भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यह एक तीव्र वर्धनकारी मुक्त बाज़ार लोकतंत्र है जो विनिर्माणकारी एवं सेवा उद्योग के लिए एक केंद्र के रूप में वैश्विक अग्र मोर्चे पर आया है। यह क्रय शक्ति तुल्यता (पीपीपी) के अर्थ में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तथा विश्व का दसवां सबसे बड़ा औद्योगीकृत देश है। इसकी विविधीकृत प्राकृतिक एवं मानव संसाधन आधार; एक विशाल उपभोक्ता बाज़ार; एक सु-संयोजित मूल संरचना संघटन; ठोस बृहद्-आर्थिक आधार, इत्यादि ने विश्व मंच पर इसकी स्थिति को प्रतिस्पर्धी बना दिया है।
इसके अतिरिक्त, सुधारों की प्रक्रिया तथा अर्थव्यवस्था के परिणामी अपविनियमन, उदारीकरण तथा वैश्वीकरण ने देश की विशाल अभिवृद्धि संभाव्यता को निर्मुक्त कर दिया है। इसने भारत को घरेलू तथा विदेशी निवेशों के लिए एक वांछनीय गंतव्य स्थल बना दिया है। राष्ट्रपार निगमों में यह द्वितीय सर्वाधिक आकर्षक निवेश गंतव्य बन गया है (यूएनसीटीएडी की विश्व निवेश रिपोर्ट, 2005) तथा वर्ष 2004-07 के लिए यह शीर्षस्थ तीन निवेश 'हॉट-स्पॉट' में से एक है (यूएनसीटीएडी कॉर्पोरेट लोकेशन, अप्रैल 2004)। परिणामस्वरूप, भारत विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) तथा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई), दोनों के माध्यम से वर्धित विदेशी निवेश आकृष्ट कर रहा है। उदाहरणार्थ, अगस्त 1991 से सितम्बर 2006 तक संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अंतर्वाह की राशि 1,81,566 करोड़ रुपए (43.29 बिलियन अमेरिकी डॉलर) थी। जबकि अप्रैल-सितंबर 2006 के दौरान, कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश अंतर्वाह ('पुन : निवेशित अर्जनों' तथा 'अन्य पूंजी संघटकों' को छोड़कर) की राशि, 20,155 करोड़ रुपए (4.38 बिलियन अमेरिकी डॉलर) थी। उच्च संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकृष्ट करने वाले क्षेत्र वैद्युत उपकरण हैं जिनके बाद सेवाएं करने वाले क्षेत्र वैद्युत उपकरण हैं जिनके बाद सेवाएं तथा दूरसंचार का स्थान है। इसी प्रकार, नई दिल्ली, मुंबई, बंगलौर तथा चेन्नई विदेशी प्रत्यक्ष अंतर्वाहों के लिए गंतव्य स्थलों के रूप में मान्य प्रथम चार स्थल हैं।
देश में निवेश प्रवाह को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने अनेक निवेश सुविधाकारी अभिकरण स्थापित किए हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं:-
- विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी):- की स्थापना वित्त मंत्रालय में विशेष रूप से विदेशी निवेश प्रस्तावों की अनुमोदन प्रक्रिया को त्वरित करने के लिए की गई है। यह विदेशी प्रत्यक्ष निवेश संबंधी सरकार की नीति को निष्पादित करने वाला सचिवालय है। एफआईपीबी सचिवालय में प्राप्त सभी प्रस्तावों पर बोर्ड द्वारा विचार किया जाता है।
- विदेशी निवेश क्रियान्वयन प्राधिकरण (एफआईआईए):- की स्थापना वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में की गई है जिसकी उद्देश्य है - विदेशी प्रत्यक्ष निवेश अनुमोदन के त्वरित प्रक्रियान्वयन एवं कार्यान्वयन को सुकर बनाना; विदेशी निवेशकों को आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने में उनकी सहायता करके उनके लिए एक सक्रिय स्थल पश्च देखभाल सेवा की व्यवस्था करना; प्रचालनात्मक समस्याओं को सुलझाना तथा समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए विभिनन सरकारी अभिकरणों से मुलाकात करना। इस प्रकार यह निवेशकों के साथ साथ अनुमोदन प्राधिकरणों को समझने तथा उनकी समस्याओं का निवारण करने; तथा बहु अभिकरण परामर्श इत्यादि आरम्भ करने की भूमिका का अभिग्रहण करता है।
- निवेश आयोग (आईसी):- की स्थापना वित्त मंत्रालय में इन उद्देश्यों से की गई थी भारत में निवेश का संवर्धन करने वाले नीतिगत तथा प्रक्रियात्मक परिवर्तनों के संबंध में सरकार को सलाह देना; उन परियोजनाओं तथा निवेश प्रस्तावों की अनुशंसा करना जिनकों तीव्र ट्रैक पर डाला जाता है/प्रेरित किया जाना है और इस प्रकार एक निवेश के रूप में भारत को संवर्धित करना।
- औद्योगिक सहायता सचिवालय (एसआईए):- औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग में कार्यरत है, भारत में औद्योगिक निवेश के द्वारामार्ग (प्रवेशद्वार) के रूप में कार्य करता है। यह उद्यमकारित सहायता के लिए एकल बिंदु समाशोधन की व्यवस्था करता है तथा सरकारी अनुमोदन की अपेक्षा वाले निवेशक आवेदनों के प्रक्रियान्वयन को सुकर बनाता है।
- इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन(आईबीईएफ):- भारत संबंधी व्यापक सूचना का संग्रहण, समेकन एवं प्रसार करता है। इसका विकास भारत संबंधी गहन सूचना एवं अंतदृर्ष्टि हेतु एकल बिंदु संसाधन के रूप में किया गया है। यह भारत के आर्थिक एवं कारोबार फायदों पर संकेन्द्रित भली भांति अनुसंधान किए गए प्रकाशनों की व्यापक श्रृंखला भी तैयार करता है।
ऐसे सांस्थानिक संघटन के माध्यम से भारत मूल संरचना क्षेत्रक सहित अर्थव्यवस्था के विभिन्न खंडों में अनेक नीतिगत उपाय तथा प्रोत्साहनों को क्रियान्वित करता रहा है। इससे निवेशक अनुकूल माहौल का सृजन हुआ है तथा देश में निवेश के असंख्य अवसर खुल गए हैं।