निवेशकों को मुख्य रूप से वित्तीय सहायता और अपने नवाचारों के विपणन के क्षेत्रों में समस्याओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दूसरे शब्दों में इसमें निम्नलिखित तथ्य शामिल होते हैं:
- सही प्रकार के निधिकरण को प्राप्त करना नवाचार प्रदान करने की कुंजी है। निवेशकों के बीच प्रचलित असमानता को समाप्त करने की आवश्यकता है। पूंजी जोखिम के साथ प्रारंभिक अवस्था के नवाचारों को समर्थन देने के लिए निधिकरण प्रणालियों की आवश्यकता है। साथ ही गैर लाभकारी नवाचारी से बाहर निकलने के लिए भी प्रावधान बनाए जाने चाहिए।
- संसाधनों के पर्याप्त निवेश के व्यय पर तैयार किए गए नवाचार हेतु बौद्धिक संपदा अधिकार कार्यव्यवस्था के तालमेल की जरूरत होती है।
- आईपीआर की सुरक्षा के लिए कानूनी रूपरेखा उपलब्ध है किन्तु भारत में आईपीआर को बनाए रखने और संरक्षित करने की मूलसंरचना अभी विकसित हो रही है।
- नए मार्ग, कार्यक्रम तथा नीतियां भारत की नवाचार संभाव्यता को उभारने के लिए अनिवार्य हैं।
- प्रतिस्पर्द्धी नवाचार समूह एक सफल वैश्विक संकल्पना के रूप में उभरें हैं, जिसमें शिक्षा जगत, अनुसंधान और उद्योग के भागीदार एक व्यवहार्य और साम्यपूर्ण पैटर्न पर आगे आए हैं।
असफल रहने वाले नवाचार में आम तौर पर अच्छे विचार निहित होते हैं किन्तु इन्हें बजट की सीमाओं, कौशलों की कमी या वर्तमान लक्ष्यों के साथ फिट न बैठने के कारण अस्वीकार या स्थगित किया जाता है। असफलताओं को पहचाना जाना चाहिए और जितना शीघ्र संभव हो प्रक्रिया में इनकी छानबीन की जानी चाहिए। शीघ्र छानबीन से अनुपयुक्त विचारों को टाला जा सकता है और कम संसाधनों का लाभ उठाया जा सकता है, जिन्हें अधिक लाभ की प्रगति के लिए आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। जबकि सीखना महत्वपूर्ण है, नवाचार की प्रक्रिया के जरिए उच्च असफलता दरें व्यर्थ जाती है।
असफलता के कारणों पर व्यापक अनुसंधान किया गया है और ये काफी भिन्न होते हैं। इसके कुछ कारण बाहरी और अन्य अंदरुनी कारण हैं। अंदरुनी कारणों की असफलता नवाचार प्रक्रिया के साथ ही जुड़ी होती है। असफलता के सामान्य कारण जो अधिकांश संगठनों में नवाचार प्रक्रिया के अंदर ही होते हैं, इन्हें 5 प्रकारों में बांटा जा सकता हैं :
- लक्ष्य की दुर्बल परिभाषा
- लक्ष्यों के प्रति कार्य का दुर्बल मानचित्र
- दलों में दुर्बल भागीदारी
- परिणामों की दुर्बल निगरानी
- संचार और सूचना की अधिगम्यता में दुर्बलता होना
नवाचार के पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए नीति क्षेत्रों की एक व्यापक परास में प्रभावी और दक्ष रूपरेखा की आवश्यकता होती है, एक समेकित मार्ग का आव्हान करना होता है तथा व्यापार, सरकार और समाज के बीच समन्वय भी आवश्यक है।