औषधि एवं भैषजिकी उद्योग का भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रमुख स्थान है। इसने मूल संरचना के विकास के संदर्भ में काफी प्रगति की है। इस समय यह उद्योग व्यावहारिक तौर चिकित्सा उत्पादों की संपूर्ण रेंज का विनिर्माण कर रहा है। यह आधारभूत चरण के साथ साथ भैषजिकी मशीनरी और उपकरण से भारी तादाद में थोक दवा के विनिर्माण के लिए कच्ची सामग्री का उत्पादन करने में भी समर्थ है। इस उद्योग ने अच्छी थोक दवाओं और विनिर्माणों के कम कीमत वाले उत्पादक के रूप में वैश्विक मान्यता प्राप्त की है। बहुत सी प्रमुख कंपनियों ने विश्व भर में 60 से अधिक देशों में विपणन और विनिर्माण क्रियाकलापों की स्थापना की है।
भारत में रसायन और उर्वरक मंत्रालय में रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग, औषधि एवं भैषजिकी के लिए संबंधित प्राधिकरण है। विभाग का उद्देश्य देश में आम उपयोग की अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों के वाजिब दाम पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित करना है। यह देश में रसायनों/ पेट्रो-रसायनों और औषधियों में व़ृद्धि और विकास की प्राप्ति हेतु नीतियों और कार्यक्रमों को बनाता है और उनका कार्यान्वयन करता है।
इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए विभाग ने बहुत से कदम उठाए हैं। उद्देश्य के साथ भैषजिक नीति, की प्रमुख बातें है:-
- कम लागत के अच्छे उत्पादन के लिए देशज क्षमता को सुदृढ करना और भैषजिकी क्षेत्र में व्यापार की बाधाओं को कम करके औषधियों का निर्यात करना
- औषधि एवं भैषजिकी उत्पादन और वितरण पर गुणवत्ता नियंत्रण की प्रणाली को सुदृढ़ करना ताकि भारतीय भैषजिकी उद्योग को अच्छे आवश्यक अंशदान किया जा सके और औषधियों के यौक्तिक उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
- देश की आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त ढंग से भैषजिकी के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना जिसमें भारत में भैषजिकी में अनुसंधान और विकास में निवेश के उच्च स्तर को श्रृंखलाबद्ध करने के लिए प्रेरक वातावरण सृजित करके भारत की स्थानिक बीमारियों अथवा उसके संगतों पर विशेष तौर जोर देना
- भैषजिकी उद्योग के लिए एक प्रेरक मूल संरचना बनाना जो भैषजिकी उद्योग में नए निवेश को बढ़ावा दें और नई प्रौद्योगिकियों एवं नई दवाओं के प्रचालन को प्रोत्साहित करें।
ऐसे सभी कदमों के अनुसार औषधि महानियंत्रक (भारत) द्वारा समाशोधित की गई सभी थोक दवाओं के मामले में उनमें सभी मध्यवर्ती और विनिर्माणों सहित स्वत: मार्ग के माध्यम से शत-प्रतिशत तक विदेश प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआर) (समय-समय विहित शर्तों के अधीन) की अनुमति दी गई है।
इसके अलावा परम्परागत चिकित्सा प्रणाली का संचित ज्ञान; विशाल जैव-विविधता; विश्व-स्तरीय प्रौद्योगिकी; आदि जैसे लाभ इस क्षेत्र में बहुत से निवेश के अवसरों का स्रोत है।
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