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नवाचार और व्‍यापार
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नवाचार और व्‍यापार
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सरकारी सहायता:
योजनाएं और प्रोत्‍साहन
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समय समय पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा अनेक योजनाएं और प्रोत्‍साहन प्रदान किए जाते हैं जो केन्‍द्रीय स्‍तर का प्राधिकरण है, तथा इसके साथ राज्‍य सरकार द्वारा भी प्रयास किए जाते हैं। ये योजनाएं मुख्‍यत: देश में सशक्‍त विज्ञान और प्रौद्योगिकी मूलसंरचना बनाने पर लक्षित हैं, जिन से नवाचार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने, प्रौद्योगिकी वाणिज्‍यीकरण को प्रोत्‍साहन देने और इस प्रकार देश के लोगों की आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को बेहतर बनाने में सहायता दी जा सकती है।

इस दिशा में की गई मुख्‍य पहलों में से एक है प्रौद्योगिकी प्रवर्तन, विकास और उपयोगिता (टीडीपीयू) कार्यक्रम जो देश में प्रौद्योगिकी विकास तथा औद्योगिक अनुसंधान पर लक्षित होने के अलावा अर्थव्‍यवस्‍था के विभिन्‍न क्षेत्रों जैसे उद्योग, शैक्षिक, वैज्ञानिक संस्‍थान एवं बड़े पैमाने पर समाज, द्वारा इसके उपयोग को प्रोत्‍साहन देता है। इस योजना के तहत किए जाने वाले कार्यक्रम और गतिविधियां औद्योगिक अनुसंधान तथा विकास, प्रौद्योगिकियों के विकास एवं वाणिज्यीकरण, अधिग्रहण, प्रौद्योगिकियों के प्रबंधन तथा निर्यात, परामर्श दक्षताओं के प्रोत्‍साहन आदि के आस पास केन्द्रित हैं।

टीडीपीयू कार्यक्रम के तहत एक महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम घटक ''प्रौद्योगिकी विकास और नवाचार कार्यक्रम'' है, जिसका लक्ष्‍य देश में प्रौद्योगिकियों का विकास और नवाचार को प्रोत्‍साहन देना है। टीडीआईपी को 2 कार्यक्रमों में उप विभाजित किया गया है, जो हैं :-

  1. प्रौद्योगिकी विकास और प्रदर्शन कार्यक्रम (टीडीडीपी) - इसे पहले ''प्रौद्योगिकीय आत्‍म निर्भरता पर लक्षित कार्यक्रम'' (पीएटीएसईआर) के नाम से जाना जाता था। यह वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की एक योजना है जो स्‍वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास तथा प्रदर्शन में उद्योग के प्रयासों को प्रोत्‍साहन देने, पूंजीगत वस्‍तुओं के विकास एवं आयायित प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर लक्षित है। इसका अर्थ है इसके व्‍यापक उद्देश्‍य औद्योगिक वृद्धि में आत्‍मनिर्भरता अर्जित करने पर केन्द्रित हैं:-

    • प्रौद्योगिकी को अपनाने, इसके विकास और प्रदर्शन हेतु उद्योग को समर्थन देना।
    • समकालीन उत्‍पादों एवं उच्‍च प्रभाव की प्रक्रिया के विकास तथा वाणिज्‍यीकरण के लिए स्‍वदेशी क्षमताओं का निर्माण।
    • उद्योग के साथ संयुक्‍त परियोजनाओं में राष्‍ट्रीय अनुसंधान संगठनों को शामिल करना।
    • चुने हुए क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी का मूल्‍यांकन।


    इन उद्देश्‍यों की प्राप्ति के लिए डीएसआईआर द्वारा निम्‍नलिखित क्षेत्रों में उद्योग द्वारा प्रस्‍तावित अनुसंधान, विकास, डिजाइन और अभियांत्रिकी (आरडीडीई) परियोजनाओं को चुने हुए आधार पर आंशिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है:

    • नए या उन्‍नत उत्‍पादों का विकास और प्रदर्शन तथा प्रक्रम प्रौद्योगिकियां, जिनमें घेरलू और निर्यात बाजारों के लिए विशेष पूंजीगत वस्‍तुएं शामिल है।
    • आयातित प्रौद्योगिकी की को अपनाना और उन्‍नयन करना।


    डीएसआईआर द्वारा आंशिक वित्तीय सहायता प्रोटोटाइप विकास और प्रायोगिक संयंत्र कार्य तथा इन अनुसंधान और विकासों से उत्‍पन्‍न उत्‍पादों के परीक्षण तथा मूल्‍यांकन आदि के साथ प्रयोक्‍ता आजमाइश में शामिल व्‍यय के लिए प्रदान की जाती है। इन परियोजनाओं के व्‍यय का अधिकांश भाग उद्योग के संसाधनों से आता है।

    आम तौर पर आरडीडीई परियोजनाओं के लिए निम्‍न लिखित प्रकारों के प्रस्‍तावों को आंशिक वित्तीय सहायता के लिए विचार में लिया जाता है :

    • औद्योगिक फर्मों की आंतरिक अनुसंधान एवं विकास इकाइयों द्वारा एक मात्र रूप से ली गई परियोजनाएं।
    • उद्योग तथा राष्‍ट्रीय अनुसंधान एवं विकास संगठनों तथा संस्‍थानों द्वारा संयुक्‍त रूप से ली गई परियोजनाएं।
    • संबंधित क्षेत्र, हिस्‍से के सामान्‍य हित में स‍हयोगात्‍मक परियोजनाएं, जिन्‍हें उद्योगों / प्रयोक्‍ताओं, राष्‍ट्रीय अनुसंधान संगठनों आदि के समूह द्वारा प्रस्‍तावित किया गया हो।
    • इन परियोजनाओं में विभिन्‍न महत्‍वपूर्ण उद्योगों के उत्‍पाद और प्रक्रम शामिल हो सकते हैं, जैसे कि धातु कर्म, विद्युत, इलेक्‍ट्रॉनिकी, इंस्‍ट्रुमेंटेशन, यांत्रिक अभियांत्रिकी, अर्थ मूविंग और औद्योगिक मशीनरी, रसायन तथा विस्‍फोटक आदि।


  2. तकनीक उद्यमी प्रोत्‍साहन कार्यक्रम (टीईपीपी) की शुरूआत भारत के नागरिकों की अपार नवाचारी संभाव्‍यता के दोहन हेतु की गई थी। टीईपीपी व्‍यक्तिगत स्‍तर पर कार्य करने वाले नवाचारियों को प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमी (तकनीक उद्यमी) बनने में प्रोत्‍साहन देने की एक प्रक्रिया है। इस प्रकार इसके मुख्‍य उद्देश्‍य निम्‍नलिखित हैं:-

    • अलग अलग नवाचारियों की अदोहित रचनात्‍मकता को प्रोत्‍साहन और समर्थन देना।
    • प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमी बनने के लिए अलग अलग अन्‍वेषकों को सहायता देना।
    • वाणिज्‍यीकरण के‍ लिए तकनीक उद्यमियों हेतु नवाचार की श्रृंखला के अन्‍य घटकों के साथ नेटवर्किंग और सह संबंध बनाने में सहायता देना।


    टीईपीपी के जरिए गतिविधियों में चुने हुए और छांटे गए वैयक्तिक अन्‍वेषकों को वित्तीय सहायता देना शामिल है जिनका मूल विचार इन्‍हें कार्यशील मॉडल, प्रोटोटाइप आदि में रूपांतरित करने का है। टीईपीपी की सहायता निम्‍नलिखित के व्‍ययों को पूरा करने के लिए नवाचारियों को प्रदान की जाती है :

    • अनुसंधान और विकास / अभियांत्रिकी परामर्श
    • छोटे उपकरणों, पुर्जों आदि के प्रापण की आवश्‍यकता
    • कच्‍ची सामग्रियां, सहायक सामग्रियां (प्रोटोटाइप / प्रक्रम परीक्षण के लिए)
    • निर्माण की लागत (प्रोटोटाइप के लिए)
    • पेटेंट मार्गदर्शन और सहायता
    • जनशक्ति
    • परीक्षण और आजमाइश
    • अन्‍य कोई संगत लागतें


    टीईपीपी द्वारा परियोजना के कुल मूल्‍य की 90 प्रतिशत सीमित राशि की सहायता दी जाती है और शेष 10 प्रतिशत राशि अन्‍वेषक / नवाचारी को देनी होती है।

    पुन:, 'अनुसंधान को प्रोत्‍साहन देने के लिए विज्ञान की उत्‍कृष्‍टता का नवाचार (आईएनएसपीआईआरई)' एक अन्‍य नवाचारी कार्यक्रम है जो विज्ञान में प्रतिभा‍ओं को आकर्षित करने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रतावित किया गया है। इस कार्यक्रम का मूलभूत उद्देश्‍य देश की युवा जनता के साथ संपर्क करना है जो विज्ञान की खोज में रचनात्‍मकता के लिए उत्‍साहित हैं और आरंभिक अवस्‍था पर ही विज्ञान के अध्‍ययन के लिए प्रतिभाओं को आकर्षित करना एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रणाली तथा अनुसंधान और विकास आधार के सुदृढ़ीकरण तथा विस्‍तार के लिए महत्‍वपूर्ण मानव संसाधन समूह का निर्माण करना है। आईएनएसपीआईआरई योजना में तीन घटक हैं। ये हैं : (i) विज्ञान की प्रतिभा के लिए शीघ्र आकर्षण की योजना (एसईएटीएस); (ii) उच्‍च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति (एसएचई); और (iii) अनुसंधान केरियर के लिए आश्‍वस्‍त अवसर।

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