राजस्थान, भारत के उत्तर पश्चिम भाग में स्थित है और इसका कुल क्षेत्रफल 342,239 वर्ग कि.मी. (132,139 वर्ग मील) है। यह 23 डिग्री 3 और 30 डिग्री 12 उत्तरी अक्षांश और 69 डिग्री 30 और 78 डिग्री 17 पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है। इसके पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में पंजाब; उत्तर-पूर्व में हरियाणा, पूर्व में उत्तर प्रदेश, दक्षिण पूर्व में मध्य प्रदेश और दक्षिण पश्चिम में गुजरात है। राज्य का दक्षिण भाग कच्छ की खाडी से लगभग 225 कि.मी. और अरब सागर से लागभग 400 कि.मी. दूर है।
राज्य में प्राकृतिक सुंदरता-घने वन, पहाडिया, मरूस्थल और घाटिया प्रचुर मात्रा में है। अरावली (विश्व की सबसे पुरानी पर्वत श्रंखलाओं में से एक) की उदात्त पहाडियां और ग्रेट इंडियन मरूस्थल (उपमहाद्वीप का एकमात्र मरूस्थल) के सुनहरे रेत के टीले राजस्थान की प्राकृतिक सुंदरता की दो प्रमुख विशेषताएं है। इसकी सांस्कृतिक संपदा में किले, महल, नक्काशीदार मंदिर, हवेलियां, म्यूजियम, पुरातत्त्व स्थल और आर्ट गैलरियां आदि है जो इसकी महान सांस्कृतिक विरासत को भावी पीढियों के लिए संजो कर रखती हैं। यहां लोगों, रीति रिवाजों, संस्कृति वेशभूषा, संगीत, बोलियां, खानपान, भू-आकृति सभी में विविधता पाई जाती है।
यह संसाधनों से प्रचुर राज्य है जहां पर दूसरा सबसे बड़ा धातु और अधातु खनिज भंडार है। यह वोलस्टोनाइट, जस्ता और तांबे का लगभग एकमात्र उत्पादक है। यह कई कृषि फसलों का प्रमुख उत्पादक है। राज्य की अन्य लाभकारी विशेषताएं निम्न हैं :-
- सहयोगी सरकारी तंत्र;
- कुशल और मेहनती मानव संसाधन;
- शांत औद्योगिक वातावरण;
- तकनीकी शिक्षा हेतु सुदृढ संस्थागत ढांचा;
- सक्षम मूल संरचनात्मक ढांचा;
- विस्तृत उपभोक्ता बाजार, इत्यादि
इसके परिणामस्वरूप राजस्थान ने बड़ी संख्या में निवेशकों को राज्य में प्रचालन इकाइयां स्थापित करने के लिए आकर्षित किया है। उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी; रसायन, कृषि प्रसंस्करण, सीमेंट, ग्रेनाइट, इलेक्ट्रानिक्स और इंजीनियरिंग जैसे विविध क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित की है। निवेश के प्रवाह को और बढाने के लिए राजस्थान सरकार ने अपनी अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के लिए कई नीति संबंधी उपाय और प्रोत्साहनों का प्रावधान किया है।
^ ऊपर