खनिज और खनन क्षेत्र किसी राष्ट्र के वृद्धि और विकास के वर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। अधिकतर मूलभूत विनिर्माण उद्योग खनिज संसाधनों की उपलब्धता और अन्वेषण पर निर्भर हैं। उदाहरण के लिए कोयला और लोहा, लोहा और इस्पात उद्योग की वृद्धि के लिए आवश्यक मूलभूत खनिज हैं। इसी तरह से अभ्रक, मैंग्नीज, तांबा, सीसा और जस्ता जैसे खनिज, विभिन्न स्तर के साथ आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
भारत महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों से सम्पन्न है। भारत के संविधान के अंतर्गत खनिज संसाधनों के प्रबंध का दायित्व संघ सूची और राज्य सूची के संबंध में क्रमश: केंद्र सरकार और राज्य सरकार का है। केंद्रीय स्तर पर खान मंत्रालय सभी खनिजों (प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम को छोड़कर) के सर्वेक्षण और अन्वेषण; एल्युमिनियम, तांबा, जस्ता, सोना, निकल आदि जैसे गैर-लौह धातुओं के खनन और धातु विज्ञान; और खानों एवं खनिजों (कोयला और लिग्नाइट को छोड़कर) से संबंधित अधिनियमों के प्रशासन के लिए उत्तरदायी है।
खान एवं खनिज (विकास और विनियम) अधिनियम, 1957 ('एमएमडीआर') और खान अधिनियम, 1952 के साल साथ उनके अंतर्गत बनाए गए नियम और विनियम भारत में खनन क्षेत्र की मूलभूत विधियां बनाते हैं। खान एवं खनिज (विनियम और विकास) अधिनियम, 1957 खान विनियमों और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस को छोड़कर सभी खनिजों के विकास कानून ढांचा विहित करते हैं।
खनिज के क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने और नवीनतम प्रौद्योगिकी आकर्षित करने के लिए मंत्रालयने वर्ष 1993 में राष्ट्रीय खनिज नीति बनाई थी और निवेशकों को बहुत ये प्रोत्साहन एवं रियायतें प्रदान की थी। इस नीति को इस क्षेत्र को आगे खोलने और घरेलू और विदेशी निवेश के प्रवाह को बढ़ाने के लिए सफलतापूर्वक संशोधित की गई है। उदाहरण के लिए वर्ष 1994 से तेरह खनिजों के अन्वेषण और दोहन की अनुमति दी गई हैं। साथ ही सभी गैर ईंधन और गैर-परमाणु खनिजों (सोना और चांदी सहित) के अन्वेषण और दोहन के लिए शत-प्रतिशत विदेश प्रत्यक्ष निवेश स्वत: अनुमोदन अनुज्ञेय है। तथापि, कीमती पत्थरों और हीरों के लिए 74 प्रतिशत तक अनुज्ञेय है।
राष्ट्रीय खनिज नीति की व्यापक समीक्षा और इस क्षेत्र में निवेश के वातावरण को और सुधारने के लिए योजना आयोग ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है ताकि नीति को वैश्विक अर्थव्यवस्था की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार बनाया जा सके। सरकार द्वारा दिए गए ऐसे प्रोत्साहनों से एक निवेशक को आधुनिक तकनीकियों का उपयोग करके उप-सतह-निक्षेपों की खोज करने के लिए और मूल्य वर्धित उत्पादों में विनिर्माण के लिए गहन अवसर हैं।
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