लक्षद्वीप भारत संघ का सबसे छोटा संघ शासित क्षेत्र (यू.टी.) है जिसका कुल क्षेत्रफल 32 वर्ग कि.मी. है। इसकी जनसंख्या का लगभग 43.6% ग्रामीण क्षेत्रों में व 56.3% जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में है। लक्ष्यद्वीप लगभग 27 द्वीपों का समूह है, जिनमें से मात्र 11 पर आवादी है। इन प्रवालद्वीपों (कॉरल) में 12 प्रवाल (अटोल), तीन समुन्द्री चट्टाने और जल में डूबे हुए बालू के किनारे हैं। ये अरब सागर में बेतरतीब विखरे हुए हैं और केरल के तटवर्ती नगर कोचीन से 220 से लेकर 440 कि.मी. की दूरी पर अवस्थित हैं। इन द्वीप समूहों का कोचीन के साथ संपर्क पानी के जहाज, हेलीकाप्टर व वायुयान सेवाओं के माध्यम से है।
लक्षद्वीप उत्तरी अंक्षाश के 8 डिग्री से 12 डिग्री 3’ और पूर्वी देशांतर के 71 डिग्री से 74 डिग्री के मध्य अवस्थित है। इसकी तटीय रेखा 132 कि. मी. की है,अनूप (लैगून) क्षेत्र 4200 वर्ग कि. मी. का है, जल क्षेत्र 20,000 वर्ग कि. मी. का है। इसके साथ ही साथ विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र 4 लाख वर्ग कि. मी. का है। यह भारत में अकेला कॉरल रीफ द्वीप है जो वनस्पति व वन्य जीव संपदा से संपन्न है। अपने सुंदर संमुद्र तटों व प्रदूषण मुक्त वातावरण के कारण यह जल खेलों व मछली पकड़ने इत्यादि के लिए पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गया है।
इस द्वीप के लोग अपनी आजीविका के लिए मुख्यत: कृषि पर निर्भर हैं। यहां की अकेली बड़ी फसल नारियल है। मछली पकड़ना यहां के लोगों का दूसरा मुख्य रोजगार है। तथापि लक्षद्वीप औद्योगिक रूप से बहुत अधिक विकसित क्षेत्र नही है। यहां पर कुछ छोटी औद्योगिक इकाइयां, जैसे नाव बनाना, टूना केनिंग, नारियल के धागों की कताई (कोयर यार्न स्पिनिंग), फाइबर फैक्ट्री, बेकरी, होज़री फैक्ट्री, सिरका व गुड़ बनाना इत्यादि। तेल और आटा चक्की व फर्नीचर बनाने जैसे कुछ उद्योग को-आपरेटिव सेक्टर में कार्यरत हैं।
इनके परिणामस्वरूप, लक्षद्वीप के प्रशासन द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था के प्रति निवेशकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। क्षेत्र के समग्र विकास के लिए, इसके द्वारा बहुत से नीतिगत निर्णय लिए गए हैं व प्रोत्साहन दिए गए हैं।
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