मणिपुर देश के सुदूर उत्तर पूर्वी कोने पर स्थित है, इसका अधिकांश हिस्सा पहाड़ियों से भरा हुआ है। यहां निवेश के कई लाभ व अवसर हैं। यहां कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां निवेशकों को आकर्षित करने के लिए काफी संभावनाएं हैं।
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण
राज्य में कृषि योग्य परिस्थिति हैं। यह कई प्रकार के कृषि व बागवानी वाली प्राय: सभी फसलें उगाने के लिए उपयुक्त है। राज्य प्रचुर मात्रा में धान, गेहूं, मक्का, दलहन व ऑयल सीड (जैसे तेल, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी आदि) फल जैसे अनानास, नींबू, केला, नारंगी आदि और सब्जियां जैसे फूलगोभी, बंदगोभी, टमाटर व मटर आदि का उत्पादन किया जाता है।
इसके फलस्वरूप खाद्य संस्करण क्षेत्र कृषि, बागवानी, मछली पालन, मुर्गी पालन, पशु पालन और वन के विविधीकरण तथा वाणिज्यीकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस उद्योग के महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने इंफाल में 'खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण केंद्र और 'खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण हॉल' की स्थापना की है। इंफाल में एक खाद्य पार्क की भी स्थापना की जा रही है।
हथकरघा
हथकरघा उद्योग राज्य का सबसे बड़ा कुटीर उद्योग है। यहां यह उद्योग अनादि काल से फल-फूल रहा है। राज्य में यह सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध करा रहा है खासकर महिलाओं को। मणिपुर के प्रमुख हथकरघा उत्पाद साड़ी, चादर, पर्दे, फैशनवाले कपड़े, स्कार्फ व तकिए के कवर आदि है। अधिकांश जुलाहे जिन्हें हुनर व महीन डिजाइनिंग के लिए जाना जाता है। वे वांग खाई बायोन कांपू, कोंगमान, खोंग मैन उल्लाऊ आदि से हैं जो उत्कृष्ट सिल्क आदि उत्पादों के लिए प्रसिद्ध हैं। मणिपुरी कपड़े व शॉलों की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काफी मांग है।
तीन सरकारी एजेंसियां हथकरघा उत्पादन का काम करती हैं ये हैं
- मणिपुर डेवलपमेंट सोसायटी (एमडीएस)
- मणिपुर हैंडलूम एंड हैडीक्राफ्ट डेवलपमेंट कॉपोरेशन (एमएचएचडीसी)
- मणिपुर स्टेट हैंडलूम वीवर्स को-ऑपरेटिव सोसायटी (एमएसएचडब्ल्यूसीएस)
हैंडीक्राप्ट (दस्तकारी)
देश की विभिन्न दस्तकारी कलाओं में राज्य के दस्तकारी उद्योग का अनूठा स्थान है। इसके अंतर्गत व बेंत व बांस के बने उत्पादों के साथ-साथ मिट्टी के बर्तन बनाने की संस्कृति भी शामिल है। मणिपुर में मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रथा काफी पुरानी है और यह एंड्रो, सिकमाई, चैरन, थोगजाओ, नुंगवी व सेनापति जिले में कहीं-कहीं काफी फल-फूल रहा है। चूंकि बांस व बेंत काफी मात्रा में उपलब्ध है, टोकरी बिनना यहां के लोगों का लोकप्रिय व्यवसाय बन गया है। इसके अतिरिक्त मछली मारने के उपकरण भी बेंत व बांस के बनाए जाते हैं। घरेलू के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इन सभी उत्पादों की काफी मांग है।
पर्यटन
अपनी वनस्पतियों व जीव-जंतुओं के कारण 'मणिपुर का अटारी पर स्थित फूल', 'भारत का आभूषण' व 'पूरब का स्विटजरलैंड' आदि विविध नामों से वर्णन किया जाता है। लुभाने वाले प्राकृतिक दृश्यों में विलक्षण फूल-पौधे, निर्मल वन, लहराती नदियां, पहाड़ियों पर छाई हरियाली और इठलाती नदियां शामिल है, इन सबके अलावा पर्यटकों के लिए आकर्षण के कई केंद्र है जो राज्य में पर्यटन विकास का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है, श्री गोविंद जी मंदिर, खारीम बंद बाजार (इमा कैथल) युद्ध कब्रिस्तान, शहीद मीनार, नुपी सान (महिलाओं का युद्ध) मेमोरियल कॉम्प्लेक्स, खोंघापत उद्यान, आईएनए मेमोरियल (मोइरांग), लोकटक झील, कीबुल लामजो राष्ट्रीय पार्क, विष्णुपुर स्थित विष्णु मंदिर, सेंड्रा, मोरेह सिराय गांव, सिराय की पहाड़ियां, डूको घाटी, राजकीय अजायबघर, कैना पर्यटक निवास, खोंगजोम वार मेमोरियल कॉम्प्लेक्स आदि मणिपुर के कुछ महत्वपूर्ण पर्यटक केंद्र है।
सूचना प्रौद्योगिकी
राज्य में आईटी उद्योग की प्रचुर संभावना को देखते हुए मणिपुर सरकार इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को विकास के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उच्च प्राथमिकता देती है। राज्य में सक्रिय जन शक्ति और गुणवत्तापूर्ण कार्य बल हैं जो ऐसे उद्योगों के लिए अनुकूल हैं।
राज्य में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित उद्योगों के विकास के लिए और खाली पदों को भरने के लिए मणिपुर इंडस्ट्रियल कॉपोरेशन का गठन किया गया है। ऐसे आईटी क्षेत्र जहां निवेश के अवसर हैं इस प्रकार हैं -
- आईटी पार्क स्थापित करने से, आईटी आधारित सर्विस सेंटर व सूचना कियोस्क स्थापित करने में
- वायस, डाटा व वीडियो प्रसारण और प्रचार के लिए मणिपुर, स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (एमएएनएनटी) के बैकबोन नेटवर्क की स्थापना की गई है
- नागरिकों को मल्टी फंक्शन इलेक्ट्रॉनिक स्मार्ट कार्ड उपलब्ध कराना
- स्कूल व कॉलेजों में आईटी साक्षरता कार्यक्रम
- आईटी के जरिए दूरस्थ शिक्षा को राज्य में बढ़ावा देने के लिए आईटी साक्षरता कार्यक्रम
परियोजना रूपरेखा
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