केन्द्रीय और राज्य सरकारों की ओर से निरंतर प्रयास करने की जरूरत है ताकि भारत में विभिन्न नवाचारों का विकास और प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन दिया जा सके तथा इन्हें विश्व भर के बाजारों में फैलाया जा सके। भारत में इसके लिए उत्तरदायी केन्द्रीय प्राधिकरण 'विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय' हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और विज्ञान तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) दो नोडल एजेंसियां हैं जो देश में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी (एस एण्ड टी) गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए तथा इस दिशा में आविष्कारकों / उद्यमियों को समर्थन देने के लिए उत्तरदायी हैं। राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन (एनआईएफ) की स्थापना भारतीय आविष्कारकों को पर्याप्त संस्थागत सहायता देकर प्रोत्साहन देने हेतु की गई है।
इन केन्द्रीय एजेंसियों के साथ राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों के प्रयासों से अनेक नीतिगत पहले और उपाय किए गए हैं तथा अनेक योजनाओं तथा कार्यक्रमों की घोषणा की गई है ताकि देश में नवाचार और अनुसंधान तथा विकास को प्रोत्साहन दिया जा सके। इनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं : प्रौद्योगिकी प्रवर्तन, विकास और उपयोगिता (टीडीपीयू) कार्यक्रम, प्रौद्योगिकी विकास और नवाचार कार्यक्रम (टीडीआईपी), विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी (एस एण्ड टी) नीति, राष्ट्रीय नवाचार अधिनियम, 2008 आदि। ये सभी प्रोत्साहन भारतीय अर्थ व्यवस्था की आर्थिक वृद्धि को तेज करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने पर लक्षित हैं।
^ ऊपर