पत्तन
आंध्र प्रदेश का समुद्र तट 974 कि.मी. लंबा है जो राज्य के लिए तट पर असंख्य पत्तन विकसित करने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है। विशाखापट्टनम राज्य का मुख्य पत्तन है। यह देश में अपने बड़े कार्गो संचालन के लिए जाना जाता है। जबकि राज्य में मुख्य पत्तन काकिनादा, मछलीपट्टनम, कृष्णापट्टनम, गंगावरम, मुत्यालमपलेम कलिंगपट्टनम, भीमुनीपट्टनम, निजामपट्टनम, और वडरेवु में स्थित हैं। राज्य में और अधिक पत्तन मूल संरचना का विकास करने के लिए सरकार अनेकानेक पहलें कर रही है। उदाहरणार्थ तीन पत्तन अर्थात कृष्णापट्टनम, काकिनाडा और वाडरेवु का निजीकरण किया गया है।
विद्युत
आंध्र प्रदेश देश में तीसरा बड़ा विद्युत उपभोक्ता है जिस संस्थापन क्षमता 11,134 मेगावॉट है। राज्य में महत्वपूर्ण विद्युत परियोजनाएं हैं :- नागार्जुन सागर और नीलम संजीव रेड्डी सागर (श्री सैलम पनबिजली परियोजना) अपर सिलेरू, लोअर सिलेरू, तुंगभद्रा पनबिजली परियोजना और नेलोर। रामगुंडम, कोठागुडम, विजयवाड़ा और मुद्दानुर ताप विद्युत परियोजनाएं। श्री सैलम पनबिजली परियोजना जिसकी संस्थापित क्षमता 770 मेगावॉट है और नागार्जुन सागर परिसर जिसकी क्षमता 960 मेगावॉट है, वे पनबिजली उत्पादन के मुख्य स्रोत हैं। जबकि विजयवाड़ा ताप विद्युत केंद्र जिसकी संस्थापित क्षमता 1,260 मेगावॉट है और कोठगुंडम ताप विद्युत केंद्र जिसकी संस्थापित क्षमता 1200 मेगावॉट हैं ताप विद्युत उत्पादन के मुख्य स्रोत है। 1,000 मेगावॉट कोयला आधारित सिम्हाद्री ताप विद्युत केंद्र का लक्ष्य समस्त उत्पादित ऊर्जा की आपूर्ति राज्य को करना है।
दूर संचार
आंध्र प्रदेश में अच्छी तरह जुडी हुई दूरसंचार नेटवर्क हैं। 3,341 टेलीफोन केंद्र और 32.64 लाख टेलीफोन कनेक्शन राज्य में है। आंध्र प्रदेश टेलीकॉम सार्किल समस्त आंध्र प्रदेश राज्य को सेवा देता है जिसमें हैदराबाद और सिकंदराबाद और टवीन सिटी शामिल हैं अकेले इसमें 22 द्वितीय स्विचिंग क्षेत्र (एसएमए) हैं। इसके अतिरिक्त ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क बीएसएनए 44500 कि.मी. रियांलस 6000 कि.मी. भारत 3450 कि.मी. और टाटा 1700 कि.मी. जैसे अग्रणी कॉपोरेट आंध्र प्रदेश के लिए व्यापक संचार मुहैया कराते हैं।
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