महाराष्ट्र, प्रायद्वीपीय भारत के उत्तरी केन्द्र में स्थित तीसरा सबसे बडा राज्य है जिसका क्षेत्रफल 3,07,713 वर्ग कि.मी. है। इसके उत्तर में गुजरात और मध्यप्रदेश; पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में छत्तीसगढ और दक्षिण में आध्रप्रदेश है। यह भारत के पश्चिम तट पर स्थित है और इसकी हरित कोंकण क्षेत्र में 720 कि.मी. लंबी तटीय रेखा है। राज्य में असाधारण भौतिक समरूपता हैं जो कि इसके भू-विज्ञान के कारण है। राज्य की सबसे प्रमुख भौतिक विशेषता पठार है। महाराष्ट्र पठारों का पठार है, इसके पश्चिम में सहयादि की पहाडियां है जो समुद्री तट के समांनतर हैं। सहयादि श्रेणी राज्य की भौतिक रीढ की हड्डी है। इसके अतिरिक्त राज्य मे उत्तर में सतपुड़ा श्रेणी है और यह राज्य की प्राकृतिक सीमा भी है जबकि राज्य के केन्द्रीय भाग में अजांता और सतमाला श्रेणियां हैं।
राज्य की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक क्षेत्र का महत्त्वपूर्ण स्थान है। खाद्य उत्पाद, तंबाकू और संबंधित उत्पाद, सूत्री वस्त्र, अन्य वस्त्र उत्पाद, कागज और कागज के उत्पाद, मुद्रण और प्रकाशन, रबड़, प्लास्टिक, रसायन और रसायनिक उत्पाद, मशीनरी, इलेक्ट्रानिक यंत्र व उपकरण तथा परिवहन के साधनों का राज्य के औद्योगिक उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान है।
महाराष्ट्र में सभी भारतीय राज्यों में सबसे अधिक शहरीकरण हुआ हैं। इसे भारत का शक्तिकेन्द्र माना जाता है और इसकी राजधानी मुंबई भारत के वित्तीय और वाणिज्यिक बाजारों का केन्द्रीय बिन्दु है। मुंबई के सबसे बड़े व्यवसाय केन्द्र होने के कारण विश्वभार के निवेशक इसकी ओर आकर्षित होते हैं। जबकि पुणे, महाराष्ट्र का दूसरा सबसे बडा शहर, राज्य की सांस्कृतिक राजधानी है और तेजी से मुख्य औद्योगिक शहर में विकसित हो रहा है।
राज्य की अन्य लाभप्रद विशेषताएं निम्नवत् हैं :-
- प्रतिक्रियाशील प्रशासनिक सेट-अप;
- खनिजों की प्रचुरता;
- सुदृढ कृषि और औद्योगिक आधार;
- शिक्षित और व्यावसायिक कार्यबल;
- उत्कृष्ट अनुसंधान और विकास सुविधाए;
- सु-संबद्ध परिवहन व्यवस्था;
- घरेलू से लेकर विश्वस्तरीय शैक्षिक और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थाएं;
- सक्षम विद्युत आपूर्ति प्रणाली और दूरसंचार नेटवर्क;
- बड़ा उपभोक्ता बाजार; इत्यादि।
इन सबके साथ-साथ महाराष्ट्र सरकार राज्य में पूंजीगत निवेश के प्रवाह को बढाने के लिए सभी प्रयास कर रही है। यह उद्योग और व्यवसाय के विकास को कई दूरदर्शी नीति संबंधी पहलों और प्रोत्साहनों के माध्यम से सहयोग दे रही है। इन नीतियों का उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर को सुधारना और राज्य के समग्र विकास का संवर्धन करना है। इसके परिणामस्वरूप कई निवेशकों ने राज्य में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए महाराष्ट्र में रुचि दिखाई है। उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि-प्रसंस्करण, वस्त्र, आटोमोबाइल्स, जैव प्रौद्योगिकी जैसे भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित की हैं।
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