधार पर विकसित किया जा रहा है; गंगावरम पत्‍तन, निर्माण करो अपनाओ प्रचालन करो और अंतरण करो (बी ओ ओ टी) आधार पर, फैब सिटी, हैदराबाद आउटर रिंग रोड, काकिनादा सेज, एकीकृत व्‍यापार और प्रतिपादन केंद्र, जवाहर लाल नेहरू फार्मा सिटी, हैदराबाद इंटीग्रेटेड ट्रेड एंड एक्‍सपोजीशन सेंटर, हाईटेक सिटी और अनेकानेक जानकारी, आईटी और जैव-प्रौद्योगिकी पार्क।

  • पश्चिम बंगाल :- राज्‍य में मुख्‍य सरकारी निजी भागीदारी पहलें हैं साल्‍ट लेक सिटी सेंटर और हाइलैंड आवासीय परियोजना (संयुक्‍त उद्यम के अधीन)। कल्‍याणी दम-दम एक्‍सप्रेस मार्ग का चार लेन बनाना, पूर्वी मेट्रोपोलिटन बाईपास के साथ-साथ वाटर पार्क सह-मनोरंजन केंद्र तथा परिवहन, रिहायशी, वाणिज्यिक और मनोरंजन/लेजर मूल संरचना, आसनसोल, हावड़ा, दुर्गापुर और कोलकाता में। इसके अतिरिक्‍त कोलकाता शहर के बाहरी किनारे पर आवास परियोजना चल रही है जो गुणवत्‍ता आवास प्रदाय की दृष्टि से सरकारी निजी भागीदारी मॉडल का अच्‍छा उदाहरण है।‍

  • केरल :- राज्य में प्रचालनाधीन मुख्‍य सरकारी निजी भागीदारी पहलें हैं ''त्रिवेंद्रम शहर सड़क सुधार परियोजना और विजिन्‍जम इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट परियोजना पहले में दस सिटी रोड कॉरीडोर और तीन राष्‍ट्रीय राजमार्ग बाई पास जो लगभग 42 कि.मी. का है तथा सामरिक महत्‍व के जंक्‍शन में एक अंडर पास और दो फ्लाई ओवर है। परियोजना का क्रियान्‍वयन 'बनाओ चलाओ अंतरण करो' योजना के तहत अधिवर्षिता आधार पर किया जा रहा है और इसकी कुल लागत 145 करोड़ रुपए अनुमानित है। जबकि दूसरी की योजना भावी पत्‍तन सुविधा के रूप में की गई है जो पूरा होने पर 20 फुट समान यूनिटों के 4.1 मिलियन कंटेनर का संचालन एवं 12,000 टीईयू आकार के पोतों जिनमें कुल बर्थ लंबाई 2860 मीटर होगी, का संचालन करने में समर्थ होगा।

  • मध्‍य प्रदेश :- सड़क क्षेत्रक में यह राज्‍य सरकारी निजी भागीदारी परियोजनाओं में अग्रणी है। इसने बीओटी के तहत 1500 कि.मी. सड़क विकसित किया है। सरकारी निजी भागीदारी के साथ अन्‍य क्षेत्रक हैं जल आपूर्ति, सिटी बाई पास, मोबाइल चिकित्‍सा यूनिट, बस पड़ाव जल आपूर्ति परियोजना मोबाइल चिकित्‍सा यूनिट और विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज)।

  • गुजरात :- वर्ष 1990 के आरंभिक समय में राज्‍य में सरकारी निजी भागीदारी की अभिकल्‍पना की शुरूआत हुई। जब गुजरात समुद्री मार्ग बोर्ड ने पीपावाव पत्‍तन का निर्माण कार्य शुरू किया। तब से (उपलब्‍धता सूचना के अनुसार) इक्‍कीस परियोजनाएं जिनकी लागत राशि 13,672.50 करोड़ रुपए है, निजी क्षेत्रक भागीदारी के जरिए क्रियान्वित की गई है। राज्‍य ने व्‍यवहार्यता अंतर निधियन योजना के तहत अनेकानेक परियोजनाओं का प्रस्‍ताव रख है अर्थात अहमदाबाद बस रैपिड ट्रांजिट सिस्‍टम; राजकोट जामनगर-वादीनगर रोड अहमदाबाद सम्‍मेलन केंद्र, दाहेज सेज, हलोल-गोदरा-शामालजी सड़क को चार लेन बनाना और अहमदाबाद-विरामगाम रोड; आदि।

ऐसे सभी सरकारी निजी भागीदारी परियोजनाओं के लिए राज्‍य सरकार ने सुपारिभाषित विनियामक ढांचा का अभिचिंहांकन किया है। इसमें मूल संरचना सुविधाओं, नियंत्रक प्राधिकरणों प्रक्रियात्‍मक अपेक्षाओं और इन परियोजनाओं के कार्य निष्‍पादन में निजी क्षेत्रकों की संभावना को सुस्‍पष्‍ट रूप से पारिभाषित करने वाले कानूनों का अधिनियमन शामिल है। उदाहारण के लिए आंध्र प्रदेश जैसे राज्‍य ने मूल संरचना प्राधिकरण अधिनियम अधिनियमित किया है जिसका उद्देश्‍य निजी विकास को अनिवार्य प्रशासनिक अनुमोदन हासिल करने में सुकर बनाना और यह मध्‍यवर्ती और राजकोषीय विनियमन के लिए प्रावधानों की व्‍यवस्‍था करता है। इसमें राज्‍य में सभी मूल संरचना क्षेत्र शामिल हैं।

मूल संरचना नीति

बहुत से राज्‍य सरकारों ने मूल संरचना विकास के लिए समन्वित और एकीकृत तरीका अपनाने के उद्देश्‍य से मूल संरचना नीति बनाई है। नीति में मूल संरचना परियोजना के लिए विशिष्‍ट प्रोत्‍साहनों और रियायतों का उल्‍लेख किया गया है, जिनमें मौजूदा सुविधाओं के लिए उन्‍नयन तथा क्षेत्रक में निजी निवेशों को प्रोत्‍साहित करना शामिल है। यह त्‍वरित प्रक्रियात्‍मक ढांचा और पारदर्शी प्रशासनिक सहायता के लिए दिशानिर्देश भी देती है। उदाहरण के लिए:-

  • कर्नाटक राज्‍य के लिए मूल संरचना नीति, लक्ष्‍य मूल संरचना में निजी निवेश का विस्‍तार फैलाव और गहन करना तथा कर्नाटक को देश के मूल संरचना विकास के लिए रोल मॉडल बनाना है। यह नगर विकास, अपशिष्‍ट प्रबंधन, पर्यटन, ऊर्जा, औद्योगिक मूल संरचना, कृषि संबंधी मूल संरचना, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य सेवा आदि के लिए प्रयोज्‍य है।
  • उड़ीसा राज्‍य के लिए मूल संरचना नीति नई परियोजनाओं और अंतर क्षेत्रीय संपर्क को अभिचिंहांकित करने, सरकार की सहायता का रूप/विस्‍तार का निर्णय करने, मंजूरियों और नियमावली के लिए तारीख सीमा का निर्धारण करने आदि के द्वारा मूल संरचना क्षेत्रक में निजी भागीदारी आकर्षित करने हेतु रोड मैप प्रदान करती है।

साथ साथ अनेकानेक राज्‍य सरकारों के व्‍यष्टि मूल संरचना यूनिटों के लिए अलग-अलग नीतियां बनाई हैं। इनमें विद्युत नीति, सड़क नीति, पत्‍तन नीति, परिवहन नीति, टेलीकॉम नीति आदि शामिल हैं। इन नीतियों का लक्ष्‍य प्रतिस्‍पर्धा को बढ़ावा देना, एक उपयुक्‍त विनियामक और संस्‍थागत ढांचा को बढ़ाना तथा संबंधित क्षेत्रक में उपभोक्‍ताओं के हितों की रक्षा है। उदाहरण के लिए:-

  • विद्युत नीतियों की घोषणा संबंधित राज्‍यों में विद्युत क्षेत्रक का त्‍वरित विकास संवर्धित करने की द़ृष्टि से की गई है। साधारणत: उनका उद्देश्‍य हैं:-

    1. विद्युत नीतियों की घोषणा संबंधित राज्‍यों में विद्युत क्षेत्रक का त्‍वरित विकास संवर्धित करने की द़ृष्टि से की गई है। साधारणत: उनका उद्देश्‍य है
    2. नवीकरण और आधुनिकीकरण के जरिए मौजूदा उपकरणों का अनुकूलतम उपयोग प्राप्‍त करना
    3. विद्युत उपयोग के लिए समुचित प्रतिफल दर सुनिश्‍चित करने के लिए प्रशुल्‍क ढांचा को यौक्तिक बनाना
    4. उपयोग के तकनीकीय, प्रबंधकीय और प्रशासनिक पुनर्गठन के जरिए सेवा प्रदाय और क्षमता में सुधार लाना
    5. सक्षम उपयोग और मांग प्रबंधन के जरिए ऊर्जा का संरक्षण करना

  • संबंधित राज्‍यों में पत्‍तन नीतियां पत्‍तनों के विकास के लिए बनाई गई हैं। ऐसी नीतियों के उद्देश्‍य हैं :-

    1. राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार और वाणिज्‍य में राज्‍य के शेयर में वृद्धि करना
    2. राज्‍य में मौजूदा पत्‍तनों के समग्र भार को कम करना और इस प्रकार से बढ़ती यातायात की आवश्‍यकताओं को पूरा करना।
    3. जहाज निर्माण, जहाज मरम्‍मत और ऐसी अन्‍य सुविधाओं को प्रोत्‍साहित करना
    4. मौजूदा और नए पत्‍तन स्‍थानों में निजी क्षेत्रक निवेश आकर्षित करना,आदि।

मूल संरचनात्‍मक विकास निगम

राज्‍य सरकारों ने अनेकानेक एजेंसियों की भी स्‍थापना की हैं। जो राज्‍य विशेष में मूल संरचनात्‍मक सुविधाओं के विकास और अनुरक्षण का ख्‍याल रखती है। उनकी स्‍थापना मूल संरचना क्षेत्र में निधियों के अधिक प्रवाह, निजी क्षेत्रक भागीदारी को प्रोत्‍साहित करने, सभी प्रक्रियात्‍मक विघ्‍नों को दूर करने और इस प्रकार से मूल संरचना परियोजनाओं के क्रियान्‍वयन की गति में व़ृद्धि करने के उद्देश्‍य से की गई है। उदाहरण के लिए :-

  • आंध्र प्रदेश औद्योगिक मूल संरचना निगम लिमिटेड आंध्र प्रदेश राज्‍य में अग्रणी संगठन है जिसका लक्ष्‍य औद्योगिकी क्षेत्रों के विकास द्वारा औद्योगिक मूल संरचना प्रदान करना है। यहां बड़ी परियोजनाओं में मुख्‍य सुविधाकारक है जैसे हैदराबाद में विशेष आर्थिक क्षेत्र, विशाखा औद्योगिकी जालपूर्ति, गंगारवरम पत्‍तन, सम्‍मेलन केंद्र, परावाड़ा में औद्योगिक पार्क और पाशमीलाराम वित्‍तीय जिला हार्डवेयर पार्क। यह सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के लिए नोडल एजेंसी है जैसे विकास केंद्र, निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क और एकीकृत विकास केंद्र।
  • हरियाणा राज्‍य औद्योगिक और मूल संरचना विकास निगम लिमिटेड (एचएसआईआईडीसी) की स्‍थापना हरियाणा की सरकार द्वारा संस्‍थागत उद्यमी के रूप में, मूल संरचनात्‍मक विकास सहित राज्‍य में औद्योगीकरण की गति संवर्धन और त्‍वरित करने के लिए एक वित्‍तीय संस्‍था के रूप में की गई है।
  • गुजरात मूल संरचना विकास बोर्ड (सीआईडीबी) की स्‍थापना गुजरात की सरकार द्वारा मूल संरचना क्षेत्रक में पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए, विभिन्‍न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्‍वयन सुनिश्चित करने तथा राज्‍य में निजी क्षेत्रक की भागीदारी लाने के लिए की गई है। यह मूल संरचना परियोजनाओं को अभिचिंहांकित और तैयार करता है, व्‍यवहार्यता अध्‍ययन करता; जोखिम शेयरिंग प्रक्रम की सिफारिश करता और ऐसी परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी करता है।
  • महाराष्‍ट्र राज्‍य सड़क विकास निगम लिमिटेड की स्‍थापना महाराष्‍ट्र की सरकार द्वारा निजी क्षेत्रकों की सक्रिया भागीदारी से मौजूदा और नई परियोजनाओं को पूरा होने का पर्यवेक्षण करने द्वारा राज्‍य में परिवहन मूल संरचना सुविधाओं का विकास त्‍वरित करने के लिए की गई है।
  • पंजाब मूल संरचना विकास बोर्ड की स्‍थापना पंजाब की सरकार द्वारा मूल संरचना क्षेत्रक की समग्र योजना के लिए जिम्‍मेदार शीर्ष निकाय के रूप में की गई है जिसमें परियोजनाओं का क्रियान्‍वयन और नीतियों का निर्माण आदि शामिल है।

इस प्रकार से प्रत्‍येक राज्‍य मूल संरचनात्‍मक सुविधाओं की दृष्टि से अपनी क्षमता उन्‍नयन और सुदृढ करने के लिए अनेकानेक कदम उठाया गया है। बदले में यह राज्‍य में अधिकाधिक निवेश आकर्षित करेगा और वैश्विक मंच पर भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की प्रतिस्‍पर्धात्‍मकता को बनाए रखने में सहायता करेगा।.

^ ऊपर

भारत में सरकारी निजी भागीदारी
राज्‍यों में सरकारी निजी भागीदारी पहलें
महाराष्‍ट्र सरकार
पंजाब सरकार
आंध्र प्रदेश सरकार
गुजरात सरकार
हरियाणा सरकार
भारत के राज्‍यों का प्रोफाइल
राज्‍यों में सरकारी निजी भागीदारी नोडल अधिकारी।
 
 
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