बिहार देश के पूर्वी भाग में अवस्थित है। इसका क्षेत्रफल 94,163 वर्ग कि.मी. है। यह उत्तरी अक्षांश के 21 डिग्री 58’10”से 27 डिग्री 31’15”और पूर्वी देशांतर के 82 डिग्री 19’50”से 88 डिग्री 17’40”के बीच अवस्थित है । इसकी उत्तरी सीमा पर नेपाल है, पूर्व में पश्चिमी बंगाल है, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण में झारखण्ड है। इसमें कई नदियां हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण गंगा है। अन्य नदियां हैं सोन, पुनपुन, फल्गु, कर्मनाशा, दुर्गावती, कोसी, गण्डक, घाघरा इत्यादि । चूकि यह उष्ण कटिबंधीय से उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में पड़ता है, अत: वनस्पतियों की प्रकृति का निर्धारण करने में वर्षा एक महत्वपूर्ण कारक है। बिहार की स्थलाकृति का सहज वर्णन गंगा घाटी में अवस्थित एक उपजाऊ कछारी मैदान के रूप में किया जा सकता है। मैदान उत्तर में हिमालय की निचली पहाडियों से प्रारम्भ होकर गंगा नदी के दक्षिण में कुछ मीलों तक हैं। समृद्ध कृषि क्षेत्र और बहुतायत में फलोद्यान पूरे राज्य में फैले हुए हैं।
बिहार हमेशा से आकर्षक आर्थिक अवसरों की भूमि रही है। यह सेलखड़ी, माक्षिक (पाइराइट्स), क्वार्टजाइट, कच्चा अबरक, चूना पत्थर इत्यादि जैसी स्पृहणीय खनिज संपदा से संपन्न है। इसके ऋतु आधारित भरपूर कृषि संसाधन और हरित क्रांति की उपलब्धियों के आधार पर यह राज्य धान, गेहूं, गन्ना, दाल, जूट इत्यादि जैसे कृषि उत्पादों का अग्रणी उत्पादक बना है। यह देश में फलों और सब्जियों के बड़े उत्पादकों में से भी एक है। इनके अलावा, राज्य में कपड़े, चमड़े, सूचना प्रौद्योगिकी, इन्जीनियरी के सामान की बड़ी महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाइयां हैं और पर्यटन उद्योग भी है। भारत और विदेशों के बड़े उद्योग घराने बिहार में हैं। जिनके परिणामस्वरूप बिहार ने, एक स्पंदमान (वाइब्रेन्ट) और वैश्विक प्रतियोगी औद्योगिक अर्थव्यवस्था बनने की राह पर चलना शुरू कर दिया है।
राज्य की लाभदायक विशेषताएं हैं:-
ऐसी सभी प्राकृतिक सुविधाओं को तेज गति के आर्थिक विकास और समृद्धि में परिवर्तित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार की ओर से पूरे विश्व के उद्यमियों का राज्य की प्रगति में साझेदार बनने के लिए स्वागत है। राज्य सरकार उनके निवेश के प्रस्तावों और परियोजनाओं के लिए उन्हें, गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचना और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराएगी।