कुल 2,22,236 वर्ग कि.मी. वाला जम्मू और कश्मीर भारत का सुदूर उत्तरी राज्य है। इसकी सीमा दक्षिण में हिमाचल प्रदेश के साथ, पश्चिम में पाकिस्तान के साथ, उत्तर और पूर्व में चीनी जनतंत्र के साथ, और उत्तर पश्चिम में अफगानिस्तान के साथ लगती है। यह उत्तरी अंक्षाश पर 32 डिग्री 15’ से 37 डिग्री 05’ और पूर्वी देशांतर पर 72 डिग्री 35’ से 83 डिग्री 20’ के बीच अवस्थित है। इसमें जम्मू, कश्मीर और लद्दाख नामक तीन जिला क्षेत्र हैं। श्रीनगर इसकी ग्रीष्म कालीन राजधानी है तथा जम्मू शीतकालीन। भौगोलिक दृष्टि से राज्य को चार भागों (जोनों) में बांटा गया है, जिनके नाम हैं पहाड़ी और अर्द्ध पहाड़ी इलाका जिसे आमतौर पर कांदी बेल्ट के नाम से जाना जाता है; शिवालिक रेंज, कश्मीर घाटी के पहाड़ और पीर पंजाल रेंज तथा लद्दाख और कारगिल का तिब्बती रास्ता (ट्रेक)।
राज्य कला, संस्कृति और इतिहास के साथ-साथ पुरातात्विक और ऐतिहासिक क्षेत्रों से समृद्ध है जो कि इसके वैभवपूर्ण अतीत का द्योतक है। राज्य के लोगों को वस्त्र उत्पादों की बुनाई और डिजाइन करने की कला विरासत में प्राप्त है। कदाचित इसी बजह से राज्य में अत्यधिक आधुनिक वस्त्र उद्योग स्थापित किया गया है। तथापि, हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम सेक्टर अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा अर्जित करने का साधन हैं।
राज्य वनस्पति और वन्य जीवन संपदा में भी समृद्ध है और इसमें खनिज संपदा के विशाल भण्डार भी हैं। यह देश के अन्य भागों के साथ दक्ष आधारभूत संरचनाओं के माध्यम से भली-भांति जुड़ा हुआ है। हिम आच्छादिक पहाड़ों के अलावा, राज्य में झिलमिलाती झीलें और खुशनुमा मौसम पर्यटक उद्योग में निवेश करने की अपार संभावनाएं उपलब्ध कराता है। कश्मीर घाटी अपनी सुंदर पहाड़ी भूदृश्यों के लिए प्रसिद्ध है, जम्मू ‘मंदिरों के नगर’ के रूप में प्रसिद्ध है जिसमें बहुत बड़ी संख्या में तीर्थ यात्री प्रत्येक वर्ष आते हैं। लद्दाख जो ‘लघु तिब्बत’ के नाम से भी जाना जाता है अपनी सुदूर पहाड़ी सुदंरता और बौद्ध संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है।
इन सभी लाभदायक परिस्थितियों के कारण, अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर कृषि, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट इत्यादि में अनेक व्यावसायिक अवसर उपलब्ध हैं। छोटे और बड़े दोनों व्यापारिक घराने/निवेशक अपनी औद्योगिक इकाइयां राज्य में स्थापित कर रहे हैं।