खाद्य प्रसंस्करण कृषि अथवा उद्यान उपजों को ग्रेडिंग, सोर्टिंग, पैकजिंग आदि जैसी विभिन्न प्रौद्योगिकियां जो खाद्य उत्पादों के शेल्फ जीवन को बढ़ाती हैं, के उपयोग से मूल्य वर्धन की प्रक्रिया है। एक सुदृढ़ और गतिशील खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र किसी देश के समग्र आर्थिक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यह उद्योग और कृषि के बीच महत्वपूर्ण संपर्क और साहचर्य प्रदान करता है। इसकी तत्काल वृद्धि और रोजगार की संभावना वाले क्षेत्र के रूप में पहचान की गई है। यह कृषि क्रिया-कलापों के विविधीकरण, मूल्य वर्धन अवसरों को सुधारने और कृषि खाद्य उत्पादों के निर्यात के लिए अतिरिक्त उत्पाद की तरह कार्य करता है।
भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उत्पादन, खपत और निर्यात की संभावनाओं के संदर्भ में सबसे बड़े उद्योग में से एक है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ऐसे प्रवेषक खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास के लिए उत्तरदायी मुख्य केंद्रीय अभिकरण है। मंत्रालय में फल एवं सब्जियां के उत्पाद, डेयरी, माँस, मुर्गी पालन, मछली पालन, उपभोक्ता खाद्य, अनाज, गैर-शीरा आधारित एल्कोहोलिक पेयों, वातित जल और मृदु पेय शामिल है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के बढ़े हुए अवसर उत्पन्न करना, किसानों को आधुनिक प्रौद्योगिकी से लाभ उठाने में समर्थ बनाना और संसाधित खाद्य की मांग बढ़ाना है।
मंत्रालय इस उद्योग की स्वस्थ कार्यप्रणाली के लिए प्रेरक वातावरण सृजित करके इस क्षेत्र में व्यापक निवेश को प्रोत्साहित करने में सक्रिय रूप से शामिल है। इस प्रयोजन के लिए इस क्षेत्र को समय समय पर घोषित बहुत से नीतिगत उपायों, प्रोत्साहनों और योजनाओं के साथ उच्च प्राथमिकता प्रदान की गई है। 'राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति' ऐसी एक पहल है जिसका उद्देश्य निम्नलिखित के माध्यम से इस उद्योग में निवेश हेतु उचित वातावरण तैयार करना है:-
- ताजे भोजन, प्रसंस्कृत भोजन और प्रसंस्कृत भोजन के उत्पादन पर कर संरचना के यौक्ताकरण के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन/हस्तक्षेप।
- खाद्य उत्पादों के साथ साथ अच्छे माल। भावी विपणन, साम्यीकरण निधि आदि से संबंधित प्रावधानों को शामिल करने के लिए समुचित अधिनियमन द्वारा खाद्य विधियों का सुमेलीकरण और सरलीकरण।
- उत्पादन और उत्पादकता बढ़ा कर वर्ष भर सही प्रकार की और अच्छी कच्ची सामग्री की उपलब्धता का विस्तार करना।
- कच्ची सामग्री की उपलब्धता और संसाधित उत्पादों की विपणनता तुलना में इस क्षेत्र में योजित निवेश में समर्थ बनाने के लिए आंकड़ा आधार और बाज़ार आसूचना प्रणाली को सुदृढ़ बनाना।
- उत्पादन के निकट क्षेत्र में कृषि प्रसंस्करण सुविधाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करना ताकि अपशिष्ट से बचा जा सके और ढुलाई लागत को कम किया जा सके।
ऐसे नीतिगत प्रोत्साहनों के परिणामस्वरूप इस उद्योग के अधिकतर भागों में तीव्र वृद्धि देखी गई है। उदाहरण के लिए भार वार्षिक रूप से 90 मिलियन टन दुग्ध (विश्व में सबसे अधिक); 150 मिलियन टन फल एवं सब्जियां (दूसरा सबसे अधिक); 405 मिलियन पशुधन (सबसे अधिक); 240 मिलियन टन खाद्यान्न (तीसरा सबसे अधिक); 6.3 मिलियन टन मछली (तीसरा सबसे अधिक); 409 मिलियन कुक्कुट और 45,200 मिलियन अण्डों का उत्पादन कर रहा है।.
इस प्रकार भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश के लिए काफी अवसर मौजूद हैं जो इस तथ्य प्रोद्भूत होते हैं कि भारत विश्व में प्रमुख खाद्य उत्पादकों में से एक है और फसलों, फलों, सब्जियों, फूलों, पशुधन और समुद्री खाद्य की काफी किस्मों की प्रचुर मात्रा उपलब्ध हैं। यह इस क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रवाह की धनराशि से जाहिर होता है जो वर्ष 2005-06 और 2006-07 (सितम्बर, 2006 तक) में 333. 06 करोड़ रु. (लगभग 74.01 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा।
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