छत्तीसगढ़ को मध्य प्रदेश राज्य से विभाजित कर अलग किया गया है जो नौवां सबसे बड़ा राज्य है जिसका क्षेत्रफल लगभग 135,133 वर्ग किलोमीटर है। यह 17 डिग्री 46’ डिग्री से 24’ डिग्री 5 उत्तर अक्षांश और 80 डिग्री 15’ से 84 डिग्री 20’ पूर्व देशांतर पर स्थित है। यह पूर्व में दक्षिणी झारखंड और ओडिशा से, पश्चिम में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से, उत्तर में उत्तर प्रदेश और पश्चिमी झारखंड एवं दक्षिण में आंध्र प्रदेश से घिरा हुआ है। यहां दो शक्तिशाली नदियां है जिन्हें इन्द्रावती और महानदी के रूप में जाना जाता है और महान विन्ध्याचल पर्वत श्रृंखला इस भूभाग पर स्थित है। इसकी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है जिसमें प्राचीन स्मारक, चट्टान पर खुदा हुआ मंदिर, बौद्ध स्थल, महल, गुफाएं, चट्टान पर चित्रकारी आदि शामिल हैं।
राज्य में प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है जैसे वन विरल जीव जन्तु, सतही जल और जल प्रपाती खनिज संसाधनों की दृष्टि से यह सबसे समृद्ध राज्य है जिसमें सभी मुख्य खनिजों का अपार भंडार है जिनमें हीरा भी शामिल है। उदाहरण के लिए भारत में सभी टिन अयस्क छत्तीसगढ़ में है। इसका लौह अयस्क भंडार विश्व में सर्वोत्तम है जो इसके बैलाडिला खानों में पाया जाता है और बॉक्साइट, चूना पत्थर, डोलोमाइट, कोरण्डम भी राज्य में पाए जाते हैं। इसके बड़े कोयले के भंडार की क्षमता इसे विद्युत केंद्र में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। ये सभी राज्य को उत्पादन की सबसे कम लागत पर औद्योगिक एकक स्थापित करने के राज्य को लिए आदर्श स्थान बनाते हैं। इसके साथ ही साथ तकनीकी रूप से जनशक्ति की उपलब्धता, जो भूगर्भ विज्ञान भू-भौतिकी, भू-रसायन खनिज लाभकरण, खनन अभियंता और पर्यावरण विज्ञान में प्रशिक्षित इस प्रकार से राज्य में सन्निहित इन प्राकृतिक लाभों को बढ़ाने के अनेकानेक अवसर हैं।
तद्नुसार राज्य ऐसे उद्योग की स्थापना करने हेतु निवेश आमंत्रित करता है जो निवेशक अनुकूल माहौल के आधार पर इसके प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य वर्धन करते हैं। इस प्रयोजन के लिए राज्य सरकार ने अनेकानेक नीति घोषणाएं और प्रोत्साहनों की घोषणा राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए की है। सरकार का संकेंद्रण कानून व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सामाजिक सुरक्षा जाल, राजकोषीय सुधारों और ई-शासन पर है। यह महसूस करते हुए कि इसका मानव संसाधन आधार इसकी सम्पन्नता की कुंजी है, सरकार जनता की सृजनात्मक ऊर्जा का विकास करने हेतु सभी प्रयास कर रही है। इसके अतिरिक्त राज्य की परिकल्पना दस्तावेज़ जो छत्तीसगढ़ 2010 के रूप में जाना जाता है, यह राज्य की प्रगति के लिए कार्य योजना बनाने द्वारा आगामी वर्षों में किए जाने वाली मुख्य कार्यवाहियां निर्धारित करता है। यह स्पष्ट रूप से राज्य के त्वरित और संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष जोर देता है।
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