विद्युत किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास के लिए एक मुख्य आधारभूत आवश्यकता है। इसकी उपलब्धता, पहुंच और वहनीयता का स्तर अच्छे जीवन का एक प्रमुख निर्धारक है। भारत विश्व का छठा सबसे बड़ा उपभोक्ता है (जिसका हिस्सा विश्व के कुल वार्षिक उपयोग में लगभग 3.5 प्रतिशत है। भारत में स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता स्वतंत्रता के बाद 85 गुना से भी अधिक बढ़ी है और 1,28,182.47 मेगावॉट (दिनांक 31 जनवरी, 2007 की स्थिति के अनुसार) तक पहुंच गई है जिसमें 8414984 मेगावॉट (तापीय); 33941.77 मेगावॉट (जलीय); 3900 मेगावॉट (परमाणु); और 6190.06 मेगावॉट (नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत) शामिल है।
विद्युत मंत्रालय ने देश में विद्युत उत्पादन क्षमता को बढ़ाने और ऊर्जा कौशलता को बढ़ावा देने के लिए निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए बहुत से नीतिगत कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता, प्रौद्योगिकी, उत्पादन की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए विद्युत क्षेत्र में बढ़े हुए विकास और सभी क्षेत्रों के लिए विद्युत पूर्ति के लिए दिशा-निर्देश विहित करने के लिए राष्ट्रीय विद्युत नीति की घोषणा की गई है। उक्त नीति का उद्देश्य निम्नलिखित उद्देश्य प्राप्त करना है:-
मंत्रालय ने निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए अनेक नीतिगत उपाय किए हैं ताकि देश में विद्युत उत्पादन क्षमता में वृद्धि और ऊर्जा सक्षमता को प्रोत्साहन दिया जा सके। उदाहरण के लिए, विद्युत क्षेत्र में त्वरित विकास के लिए और सभी क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत बनाने के लिए राष्ट्रीय विद्युत नीति की घोषणा की गई है, ताकि ऊर्जा संसाधनों, प्रौद्योगिकी, उत्पादन की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा मुद्दों की उपलब्धता को ध्यान में रखा जा सके। यह नीति निम्नलिखित उद्देश्यों की प्राप्ति पर लक्षित हैं -
- विद्युत तक पहुंच, जो इसे अगले पांच वर्षों में सभी घरों के लिए उपलब्ध कराना;
- वर्ष 2012 तक मांग की पूर्ण पूर्ति और विद्युत की कमी से निजात पाना;
- कुशल ढंग से और उचित दरों पर विनिर्दिष्ट मानकों की विश्वसनीय और अच्छी विद्युत आपूर्ति;
- प्रति व्यक्ति विद्युत उपलब्धता को बढ़ाकर 1000 यूनिट से अधिक करना;
- वर्ष 2012 तक अच्छी विशेषता के तौर पर 1 यूनिट/गृहस्थ/दिन की न्यूनतम जीवन खपत;
- उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, आदि।
विद्युत क्षेत्र निजी क्षेत्र में निवेश के लिए खोले जोन वाले क्षेत्रों में प्रथम क्षेत्र है। जबकि आरंभिक जोर विद्युत उत्पादन परियोजनाओं में निवेश पर था, अनुवर्ती रूप से इसकी वितरण और पारेषण परियोजनाओं में भी अनुमति दी गई थी। भारत सरकार बनाओं ग्रहण करो- चलाओ आधार पर विद्युत उत्पादन परियोजनाओं पर आधारित नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापना के लिए निवेशकों को भी प्रोत्साहित कर रही है। पारेषण क्षेत्र में निजी क्षेत्र भागीदारी के दिशा-निर्देशों में दो विशेष मार्ग निर्धारित किए गए है:- (i) संयुक्त उद्यम (जेवी) जिसमें केंद्रीय पारेषण उपक्रम (एसटीयू) की कम से कम 26 प्रतिशत इक्विटी होगी और शेष संयुक्त उद्यम भागीदार (जेवीपी) द्वारा अंशदान दिया जाएगा;और (ii) स्वतंत्र निजी पारेषण कंपनी (आईपीटीसी) मार्ग जिसमें 100 प्रतिशत इक्विटी निजी कंपनी की होगी। इस प्रकार विद्युत सेना के सभी हिस्सों में निवेश के महत्वपूर्ण अवसर मौजूद हैं।.
^ ऊपर