विमानन किसी देश के समग्र आर्थिक ढांचे का एक अभिन्न अंग है। यह यात्रा और पर्यटन के सृजन के साथ संपूर्ण राष्ट्र के समेकन में प्रमुख भूमिका निभाता है। भारत में विमानन क्षेत्र ने देश में यात्री यातायात और कार्गो कार्य सेवाएं प्रदान करने में बड़ी संख्या में कंपनियों के साथ ही हाल के वर्षों में उल्लेखीय वृद्धि को दर्शाता है। इसमें घरेलू यात्री वाहक, कार्गो संचलन और अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात में तेजी प्रदान की है। उदाहरण के लिए अप्रैल-जनवरी (वर्ष 2006-07) के आंकड़ों की उसी अवधि के वर्ष 2005-06 में आंकड़ों की तुलना में लगभग 78.7 मिलियन हवाई मार्ग लेने वाली यात्री, 57.5 मिलियन के लगभग घरेलू हवाई मार्ग लेने वाले यात्री जिसमें 40.5 प्रतिशत की वृद्धि जाहिर होती है; और अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग लेने वाले लगभग 21.2 मिलियन यात्रियों के साथ अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्री ट्रैफिक में 15 प्रतिशत वृद्धि के साथ कुल हवाई यात्री ट्रैफिक में 32.6 प्रतिशत वृद्धि हुई।
भारत में नागर विमानन
मंत्रालय राष्ट्रीय नीतियों और कार्यक्रमों को बनाने; नागरिक हवाई परिवहन की व्यवस्थित वृद्धि और विस्तार के लिए स्कीमें बनाने और कार्यान्वित करने के माध्यम से नागर विमानन क्षेत्र के विकास और विनियमन के उत्तरदायी नोडल मंत्रालय है। इसके कार्यों का विस्तार विमान पत्तन सुविधाओं, हवाई यातायात सेवाओं, विमान द्वारा यात्रियों और माल के परिवहन की निगरानी; हवाई अड्डों, हवाई परिवहन, पायलेटों और विमान अनुरक्षण अभियन्ताओं को लाइसेंस प्रदान करने आदि तक भी है।
इसके अलावा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) सुरक्षित और कुशल हवाई यातायात सेवाएं प्रदान करने; रनवे, टैक्सीवे, टर्मिनल भवन आदि की योजना, विकास, निर्माण और अनुरक्षण प्रदान करने के लिए उत्तरदायी है। यह 15 अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तनों, 87 घरेलू विमानपत्तनों और रक्षा एयरफील्ड में 25 नागरिक एन्क्लेवों सहित कुल 127 विमान पत्तनों का प्रबंधन करता है। यह प्रकार यह 2.8 मिलियन मील वर्ग के संपूर्ण भारतीय अंतरिक्ष का नियंत्रण और प्रबंध करता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के अनुरूप नागरिक विमानन क्षेत्र को इसके विभिन्न भागों में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए सफलतापूर्वक खोला भी गया है। सबसे महत्वपूर्ण कदम विमान पत्तनों का पुनरुद्धार और आधुनिकीकरण के साथ साथ नए ग्रीनफील्ड विमान पत्तनों की स्थापना करना है। सरकार ने सार्वजनिक निजी भागीदारी में संयुक्त उद्यम तरीके से दिल्ली और मुंबई के दो अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तनों के पुनर्निर्माण को अंतिम रूप दिया है। सार्वजनिक - निजी भागीदारी के साथ बैंगलोर और हैदराबाद में दो ग्रीनफील्ड विमान पत्तन परियोजनाओं को निर्माण स्वामित्व संचालन हस्तांतरण (बीओओटी) आधार पर कार्यान्वित किया जा रहा है।
साथ ही मंत्रालय द्वारा उठाए गए बहुत से नीतिगत उपायों और पहलों ने इस क्षेत्र में निवेश के लिए विभिन्न अवसर और प्रोत्साहन प्रदान किए हैं। 'नागर विमानन नीति' का उद्देश्य प्रतिस्पर्धात्मक नागर विमानन वातावरण बनाना है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करता है; हवाई परिवहन की कुशल लागत-प्रभावी और व्यवस्थित वृद्धि को बढ़ावा देता है; और देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान देता है।
इसी तरह से 'विमान पत्तन मूल संरचना पर नीति' बनाई गई है ताकि विमान पत्तन मूल संरचना के उपयोग और विकास को विनियमित किया जा सके। उक्त नीति के उद्देश्य हैं :-
- हवाई यातायात की बढ़ती हुई संख्या से निपटने के लिए मांग से पहले विमान पत्तन क्षमता प्रदान करना और क्षेत्र में यातायात के अधिकतम भाग को संचित करना;
- आधुनिकतम हवाई यातायात, सुरक्षा और संबद्ध सेवाओं के प्रचालन द्वारा विमान के संकार्यों की संपूर्ण संरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करना;
- निजी पूंजीगत और प्रबंधन कुशलता के प्रचालन के माध्यम से विमान पत्तनों के संकार्य में संसाधन अंतर को पाटना और व्यापक क्षमता और उद्यम को प्रोत्साहित करना;
- मूल संरचना सुविधाओं की आर्थिक क्षमता की आवश्यकता और न्यायसंगत क्षेत्रीय फैलाव के उद्देश्य के बीच संतुलन बनाते हुए एक सुदृढ़ विमान पत्तन मूल संरचना के विकास को बढ़ावा देना; आदि
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