विज्ञापन और प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के समग्र विकास और नवाचारी प्रक्रिया के प्रोत्साहन हेतु केन्द्रीय प्राधिकरण हैं।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) मंत्रालय में देश के विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संबंधी कार्यों के आयोजन, समन्वय और प्रोत्साहन के लिए नोडल विभाग है। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए मुख्य सार्वजनिक नीति समर्थन निकाय है। यहां देश के अनुसंधान और विकास आधार को सशक्त बनाने में एक भूमिका निभाई जाती है। यह देश में अनुसंधान परियोजनाओं की लगभग 50 प्रतिशत बाह्य निधिकरण व्यवस्था के साथ मूलभूत विज्ञान को प्रोत्साहन देने वाली देश की प्रमुख एजेंसी भी है। यह विभाग मुख्य क्षेत्रों और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विकास को लोकप्रिय बनाना, विज्ञान को समाज के साथ जोड़ना, उद्यम शीलता को प्रोत्साहन, राष्ट्रीय संसाधन आंकड़ा प्रबंधन और डेटा बेस का उत्पादन तथा विभाग द्वारा योजना बद्ध हस्तक्षेपों के लिए फोकस के महत्वपूर्ण क्षेत्रों से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों द्वारा महिलाओं के सशक्तीकरण पर लक्षित पहलों को आगे बढ़ाने का कार्य करता है। विभाग राज्यों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास तथा प्रोत्साहन में सक्रिय रूप से संलग्न होने के साथ ज्ञान आधारित प्रौद्योगिकी से प्रेरित उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी उद्यमशीलता को भी प्रोत्साहन देता है। यह मूलभूत अनुसंधान, प्रौद्योगिकी पूर्वानुमान, प्रयोगशाला प्रत्यायन और विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में संलग्न स्वायत्त संस्थानों की एक श्रृंखला को भी समर्थन देता है। इन संस्थानों के परिणामी संकेतक निवेश और परिणाम के बीच एक सशक्त सह संबंध प्रकट करते हैं। विभाग के अधीन दो उप विभाग हैं जिनके नाम हैं भारतीय सर्वेक्षण और राष्ट्रीय एटलस तथा थिमेटिक मानचित्रण संगठन (एनएटीएमओ)।
डीएसटी ने बुनियादी स्तर के नवाचारों को समर्थन, वृद्धि के लिए सहायता, स्थायी बनाने और उच्च स्तरीय बनाने के लिए संस्थागत समर्थन प्रदान करने के मुख्य लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन (एनआईएफ) की स्थापना की है और साथ ही यह स्वयं सहायता की गतिविधियों में भी सहायता देता है। एनआईएफ इस लक्ष्य को पाने के लिए मधुमक्खी के घर के समान नेटवर्क और इसके सहयोगी भागीदारों के बीच संपर्क स्थापित करता है। यह नेटवर्क और अनुसंधान का समाज तथा स्थायी प्रौद्योगिकी एवं संस्थानों हेतु पहल (स़ृष्टि) के माध्यम से किसानों, दस्तकारों, महिलाओं आदि द्वारा बुनियादी स्तर पर किए गए नवाचारों को समर्थन दिया जाता है। सृष्टि द्वारा संग्रह और प्रलेखित किए गए 10,000 नवाचारों का एक डेटाबेस राष्ट्रीय नवाचार रजिस्टर का एक हिस्सा होगा और इसका प्रबंधन तथा सहायता का कार्य एनआईएफ द्वारा किया जाएगा।
एनआईएफ के प्राथमिक उद्देश्य इस प्रकार हैं :
- भारत को एक नवाचारी और रचनात्मक समाज बनाने में सहायता देना और इसे नवाचारों को बुनियादी स्तर पर फलने फूलने, आगे बढ़ने में सहायता देकर स्थायी प्रौद्योगिकी का वैश्विक नेता बनाने में मदद करना।
- एक चुने हुए, समयबद्ध और मिशन उन्मुख आधार पर हरित बुनियादी नवाचारों का विकास और फैलाव सुनिश्चित करना ताकि समाज की सामाजिक - आर्थिक और पर्यावरण संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सके।
- बुनियादी स्तर पर हरित नवाचारों को फलने फूलने, आगे बढ़ने और स्थायी बनाने में संस्थागत समर्थन प्रदान करना तथा असाधारण पारंपरिक ज्ञान को बनाए रखना एवं स्वयं समर्थन गतिविधियों तक इनके संक्रमण में सहायता देना।
- औपचारिक वैज्ञानिक प्रणालियों तथा अनौपचारिक ज्ञान प्रणालियों में उत्कृष्टता के बीच सह संबंध निर्मित करना और सूचना प्रौद्योगिकी तथा अन्य साधनों के अनुप्रयोग से विभिन्न पणधारियों के बीच ज्ञान का नेटवर्क स्थापित करना आदि।
बुनियादी स्तर के नवाचारों को आगे बढ़ने, कार्य सौंपने और परिपक्वन का उद्देश्य पूरा करने के लिए एनआईएफ ने उद्यम विकास मॉडलों पर नवाचार के निष्पादन हेतु 5 समर्पित विभागों का गठन किया है:-
- समर्थन और प्रलेखन
- व्यापार विकास और सूक्ष्म उद्यम
- मूल्य वर्धन और अनुसंधान तथा विकास
- बौद्धिक संपत्ति प्रबंधन
- सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधन और प्रसार
विज्ञापन और प्रौद्योगिकी मंत्रालय का एक अन्य मुख्य विभाग वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) है जिसे स्वदेशी प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन, विकास, उपयोगिता और अंतरण से संबंधित गतिविधियां करने का अधिदेश है। डीएसआईआर का प्राथमिक प्रयास उद्योगों द्वारा अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन देना, छोटे ओर मध्यम दर्जे की औद्योगिक इकाइयों के एक बड़े वर्ग को सहायता देना ताकि वे उच्च वाणिज्यिक संभाव्यता की आधुनिकतम वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्द्धी प्रौद्योगिकियों को विकसित कर सके, प्रयोगशाला स्तर के अनुसंधान और विकास के तीव्र वाणिज्यीकरण को उत्प्रेरित कर सकें, समग्र निर्यातों में प्रौद्योगिकी संघन निर्यातों की भागीदारी को बढ़ा सके, औद्योगिक परामर्श और प्रौद्योगिकी प्रबंधन दक्षताओं को सुदृढ़ बना सकें और साथ ही देश में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान की सुविधा प्रदान करने के लिए प्रयोक्ता अनुकूल सूचना नेटवर्क स्थापित कर सकें।यह वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं तथा औद्योगिक प्रतिष्ठानों के बीच राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एनआरडीसी) के माध्यम से प्रौद्योगिकियों के अंतरण के लिए एक संबंध भी विकसित करता है। यह केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स लि. (सीईएल) के माध्यम से अनुसंधान और विकास में निवेश की सुविधा प्रदान करना है। इसके दो स्वायत्त संगठन वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और परामर्श विकास केन्द्र हैं।
अत: डीएसआईआर को स्थापित करने के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:-
- उद्योग में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन देना।
- राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं / संस्थानों तथा उद्योग में तकनीकी कार्मिकों की प्रौद्योगिकी दक्षताओं का विकास करना।
- उद्योग में प्रौद्योगिकी विकास और प्रबंधन को प्रोत्साहन देना।
- मूल विचारों को प्रोत्साहन देने के लिए वैयक्तिक नवाचारियों की सहायता करना और इन्हें कार्य योग्य प्रक्रियाओं / प्रोटोटाइप में रूपांतरित करना।
- राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और राष्ट्रीय संस्थानों के साथ प्रौद्योगिकी विकास के लिए औद्योगिक परियोजनाओं के संघ को प्रोत्साहन देना।
- विभाग के कार्यक्रमों और योजनाओं के जरिए सरकार की पहलों को व्यापक प्रचार देना।